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राष्ट्रीय पत्रकारिता दिवस

Jagran Josh09-OCT-2014 15:28

यह दिवस प्रत्येक वर्ष 17 नवंबर को मनाया जाता है. 1920 के दशक के दौरान, लेखक वाल्टर लिपमैन और एक अमेरिकी दार्शनिक जॉन डेवी, नें एक लोकतांत्रिक समाज में पत्रकारिता की भूमिका पर अपने विचार विमर्श को प्रकाशित किया था. यह वह समय था जब आधुनिक पत्रकारिता अपने वास्तविक रूप में आ रहा था.

अब यह भली-भांति ज्ञात हो चुका है कि पत्रकारिता जनता और नीति निर्माताओं के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता है. इस सन्दर्भ में महत्वपूर्ण भूमिका एक पत्रकार निभाता है. ये पत्रकार कुलीन वर्ग द्वारा बोले गये  संदेश को सुनते हैं और उन्हें रिकॉर्ड करते हैं. तत्पश्चात इस सूचनाओं को संसाधित किया जाता है और जनता के हितार्थ सूचना के लिए प्रकाशित किया जाता है.

पत्रकारिता की कानूनी स्थिति

भारत सरकार नें प्रेस संगठनों और पत्रकारों के लिए अनेक नीतियों को निर्धारित किया है. जिसके सन्दर्भ में वे अपने कार्यों के एक तरफ जारी रखते हैं और उनपर अनुसन्धान भी करते हैं. साथ ही संस्थाओं के द्वारा क्या प्रकाशित किया जाता है इसका परिक्षण भी करते हैं. पत्रकारों को कुछ विशेषाधिकार है जोकि आम जनता को नहीं प्राप्त है. वे वरिष्ठ अधिकारियों, नेताओं, मशहूर हस्तियों और अन्य व्यक्तियों के साक्षात्कार कर सकते हैं. इसके अलावा वे पत्रकार जोकि सुरक्षा की दृष्टी से संवेदनशील हैं उन पत्रकारों को सरकार द्वारा विशेष संरक्षण दिया जाता है.

पत्रकारिता की नैतिकता के अंतर्गत विविध सिद्धांत शामिल किये जाते हैं. जोकि पत्रकारों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों के सन्दर्भ में लागू होते हैं.  इन सिद्धांतों को "पत्रकारिता के सिद्धांत" या पेशेवर "आचार संहिता" के रूप में जाना जाता है. इन सिद्धांतों का पेशेवर पत्रकारिता संघों के साथ ही प्रसारण और ऑनलाइन समाचार संगठनों द्वारा भी अनुसरण किया जाता है.

पत्रकारों को सूचना के सन्दर्भ में देश की अखंडता,  सुचना की तटस्थता, वैधता और सार्वजनिक जबाबदेही के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए. साथ ही पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए ताकि जनता में स्वच्छ सुचना का न केवल प्रसारण हो सके वल्कि उससे जनता लाभान्वित हो सके.

पत्रकारिता से जुडी नैतिकता "नुकसान की सीमा" के सिद्धांत, को शामिल करता हैं. इससे किसी की साख को नुक्सान होने से बचाया जा सकता है. साथ ही नाबालिग बच्चों, अपराध पीड़ितों, और अन्य नागरिकों की प्रतिष्ठा को बचाया जा सकता है.

सूचना के विभिन्न स्रोतों के सन्दर्भ में कुछ गोपनीयता पत्रकारों द्वारा बनाए रखा जाना आवश्यक होता है. यह क़ानून सरकार द्वारा मांगी गयी गोपनीय सूचना से जुड़े स्रोतों के सन्दर्भ में पत्रकारों के लिए एक कानूनी संरक्षण देता है और उनकी पहचान को बनाये रखने में मदद करता है साथ ही प्रेस की स्वतंत्रता का विस्तार करता है. इसके अलावा भारत में पत्रकारिता से जुड़े अनेक ऐसे क़ानून हैं जोकि संवेदनशील सुचना की रिपोर्टिंग करने में पत्रकारों को प्रतिवंधित करते हैं.

20 वीं शताब्दी के दौरान, सेलिब्रिटी पत्रकारिता का जन्म हुआ. जिसके अंतर्गत फिल्म कलाकारों, मॉडलों, और मनोरंजन उद्योग में अन्य पहचान रखने वाले लोग शामिल थे. इसके अलावा कई मशहूर लोगों के निजी जीवन पर केंद्रित पत्रकारिता का भी प्रारंभ हुआ. सेलिब्रिटी पत्रकारिता, फीचर लेखन से पूरी तरह से अलग है. इसके अंतर्गत सिर्फ उन्ही लोगो की रिपोर्टिंग की जाती है जोकि जनमानस के मध्य पूरी तरीके से चर्चित हैं. इसके विशेषकर राजनीतिक वर्ग, के लोग ही शामिल होते हैं.

कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

• ऐसा कहा जाता है की पत्रकारों में अक्सर निष्पक्षता को अस्वीकार करने की प्रवृत्ति होती है. वे सामान्य समय में अन्य आम मानकों और नैतिकता को बनाए रखने में ध्यान देते हैं.
• संयुक्त राज्य अमेरिका में संघीय अदालत को स्रोतों की रक्षा करने का कोई अधिकार नहीं है. इस सन्दर्भ में सुरक्षा राज्य की अदालतों द्वारा प्रदान की जाती है.
• पत्रकारिता के अंतर्गत समाचार लेखन की अनेक शैलियों को देखा जाता है. समाचार पत्र और पत्रिकाओं में अक्सर उन्ही सूचनाओ का जिक्र किया जाता है जिन्हें पत्रकारों द्वारा लेखक की दृष्टि से सुविधाजनक माना जाता हैं.
• फ़ीचर से जुड़े लेख अक्सर वास्विक लेखन से लम्बे होते हैं. इस सन्दर्भ में अक्सर वास्विक घटनाओं पर ध्यान न देकर समाचार की लेखन शैली पर दिया जाता है. जिसमें कोई सूचना चित्रों से भरी पड़ी रहती है. इसके अलावा जोभी सूचनाएं दी गयी रहती हैं वे सभी पिक्टोग्रफिक रूप में रहती हैं ताकि लोगो का अधिक से अधिक ध्यान आकर्षित किया जा सके.
• एकाएक पत्रकारिता के अंतर्गत अचानक ऐसे प्रश्न पूछे जाते हैं जिनके सन्दर्भ में कोई भी व्यक्ति उत्तर नहीं देना चाहता. वस्तुतः पत्रकारों की यह रणनीति होती है की सूचना को किस तरह से प्राप्त किया जाये.
• विज्ञान समाचार से जुडा पत्रकार विज्ञान के विकास से संवंधित सूचनाओं के एकत्रित करता है. साथ ही वैज्ञानिक समुदाय के मध्य किसी जानकारी के सन्दर्भ में किन-किन चीजो को लेकर विरोध की स्थिति बनी रहती है उनका कवरेज करता है. इसके अलावा वह किसी आपदा से जुड़े खबरों और ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े मुद्दों को भी अपनी खबरों में शामिल करता है.