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राज्य लोक सेवा सामान्य ज्ञान

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  • जनपद और महाजनपद

    जनपद वैदिक भारत के प्रमुख राज्य थे | 6ठी सदी BC तक लगभग 22 विभिन्न जनपद थे | उत्तर प्रदेश और बिहार के भागों में लोहे के विकास के साथ, जनपद ओर ज़्यादा ताकतवर हो गए और महाजनपद में तब्दील हो गए | 600 BC से 325 BC के दौरान भारत के उपमहाद्वीपों में इस तरह के 16 महाजनपद थे |

    Sep 2, 2015
  • उत्तरकालीन वैदिक युग में आर्थिक व सामाजिक जीवन

    वह काल जिसने ऋग वैदिक युग का अनुसरण किया उत्तर कालीन युग के नाम से जाना जाता  है | यह युग बाद के तीन वेद संहिता- सामवेद संहिता, यजुर्वेद संहिता और अथर्ववेद संहिता और साथ ही साथ ब्राह्मण और चारों वेदों के उपनिषद तथा बाद मे दो महान काव्यों के बनने का गवाह बना |

    Sep 2, 2015
  • दिल्ली सल्तनत : गुलाम वंश का शासन (1206A . D. -1290 A . D .)

    कुतब-उद-दीन ऐबक, मुहम्मद गौरी के सिपाहसालार के साथ उसका ग़ुलाम भी था | कुतब -उद-दीन ऐबक का जन्म मध्य एशिया के तुर्क परिवार में हुआ था और उसे बचपन में ही ग़ुलाम के तौर पर बेच दिया गया था | इल्तुत्मिश, कुतब-उद-दीन ऐबक ( 1206-11) का उत्तराधिकारी बना जिसके बाद रज़िया (1236-40) और बलबन (1265-85) ने राजभार संभाला | कुतब-उद-दीन ऐबक ने क़ुतुब मीनार की नींव रखी परंतु इल्तुत्मिश ने इसे पूरा किया |

    Sep 2, 2015
  • चोल साम्राज्य (9वीं सदी A D से 12वीं सदी A D तक) : मध्यकालीन चोल

    चोलाओं ने अपनी शक्तियों को 845 A D में पुनर्जीवित किया और उनका शासन तृतीय सदी A D से 9वीं सदी A D के लंबे ठहराव के बाद पुनः स्थापित हुआ | विजयालय चोल प्रथम मध्यकालीन चोल  शासक था जिसे चोल राज्य के पुनः स्थापना का श्रेय जाता है | उसकी अपनी राजधानी थंजौर में थी | विजयालय पललवाओं का सामंत था | इसने पादुकोट्टई मे सोलेस्वरा मंदिर का निर्माण किया | चोलाओं ने अपनी शक्तियों को 845 A D में पुनर्जीवित किया और उनका शासन तृतीय सदी A D से 9वीं सदी A D के लंबे ठहराव के बाद पुनः स्थापित हुआ |

    Sep 2, 2015
  • मौर्य साम्राज्य: प्रशासन

    शाही राजधानी पाटलिपुत्र के साथ मौर्य साम्राज्य चार प्रांतों में विभाजित था। अशोक के शिलालेखों से प्राप्त चार प्रांतीय राजधानियों के नाम, तोसली (पूर्व में), उज्जैन (पश्चिम में), स्वर्णागिरी (दक्षिण में) और तक्षशिला (उत्तर में) थे। संरचना के केंद्र में कानून बनाने की शक्ति राजा के पास होती थी। जब वर्णों और आश्रमों पर आधारित सामाजिक व्यवस्था (जीवन चक्र) समाप्त होती थी तो तब कौटिल्य राजा को धर्म का प्रचार करने की सलाह देता था।

    Aug 31, 2015
  • उत्तर वैदिक काल (1000 - 600 ई.पू.)

    उत्तर वैदिक काल के दौरान आर्यों का यमुना, गंगा और सदनीरा के सिंचिंत उपजाऊ मैदानों पर पूर्ण नियंत्रण था। उन्होंने विंध्य को पार कर लिया था और गोदावरी के उत्तर में, डेक्कन में जा बसे थे। उत्तर वैदिक काल के दौरान लोकप्रिय सभाओं का महत्व समाप्त हो गया था एवं इसकी कीमत उन्हें शाही सत्ता की वृद्धि के रूप में चुकानी पड़ी थी। दूसरे शब्दों में कहें तो साम्राज्य के लिए राजशाही का रास्ता साफ हो चुका था। बड़े राज्यों के गठन से राजा और अधिक शक्तिशाली हो गया था।

    Aug 31, 2015
  • मध्य एशियाई संपर्कों का प्रभाव (शक-कुषाण काल के दौरान)

    शक और कुषाण अवधि के दौरान घुड़सवार सेना का बेहतरीन उपयोग देखने को मिला था। घोड़े  की लगाम और पीठ पर सीट के प्रयोग की शुरूआत शकों और कुषाणों द्वारा शुरू की गयी थी। इसके अलावा शक और कुषाणों ने अंगरखा,  पगड़ी और पतलून तथा भारी-भरकम लंबे कोट,  कैप और  हेलमेट की शुरूआत की थी तथा इस अवधि के दौरान जूतों की भी शुरूआत हुई थी जो युद्ध में जीत के लिए मददगार साबित हुए थे। समुद्र और घाटियों के मार्गों के माध्यम से व्यापार करने के लिए केंद्रीय क्षेत्रों को खोल दिया गया था। इन मार्गों में से एक पुराने रेशम मार्ग के लिए प्रसिद्ध हो गया था।

    Aug 31, 2015
  • तराइन की लड़ाई

    राजपूतों द्वारा लड़ा गया पहला युद्ध तराइन की लड़ाई (1191 AD ) थी | इस युद्ध में चौहान राजवंश के पृथ्वी राज ने मुहम्मद गौरी को हरियाणा में थानेश्वर के निकट तराइन में पराजित कर दिया था | तराइन की दूसरी लड़ाई (1192 AD )  भी तराइन में ही लड़ी गई जिसमे मुहम्मद गौरी के द्वारा पृथ्वीराज को पराजित किया गया व मार दिया गया |

    Aug 31, 2015
  • मौर्य युग के पूर्व विदेशी आक्रमण

    भारतीय उप-महाद्वीप के दो प्रमुख विदेशी आक्रमण, 518 ई.पू. में ईरानी आक्रमण और 326 ई.पू. में मकदूनियाई आक्रमण थे। इन दो आक्रमणों ने इंडो ईरानी व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा दिया। ईरानी लेखकों ने खरोष्ठी लिपि की शुरूआत की जिसे बाद में अशोक के कुछ शिलालेखों में प्रयोग किया गया। इस लिपि में अरबी की तरह दांये से बांये की तरफ लिखा जाता था।

    Aug 31, 2015
  • गुप्त काल के बाद आर्थिक, सामाजिक जीवन और मंदिर वास्तुकला

    गुप्ताओं के पतन के बाद, उनके गृह प्रांतों में शासकों की एक लंबी लाइन लग गयी थी। एक को छोडकर इन सभी के नामों के अंत में गुप्त आता था। इसलिए यह परिवार इतिहास में “मगध के शासन के बाद  गुप्त”  के नाम से जाना जाता है। यह तय कर लेना कि वे किसी भी तरह से शाही गुप्त के साथ जुड़े हुए थे, संभव नहीं था। गुप्त काल के बाद उत्तरी भारत में कुछ महत्वपूर्ण राजवंश उत्पन्न हुए। जैसे-कन्नौज के मौखरी, कामरूप के वर्मन, थानेश्वर के पुष्यभूति आदि।

    Aug 31, 2015
  • भारत का प्राचीन दर्शन-शास्त्र

    भारत में दर्शन- शास्त्र के छः विद्यालयों का विकास ईस्वी युग के शुरुआत के साथ ही हो गया था | ये निम्न इस प्रकार थे: 1) योग, 2) न्याय, 3) मीमांसा, 4) वेदांता, 5) वैशेशिखा, 6) संख्या | इन छः सिद्धांतों की सही औपचारिक तिथि पता नहीं है | इन छः प्रणालियों के बनने की सही तिथि पता नहीं हैं क्यूंकि  तब तक लिखावट के ना बनने से इनका अध्ययन पूरी तरह मौखिक है |हालांकि इनकी शुरुआत लगभग 2000 -3000 या इससे ज्यादा  साल पहले हुई | कुछ दर्शन शास्त्री कहते हैं कि इनकी जड़ें 5000-10000 साल या उससे भी पहले की हैं |

    Aug 19, 2015
  • बौद्ध के युग में प्रशासनिक ढाँचा व सामाजिक जीवन (563- 483 B C )

    बौद्ध धर्म ने गैर- वैदिक क्षेत्र के लोगों से विशेष अपील की जहाँ की अछूती धरती परिवर्तन के लिए तैयार थी | बौद्ध धर्म ने वर्ण प्रथा पर वार किया ताकि उन्हें निम्न जाति का समर्थन मिल सके | लोगों को बिना उनकी जाति को महत्व देते हुए बौद्ध क्रम  में लिया गया | महिलाओं को भी संघ में सम्मलित किया गया तथा उन्हें पुरुषों के बराबर लाया गया | ब्राह्मणवाद के तुलना में बौद्ध धर्म उदार तथा प्रजातांत्रिक था |

    Aug 19, 2015
  • चोल, चेरा और पाण्ड्या राजवंश

    तमिल देश पर संगम काल के समय में चेरा, चोल व पाण्ड्या नामक तीन राजवंश द्वारा  शासन किया गया | चेरा राजवंश ने दो विभिन्न कालों में शासन किया | प्रथम चेरा राजवंश ने संगम काल में शासन किया जबकि द्वितीय चेरा राजवंश ने 9वीं शताब्दी A D के आगे शासन किया |संगम काल के चोल राज्य का विस्तार  आधुनिक तिरुचि जिले से आंध्र प्रदेश तक हुआ |तमिल नाडु में स्थित पाण्ड्या राज्य ने लगभग  6वीं शताब्दी B C के दौरान राज किया और लगभग 15वीं शताब्दी A D में समाप्त हो गया |

    Aug 19, 2015
  • चोल साम्राज्य ( 9वीं सदी A D से 12वीं सदी A D तक) : बाद के चोल

    बाद के चोल का युग 1070 A D से 1279 A D  तक रहा | इस समय तक चोल साम्राज्य ने अपने मुकाम को पा लिया था और विश्व का सबसे शक्तिशाली देश बन गया था | चोलाओं ने दक्षिण पूर्वी एशियन देशों पर कब्ज़ा कर लिया और इस समय इनके पास विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना और जल सेना थीं |

    Aug 19, 2015
  • चोल राज्य : प्रशासन, कला और वास्तु-कला

    चोल वंश प्रमुख रूप से तमिल वंश था जिन्होने मुख्यतः भारत के दक्षिण में 13वीं सदी तक शासन किया | सभी शासकों में ,करिकला चोल आरंभिक चोल राजाओं में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध थे | चोल वंश के पास पीतल के कुछ बेहतरीन नमूने तथा अन्य मूर्तियाँ हैं जैसे नाचते हुए नटराज की मूर्ति और तंजावुर ( तमिलनाडु) का बृहदीस्वरर मंदिर इन्हीं के कुछ बेहतरीन उदाहरण हैं |

    Aug 19, 2015
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