Search

जेनेवा समझौता क्या है और यह युद्धबंदियों को क्या अधिकार देता है?

जेनेवा समझौते में चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं. यह संधि युद्ध बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण करती है. मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 में और तीसरी संधि 1929 में हुई थी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 196 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी जो कि अब तक लागू है.
Feb 28, 2019 11:26 IST
Geneva Convention

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की तनातनी की स्थिति में 27 फरवरी को भारत का एक जेट विमान जब क्रेश हो गया तो उसमें सवार विंग कमांडर ‘अभिनंदन वर्तमान’ ने पैराशूट से छलांग लगा दी और पाकिस्तान की सीमा में पकडे गए. ऐसी हालत में कई लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठ रहा है कि अब पाकिस्तान जैसा क्रूर देश उनके साथ किस तरह का बर्ताव करेगा.

आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं

युद्धबंधियों के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए जेनेवा समझौते में चार संधियां हुई हैं जो कि यह नियम बतातीं हैं कि युद्ध में पकडे गए सैनिकों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए.

जेनेवा समझौता क्या है?

जेनेवा समझौता मुख्य रूप से युद्धबंदियों के मानवाधिकारों को बनाये रखने के लिए बनाया था ताकि युद्ध के दौरान शत्रु देश द्वारा बंदी बनाये गये सैनिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाये.

दरअसल युद्धबंदियों (Prisoner of war) के अधिकारों को बरकरार रखने के जेनेवा समझौते (Geneva Convention) में कई नियम दिए गए हैं.

सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी): जल बंटवारे से संबंधित समझौता

जेनेवा समझौते में चार संधियां और तीन अतिरिक्त प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं. यह संधि युद्ध बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण करती है. मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 में और तीसरी संधि 1929 में हुई थी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 196 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी जो कि अब तक लागू है.

जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता है. पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है और युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता है.

युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें उनके देश को लौटा दिया जाता है.

हालांकि कुछ देशों ने जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है. पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने कहा है पाकिस्तान हर समय जिनेवा संधि का पालन नहीं करता है, हालाँकि ऐसे समय में जब पूरे विश्व का पाकिस्तान के ऊपर दबाव है तो पाकिस्तान एक और इंटरनेशनल ट्रीटी का उल्लंघन नहीं करना चाहेगा. अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना होगा.

जेनेवा संधि के मुख्य नियम इस प्रकार हैं;

1. युद्धबंदियों से उनका नाम, सैन्य पद और नंबर पूछा जा सकता है और युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जा सकता है साथ ही उसे डराया धमकाया या मारा पीटा नहीं जा सकता है.

2. घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है यदि कोई घाव या चोट लगी है तो उसका उपचार भी किया जाता है.

3. युद्धबंदियों को खाना पीना और जरूरत की सभी चीजें दी जाती है.

4. किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है.

5. किसी देश का सैनिक (स्त्री या पुरुष) जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है.

6. युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है.

पाकिस्तान ने जिस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर डाले हैं उससे तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि उसने जेनेवा संधि का उल्लंघन कर दिया है क्योंकि अभिनंदन वर्तमान को जनता ने पीटा है और उनके मुंह और चेहरे से खून भी निकलता दिख रहा है.

हालाँकि भारत सरकार ने साफ़ कर दिया है कि उसके सैनिक को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए यदि ऐसा हुआ तो अंजाम भुगतने के लिए भी पाकिस्तान तैयार रहे.

अंत में एक भारतीय के रूप में हम सभी कामना करते हैं कि पाकिस्तान को सद्बुद्धि आये और वह जेनेवा संधि का पालन करते हुए अभिनंदन वर्तमान को सही सलामत भारत सरकार को सौंपे.

लुकआउट नोटिस क्या होता है और क्यों जारी किया जाता है?

मिराज 2000 के बारे में रोचक तथ्य

Loading...