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परीक्षापयोगी सामान्य ज्ञान

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रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773

Nov 16, 2015
बंगाल के कुप्रशासन से उपजी परिस्थितियों ने ब्रिटिश संसद को ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों की जाँच हेतु बाध्य कर दिया| ब्रिटिश संसद ने पाया कि भारत में कंपनी की गतिविधियों को नियंत्रित करने की जरुरत है और इसी जरुरत की पूर्ति के लिए 1773 ई. में रेग्युलेटिंग एक्ट पारित किया गया| यह एक्ट भारत के सम्बन्ध प्रत्यक्ष हस्तक्षेप हेतु ब्रिटिश सरकार द्वारा उठाया गया पहला कदम था |इस एक्ट का उद्देश्य व्यापारिक कंपनी के हाथों से राजनीतिक शक्ति छीनने की ओर एक कदम बढाना था|

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चार्टर अधिनियम,1793

Nov 16, 2015
1793 ई. में पारित चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को अगले बीस वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया और गवर्नर जनरल के अधिकार क्षेत्र में बम्बई और मद्रास के गवर्नर को भी शामिल कर दिया |सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को खुले सागर तक बढ़ा दिया |इस अधिनियम के द्वारा ब्रिटिशों ने भारत पर शासन करने के विस्तारवादी नीति पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया और भारतीय लोगों के अधिकारों व संपत्ति को भी नियंत्रित करने लगे तथा न्यायालयों को अपने निर्णयों को स्वयं द्वारा निर्मित सामान्य संहिता के आधार पर नियंत्रित करने के लिए बाध्य किया|

1853 ई. का चार्टर अधिनियम

Nov 16, 2015
1853 ई. का चार्टर एक्ट, 1852 ई. की सेलेक्ट कमेटी की जाँच रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया था| राजा राममोहन राय की इंलैंड यात्रा और बॉम्बे एसोसिएशन व मद्रास नेटिव एसोसिएशन की याचिकाओं का परिणाम 1853 ई. का चार्टर एक्ट था| इस अधिनियम द्वारा भारतीय (केंद्रीय) विधान परिषद् में सर्वप्रथम क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया|गवर्नर जनरल की परिषद् में मद्रास,बॉम्बे, बंगाल और आगरा की स्थानीय (प्रांतीय) सरकारों द्वारा छह नए विधान परिषद् के सदस्य नियुक्त किये गए|

1858 ई. का भारत सरकार अधिनियम

Nov 16, 2015
अगस्त 1858 ई. में ब्रिटिश संसद ने एक अधिनियम पारित कर भारत में कंपनी के शासन को समाप्त कर दिया| इस अधिनियम द्वारा भारत के शासन का नियंत्रण ब्रिटिश सम्राट को सौंप दिया गया| यह 1857 के विद्रोह का परिणाम था | इस उद्घोषणा द्वारा भारत के लोगों को यह आश्वासन दिया गया कि जाति,रंग व प्रजाति आदि के आधार पर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा| इस अधिनियम द्वारा भारत के गवर्नर जनरल को वायसराय, जिसका अर्थ था-सम्राट का प्रतिनिधि, कहा जाने लगा|

1833 ई. का चार्टर अधिनियम

Nov 16, 2015
1833 ई. का चार्टर अधिनियम इंग्लैंड में हुई औद्योगिक क्रांति का परिणाम था ताकि इंग्लैंड में मुक्त व्यापार नीति के आधार पर बड़ी मात्रा में उत्पादित माल हेतु बाज़ार के रूप में भारत का उपयोग किया जा सके| अतः 1833 का चार्टर अधिनियम उदारवादी संकल्पना के आधार पर तैयार किया गया था| इस अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल कहा जाने लगा| लॉर्ड विलियम बेंटिक को “ब्रिटिश भारत का प्रथम गवर्नर जनरल” बनाया गया|

1813 का चार्टर अधिनियम

Nov 16, 2015
लम्बे समय तक चले नैपोलियन युद्ध और महाद्वीपीय प्रणाली के क्रियान्वयन के कारण .ब्रिटिश व्यापार में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गयी| दूसरी ओर, ब्रिटिश व्यापारी लगातार कंपनी-व्यापार को सभी निजी व्यापारियों हेतु खोलने की मांग कर रहे थे| अतः उनकी मांगों को पूरा करने के लिए 1813 का चार्टर अधिनियम (1813 ई. का ईस्ट इंडिया कंपनी अधिनियम) पारित किया गया | यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक ऐसा अधिनियम था जिसने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को जारी रखा|

पिट्स इंडिया एक्ट 1784

Nov 16, 2015
1773 ई. के रेग्युलेटिंग एक्ट की कमियों को दूर करने और कंपनी के भारतीय क्षेत्रों के प्रशासन को अधिक सक्षम और उत्तरदायित्वपूर्ण बनाने के लिये अगले एक दशक के दौरान जाँच के कई दौर चले और ब्रिटिश संसद द्वारा अनेक कदम उठाये गए| इनमें सबसे महत्पूर्ण कदम 1784 ई. में पिट्स इंडिया एक्ट को पारित किया जाना था| यह एक्ट इस दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है कि इसने कंपनी की गतिविधियों और प्रशासन के सम्बन्ध में ब्रिटिश सरकार को सर्वोच्च नियंत्रण शक्ति प्रदान कर दी | यह पहला अवसर था जब कंपनी के अधीन क्षेत्रों को ब्रिटेन के अधीन क्षेत्र कहा गया|

व्यपगत का सिद्धांत

Nov 16, 2015
व्यपगत का सिद्धांत एक साम्राज्यवाद समर्थक उपागम था जिसका उद्देश्य भारत में ब्रिटिश राज्यक्षेत्र का विस्तार करना था| इस सिद्धांत का प्रारंभ लॉर्ड डलहौजी द्वारा किया गया था| इस सिद्धांत के अनुसार वे राज्य, जिनका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, अपने शासन करने के अधिकार खो देते थे |साथ ही उत्तराधिकारी को गोद लेने पर भी उनके राज्य वापस प्राप्त नहीं किया जा सकता था| सतारा(1848 ई.) जयपुर(1849 ई.) संभलपुर(1849 ई.) बाहत(1850 ई.) उदयपुर(1852 झाँसी(1853 ई.) नागपुर(1854 ई.) ऐसे भारतीय राज्य थे जिनका डलहौजी द्वारा व्यपगत के सिद्धांत के आधार पर ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया था|

सहायक संधि

Nov 16, 2015
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने हस्तक्षेप की नीति को प्रारंभ किया और और पूर्व में अपने अधीन किये गये शासकों के क्षेत्रों का प्रयोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं अर्थात भारतीय राज्यों को ब्रिटिश शक्ति के अधीन लाने के लिए किया| सहायक संधि हस्तक्षेप की नीति थी जिसका प्रयोग भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली (1798-1805 ई.) द्वारा भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के लिए किया गया| इस प्रणाली में यह कहा गया की प्रत्येक भारतीय शासक को अपने राज्य में ब्रिटिश सेना के रख-रखाव और अपने विरोधियों से सुरक्षा के बदले में धन का भुगतान करना होगा|

बक्सर की लड़ाई

Nov 16, 2015
बक्सर का युद्ध बंगाल के नवाब मीर कासिम,अवध के नवाब सुजाउद्दौला व मुग़ल शासक शाह आलम द्वितीय की संयुक्त सेना और अंग्रेजों के मध्य लड़ा गया था | यही वह निर्णायक युद्ध था जिसने अंग्रेजों को अगले दो सौ वर्षों के लिए भारत के शासक के रूप में स्थापित कर दिया| यह युद्ध अंग्रेजों द्वारा फरमान और दस्तक के दुरुपयोग और उनकी विस्तारवादी व्यापारिक आकांक्षाओं का परिणाम था| अंग्रेजों व फ्रांसीसियों के बीच लड़े गए कर्नाटक युद्ध ,प्लासी के युद्ध और बक्सर के युद्ध ने भारत में ब्रिटिश सफलता के दौर को प्रारंभ कर दिया|

जैन धर्म

Nov 6, 2015
जैन को जीन के अनुयायी के तौर पर परिभाषित किया जाता है | जीन का अर्थ है विजेता | जैन धर्म बौद्ध धर्म से कई सदी पहले शुरू हो गया था परंतु बाद में महावीर के द्वारा इसे पुनर्जीवित किया गया, जोकि 24वें तीर्थंकार थे| जैन सिद्धांतों के अनुसार, जैन धर्म सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है जिसकी ना ही शुरुआत है और ना ही अंत है |

बौद्ध विद्वान

Nov 6, 2015
बौद्ध शिक्षाओं का मुख्य उद्देश्य व्यति के मोक्ष या निर्वाण को सुरक्षित रखना था | बौद्ध धर्म ने औरतों व शूद्र के लिए दरवाजे खोल कर समाज मे एक नया महत्वपूर्ण प्रभाव डाला | बौद्ध धर्म ने लोगों को किसी भी चीज़ को हल्के में न लेने के लिए सिखाया बल्कि बहस और योग्यता के आधार पर न्याय करना सिखाया | बौद्ध धर्म ने लोगों के बीच राष्ट्रीयता का प्रचार किया | बौद्ध भिक्षुओं ने पालि को संस्कृत के साथ मिलाकर एक नई भाषा का निर्माण किया जिसे संकर संस्कृत कहा गया |

राजपूत वंश के दौरान सामाजिक और सांस्कृतिक विकास

Nov 6, 2015
‘राजपूत’ शब्द संस्कृत के ‘राज-पुत्र’ शब्द से लिया गया है जिसका मतलब “एक राजा का पुत्र” होता है। राजपूत अपने साहस, ईमानदारी और राजशाही के लिए जाने जाते थे ।ये वो योद्धा थे जो युद्ध मे लड़े और प्रशासनिक क्रियाओं का भी ध्यान रखा। राजपूतों का उदय पश्चिमी, पूर्वी, उत्तरी भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सो से हुआ था। छठवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी तक राजपूत विख्यात थे। राजपूतों ने बीसवीं शताब्दी तक राजस्थान और सौराष्ट्र के शानदार राज्यों मे पूर्ण बहुमत मे शासन किया।

मुगल काल के दौरान सांस्कृतिक विकास

Nov 6, 2015
बाबर, हुमायूँ, अकबर और जहांगीर जैसे मुगल शासक हमारे देश मे सांस्कृतिक विकास का प्रसार करने के लिए जाने जाते थे। इस क्षेत्र मे अधिक से अधिक कार्य मुगल शासन के दौरान किया गया था। मुगल शासक संस्कृति के शौकीन थे; इसलिए सभी शासक शिक्षा के प्रसार के समर्थन मे थे। मुगल परम्पराओ ने कई क्षेत्रीय और स्थानीय राज्यो की महलों एवं किलों को अत्यधिक प्रभावित किया।

अंग्रेज उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
अंग्रेजों का भारत आगमन और ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना का प्रमुख कारण पुर्तगाली व्यापारियों द्वारा भारत में अपनी वस्तुओं को बेचने से होने वाला अत्यधिक लाभ था जिसने ब्रिटिश व्यापारियों को भारत के साथ व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित किया । 31 दिसंबर, 1600 ई. को कंपनी ने महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम से शाही चार्टर प्राप्त किया,जिसने कंपनी को पूर्व के साथ व्यापार करने के लिए अधिकृत कर दिया। 1608 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी ने शाही संरक्षण प्राप्त करने के लिए कैप्टन हॉकिन्स को मुग़ल शासक जहाँगीर के दरबार में भेजा था ।

फ्रांसीसी उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
भारत आने वाले अंतिम यूरोपीय व्यापारी फ्रांसीसी थे। फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 1664 ई में लुई सोलहवें के शासनकाल में भारत के साथ व्यापार करने के उद्देश्य से की गयी थी। फ्रांसीसियों ने 1668 ई में सूरत में पहली फैक्ट्री स्थापित की और 1669 ई में मसुलिपत्तनम में एक और फैक्ट्री स्थापित की।1673 ई में बंगाल के मुग़ल सूबेदार ने फ्रांसीसियों को चन्द्रनगर में बस्ती बनाने की अनुमति प्रदान कर दी।

डच उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
हॉलैंड (वर्त्तमान नीदरलैंड) के निवासी डच कहलाते है। पुर्तगालियो के बाद डचों ने भारत में अपने कदम रखे। ऐतिहासिक दृष्टि से डच समुद्री व्यापार में निपुण थे। 1602 ईमें नीदरलैंड की यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की गयी और डच सरकार द्वारा उसे भारत सहित ईस्ट इंडिया के साथ व्यापार करने की अनुमति प्रदान की गयी। 1605 ईमें डचों ने आंध्र प्रदेश के मुसलीपत्तनम में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की। बाद में उन्होंने भारत के अन्य भागों में भी अपने व्यापारिक केंद्र स्थापित किये।

पुर्तगाली उपनिवेश की स्थापना

Nov 4, 2015
पुर्तगाली पहले यूरोपीय थे जिन्होंने भारत तक सीधे समुद्री मार्ग की खोज की। 20 मई 1498 को पुर्तगाली नाविक वास्को-डी-गामा कालीकट पहुंचा, जो दक्षिण-पश्चिम भारत में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह है । 1505 ई में फ्रांसिस्को दे अल्मीडा को भारत का पहला पुर्तगाली गवर्नर बनाया गया। उसकी नीतियों को ब्लू वाटर पालिसी कहा जाता था क्योकि उनका मुख्या उद्देश्य हिन्द महासागर को नियंत्रित करना था। पुर्तगालियों ने 1556 ई.में गोवा में भारत की पहली प्रिंटिग प्रेस की स्थापना की थी।

हैदराबाद

Nov 4, 2015
हैदराबाद के इतिहास का निर्माण अनेक राज्यों व शासकों जैसे-चालुक्य वंश ,काकतीय वंश ,दिल्ली सल्तनत,बहमनी सल्तनत, विजयनगर साम्राज्य ,निज़ामों और अंग्रेजों के द्वारा हुआ है।इसी कारण उसका इतिहास अत्यधिक विविधतापूर्ण है। मुग़ल बादशाह द्वारा चिनकिलिच खां को निज़ाम-उल-मुल्क की उपाधि प्रदान की गयी और दक्कन का गवर्नर बना दिया गया । 1722 ई.में उसे मुग़ल साम्राज्य का वजीर नियुक्त किया गया लेकिन उसके तुरंत बाद वह दक्कन लौट गया और उस क्षेत्र पर अपनी पकड़ को मजबूत किया । उसके उत्तराधिकारी हैदराबाद के निज़ाम कहलाये।

बंगाल

Nov 4, 2015
औरंगजेब द्वारा मुर्शिद कुली खां को बंगाल का दीवान नियुक्त किया गया था। गवर्नर मुर्शिद कुली खां (1717-1727 ई.) ने बंगाल की राजधानी ढाका से मुर्शिदाबाद स्थानांतरित कर दी। उसने अंग्रेज ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा राजस्व वसूली को रोककर अपने राज्य के हितों की रक्षा का प्रयास किया। सिराज-उद-दौला ने कलकत्ता में अंग्रेजों को अपनी फैक्ट्रियों की किलेबंदी करने से रोका लेकिन अंग्रेजों द्वारा उसके आदेश को न मानने के परिणामस्वरूप अंग्रेजों और सिराज-उद-दौला के मध्य प्लासी का युद्ध लड़ा गया।
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