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लोकसभा में सभी एंग्लो-इंडियन सांसदों की सूची

एंग्लो-इंडियन शब्द को भारत सरकार अधिनियम, 1935 में परिभाषित किया गया था. संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के तहत एंग्लो इंडियन ऐसे किसी व्यक्ति को माना जाता है जो भारत में रहता हो और जिसका पिता या कोई पुरुष पूर्वज यूरोपियन वंश के हों. यह शब्द मुख्य रूप से ब्रिटिश लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कि भारत में काम कर रहे हों और भारतीय मूल के हों.
Apr 22, 2019 11:54 IST
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Anglo Indian MP Lok Sabha
Anglo Indian MP Lok Sabha

भारत की संसद; लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति से मिलकर बनती है. देश में लोकसभा के लिए अधिकतम 552 सदस्य (530 राज्य + 20 केंद्र शासित प्रदेश + 2 एंग्लो इंडियन) हो सकते हैं, लेकिन विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लोकसभा के लिए केवल 543 सदस्य चुने जाते हैं और यदि चुने गए 543 सांसदों में एंग्लो इंडियन समुदाय का कोई सदस्य नहीं चुना जाता है तब भारत का राष्ट्रपति इस समुदाय के 2 सदस्यों का चुनाव कर सकता है.

एंग्लो इंडियन किन्हें कहा जाता है? (Who are Anglo Indians)

संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के तहत एंग्लो इंडियन ऐसे किसी व्यक्ति को माना जाता है जो भारत में रहता हो और जिसका पिता या कोई पुरुष पूर्वज यूरोपियन वंश के हों. यह शब्द मुख्य रूप से ब्रिटिश लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कि भारत में काम कर रहे हों और भारतीय मूल के हों.

लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में एंग्लो-इंडियन के लिए सीटों का आरक्षण;
एंग्लो-इंडियन एकमात्र समुदाय है जिसके प्रतिनिधि लोकसभा के लिए नामित होते हैं क्योंकि इस समुदाय का अपना कोई निर्वाचन क्षेत्र नहीं है. यह अधिकार फ्रैंक एंथोनी ने जवाहरलाल नेहरू से हासिल किया था. एंग्लो-इंडियन समुदाय का प्रतिनिधित्व लोकसभा में दो सदस्यों द्वारा किया जाता है.

Anglo Indian Frank Anthony

अनुच्छेद 331 के तहत राष्ट्रपति लोकसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के दो सदस्य नियुक्त करते हैं. इसी प्रकार विधान सभा में अनुच्छेद 333 के तहत राज्यपाल को यह अधिकार है कि (यदि विधानसभा में कोई एंग्लो इंडियन चुनाव नहीं जीता है) वह 1 एंग्लो इंडियन को सदन में चुनकर भेज सकता है.

बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, झारखंड, उत्तराखंड और केरल जैसे राज्यों में विधान सभा के लिए एंग्लो इंडियन समुदाय का एक-एक सदस्य नामित है. जबकि वर्तमान में लोकसभा में 2 सदस्य भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नामित हैं इनके नाम नीचे लिस्ट में हैं.

नियमानुसार एंग्लो इंडियन समुदाय का आरक्षण 2020 तक निर्धारित है और इसे 2020 के बाद नवीनीकृत किया जाएगा.

लोकसभा के लिए एंग्लो इंडियन समुदाय के सभी नामित सदस्यों की सूची इस प्रकार है;

नामित होने का वर्ष

सदस्य का नाम

पार्टी का नाम

 1951-52

फ्रैंक एंथोनी
A. E. T. बैरो

निर्दलीय

 1957

फ्रैंक एंथोनी
A. E. T. बैरो

स्वतंत्र संसदीय समूह
निर्दलीय (IPG)

 1962

फ्रैंक एंथोनी
A. E. T. बैरो

स्वतंत्र संसदीय समूह
निर्दलीय (IPG)

 1967

फ्रैंक एंथोनी
A. E. T. बैरो

स्वतंत्र संसदीय समूह
निर्दलीय (IPG)

 1971

फ्रैंक एंथोनी
मार्जोरी गॉडफ्रे

नामित
यूनाइटेड इंडिपेंडेंट पार्लियामेंट्री ग्रुप

 1977

A. E. T. बैरो

निर्दलीय

 रूडोल्फ रॉड्रिक्स

जनता पार्टी

 1980

 फ्रैंक एंथोनी
A. E. T. बैरो

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

 1984

फ्रैंक एंथोनी
A. E. T. बैरो

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

 1989

जॉस फर्नांडीज
पॉल मंतोष

जनता दल

 1991

फ्रैंक एंथोनी (1993 तक)

रॉबर्ट ई विलियम्स
शीला एफ ईरानी (1995-1996)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

 1996

नील ओ ब्रायन

हेडविग रेगो

 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

 1998

बीट्रिक्स डिसूजा
नेविल फोली

समता पार्टी

 1999

बीट्रिक्स डिसूजा

समता पार्टी

डेन्ज़िल बी एटकिंसन

भारतीय जनता पार्टी

 2004

इंग्रिड मैक्लोड
फ्रांसिस फैन्थोम

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

 2009

इंग्रिड मैक्लोड
चार्ल्स डायस

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

 2014

जॉर्ज बेकर
रिचर्ड हे

भारतीय जनता पार्टी

वर्तमान में, लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के दो एंग्लो-इंडियन सांसद हैं। ये हैं केरल के “रिचर्ड हे” और पश्चिम बंगाल के “जॉर्ज बेकर”.

संविधान की 10वीं अनुसूची के मुताबिक कोई एंग्लो इंडियन सदन में मनोनीत होने के 6 महीने के अंदर किसी पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं. सदस्यता लेने के बाद वो सदस्य पार्टी व्हिप से बंध जाते हैं और उन्हें पार्टी के मुताबिक सदन में काम करना पड़ता है.

एंग्लो इंडियन कौन होते हैं और उनके पास संसद में क्या अधिकार होते हैं?

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