भारत में मुद्रा और वित्त बाजार के साधन

मुद्रा बाजार एक ऐसा सेंटर है जहाँ अल्प कालीन स्वभाव की मौद्रिक संपत्तियों या प्रतिभूतियों (सामान्यतः एक वर्ष से कम अवधि की) का व्यापार होता है, जबकि वित्त बाजार, मध्यम और दीर्घकालीन फण्ड का बाजार है जहाँ लम्बी अवधि के लिए बचत बिकती है।
Created On: May 30, 2016 14:54 IST

मुद्रा बाजार एक ऐसा सेंटर है जहाँ अल्प कालीन स्वभाव की मौद्रिक संपत्तियों या प्रतिभूतियों (सामान्यतः एक वर्ष से कम अवधि की) का व्यापार होता है, जबकि वित्त बाजार, मध्यम और दीर्घकालीन फण्ड का बाजार है जहाँ लम्बी अवधि के लिए बचत बिकती है। मुद्रा बाजार में ट्रेज़री बिल, वाणिज्यिक पत्र/पेपर और बैंकरों की स्वीकृतियां आदि खरीदे और बेचे जाते हैं।

मुद्रा बाजार साधन (Money Market Instruments): मुद्रा बाजार अल्पकालीन पैसे के लिए एक बाजार है और वित्तीय परिसंपत्तिया पैसे की सबसे नजदीकी विकल्प होती हैं। लघु अवधि शब्द का आमतौर पर एक 1 वर्ष से अधिक की अवधि के लिए प्रयोग किया जाता है ।

मुद्रा बाज़ार के मुख्य साधन इस प्रकार है:-

कॉल/ नोटिस मनी मार्केट (Call Money Market): कॉल/ नोटिस मनी वह पैसा है जो एक लघु अवधि के लिए उधार दिया या लिया जाता है। जब पैसा एक दिन के लिए उधार दिया या लिया जाता है तो इसे कॉल (ओवरनाइट) मनी के रूप में जाना जाता है, इस तरह के पैसे को एक दिन के लिए उधार लिया जाता है और अगले कार्यदिवस (छुट्टियों की संख्या की परवाह किए बगैर) पर चुकता कर दिया जाता है, इसे "कॉल मनी" कहा जाता है। जब पैसा 1 या उससे अधिक अथवा 14 दिनों से ज्यादा समय के लिए उधार लिया जाता है तो इसे "नोटिस मनी" कहा जाता है। इस तरह के लेनदेन के लिए किसी प्रकार की सुरक्षा की आवश्यकता नहीं होती है।

इंटर- बैंक टर्म मनी (Inter- Bank Term Money): 14 दिनों से अधिक की अवधि की परिपक्व जमा राशि के लिए अंतर-बैंक बाजार को मुद्रा बाजार (Money Market) के रूप में जाना जाता है। इसके लिए वहीं नियम लागू होते हैं है जो कॉल/नोटिस मनी के लिए होते हैं, सिवाय कि मौजूदा नियम जिसमें निर्दिष्ट संस्थाओं को 14 दिनों से अधिक की अवधि के लिए उधार देने के लिए अनुमति नहीं होती है।

ट्रेजरी बिल्स (Treasury Bills): भारत में ट्रेज़री बिल्स की शुरुआत 1917  में पहली बार की गयी थी । लघु अवधि के लिए (एक वर्ष तक) केंद्र सरकार द्वारा उधार लेने के साधनों को ट्रेजरी बिल्स कहा जाता है। सरकार इसी के माध्यम से उधार लेती है । ये सर्वाधिक तरल प्रतिभूतियां होती हैं । इनका निर्गमन रिज़र्व बैंक के द्वारा सरकार के लिए किया जाता है। यह सरकार द्वारा किया गया एक वादा है जिसमें जारी होने की तिथि के एक वर्ष से कम अवधि के भीतर राशि का भुगतान करना होता है। इन्हें अंकित मूल्य के लिए एक छूट के तहत जारी किया जाता है

जमाराशियों का प्रमाण पत्र (Certificate of Deposits): जमाराशि के प्रमाणपत्र (सीडी) एक विनिमेय मुद्रा बाजार साधन है। यह डीमैट के रूप या एक बैंक में जमा राशि के लिए एक प्रमाणपत्र के रुप में या एक निर्धारित समय अवधि के लिए किसी अन्य वित्तीय संस्थान द्वारा जारी किया गया एक वचनबद्ध प्रमाणपत्र होता है।

वर्तमान में सीडी जारी करने के लिए दिशा-निर्देशों का नियंत्रण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया जाता है जिसमें समय -समय पर संशोधन भी किया जाता है। सीडी को निम्न संस्थान जारी कर सकते हैं:(I) निर्धारित क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को छोड़कर वाणिज्यिक बैंक और स्थानीय क्षेत्रीय बैंक (एलएबी); (ii) तथा अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा यह अनुमति प्रदान होती है कि वे एक लघु अवधि के भीतर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय नीतियों के तहत संसाधन जुटाएं। बैंकों को अपनी आवश्यकताओं के आधार पर सीडी जारी करने की स्वतंत्रता है। एक वित्तीय संस्थान (एफआई) कुल मिलाकर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय निर्देशों के आधार पर सीडी जारी कर सकता है। इसे 1989  में शुरू किया गया था।

वाणिज्यिक पत्र (Commercial Paper) (सीपी):

इसे मूलतः वाघुल समिति की संस्तुति पर मार्च 1989  को शुरू किया गया था।  C.P.  एक प्रतिज्ञा पत्र युक्त अल्प अवधि का प्रपत्र है जिसकी  अवधि 7  से 90 दिन की होती है । सीपी की न्यूनतम परिपक्वता अवधि 7 दिनों की होती है। इसका निर्गमन बट्टा आधार पर होता है । सीपी साफ तौर पर एक समर्थन करने और वितरण से संबंधित समझौता है।

एक कंपनी जो सी.पी. जारी करने के लिए पात्र होगी- (क) कंपनी का कुल मूल्य, नवीनतम आडिटे की बैलेंस शीट के अनुसार 4 करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिए (ख) बैंकिग प्रणाली में कंपनी की कार्यशील पूंजी (निधि आधारित) की सीमा 4 करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिए और (ग) कंपनी के ऋण खाते को वित्तपोषण बैंक/ बैंको द्वारा तय एक मानक परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया है। न्यूनतम क्रेडिट रेटिंग क्रिसिल द्वारा पी -2 या अन्य एजेंसियों द्वारा तय इसी प्रकार की रेंटिंग होनी चाहिए।

पूंजी बाजार साधन (Capital Market Instruments): पूंजी बाजार में आम तौर पर निम्नलिखित दीर्घकालिक अवधि होती है, जैसे- एक वर्ष से अधिक की अवधि, वित्तीय साधनों; इक्विटी खंड में इक्विटी शेयर, प्रमुख शेयर, परिवर्तनीय मुख्य शेयर, गैर-परिवर्तनीय प्रमुख शेयर और ऋण खंड डिबेंचर, जीरो कूपन बांड, भीरी डिस्काउंट बांड आदि ।

हाइब्रिड साधन (Hybrid Instruments): हाइब्रिड साधनों में इक्विटी और डिबेंचर, दोनों विशेषताएं होती हैं। इस तरह के साधन को हाईब्रिड साधन कहा जाता है। उदाहरण के तौर पर, परिवर्तनीय डिबेंचर, वारंट आदि।

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