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हर्षवर्धन काल

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हर्षवर्धन काल

Sep 4, 2015
हर्षवर्धन के साम्राज्य की राजधानी कन्नौज थी। उसने 606 ईस्वी से 647 ईस्वी तक शासन किया था। उसका साम्राज्य पंजाब से उत्तरी उड़ीसा तथा हिमालय से नर्मदा नदी के तट तक फैला हुआ था। हर्षवर्धन पुष्यभूति राजवंश से संबंध रखता था जिसकी स्थापना नरवर्धन ने 5वीं या छठी शताब्दी ईस्वी के आरम्भ में की थी। यह केवल थानेश्वर के राजा प्रभाकर वर्धन (हर्षवर्धन के पिता) के अधीन था। पुष्यभूति समृद्ध राजवंश था और इसने महाराजाधिराज का खिताब प्राप्त किया था। हर्षवर्धन 606 ईस्वी में सिंहासन का उत्तराधिकारी बना था।

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तराइन की लड़ाई

Aug 31, 2015
राजपूतों द्वारा लड़ा गया पहला युद्ध तराइन की लड़ाई (1191 AD ) थी | इस युद्ध में चौहान राजवंश के पृथ्वी राज ने मुहम्मद गौरी को हरियाणा में थानेश्वर के निकट तराइन में पराजित कर दिया था | तराइन की दूसरी लड़ाई (1192 AD ) भी तराइन में ही लड़ी गई जिसमे मुहम्मद गौरी के द्वारा पृथ्वीराज को पराजित किया गया व मार दिया गया |

भारत का प्राचीन दर्शन-शास्त्र

Aug 19, 2015
भारत में दर्शन- शास्त्र के छः विद्यालयों का विकास ईस्वी युग के शुरुआत के साथ ही हो गया था | ये निम्न इस प्रकार थे: 1) योग, 2) न्याय, 3) मीमांसा, 4) वेदांता, 5) वैशेशिखा, 6) संख्या | इन छः सिद्धांतों की सही औपचारिक तिथि पता नहीं है | इन छः प्रणालियों के बनने की सही तिथि पता नहीं हैं क्यूंकि तब तक लिखावट के ना बनने से इनका अध्ययन पूरी तरह मौखिक है |हालांकि इनकी शुरुआत लगभग 2000 -3000 या इससे ज्यादा साल पहले हुई | कुछ दर्शन शास्त्री कहते हैं कि इनकी जड़ें 5000-10000 साल या उससे भी पहले की हैं |

चोल राज्य : प्रशासन, कला और वास्तु-कला

Aug 19, 2015
चोल वंश प्रमुख रूप से तमिल वंश था जिन्होने मुख्यतः भारत के दक्षिण में 13वीं सदी तक शासन किया | सभी शासकों में ,करिकला चोल आरंभिक चोल राजाओं में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थे | चोल वंश के पास पीतल के कुछ बेहतरीन नमूने तथा अन्य मूर्तियाँ हैं जैसे नाचते हुए नटराज की मूर्ति और तंजावुर ( तमिलनाडु) का बृहदीस्वरर मंदिर इन्हीं के कुछ बेहतरीन उदाहरण हैं |
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