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"AMBIS" सिस्टम क्या है और यह अपराधियों को पकड़ने में कैसे मदद करेगा?

ऑटोमेटेड मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AMBIS), सभी अपराधियों के फिंगरप्रिंट, फोटोग्राफ और रेटिना स्कैन जैसे डेटा को स्टोर करने का एक नया सिस्टम है.यह प्रणाली अपराधियों को तेजी से पकड़ने में पुलिस की मदद करेगी. महाराष्ट्र, देश का पहला राज्य बन गया जिसने AMBIS प्रणाली को अपनाया है.
Nov 26, 2019 11:06 IST
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ऑटोमेटेड मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AMBIS) क्या है?

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस द्वारा ऑटोमेटेड मल्टी-मॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AMBIS) को जुलाई 2019 में लॉन्च किया गया था.

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AMBIS अपराधियों के डेटा को संग्रहीत करने और आपराधिक मामलों में जांच को गति देने में फायदेमंद होगा. AMBIS एक क्लिक में अपराधियों का विवरण खोजने में पुलिस के लिए गूगल इंजन के रूप में काम करेगा. अपराधियों को पकड़ने के लिए देश में इस्तेमाल होने वाली यह अपनी तरह की पहली तकनीकी है.

यहाँ यह उल्लेख करना जरूरी है कि AMBIS महाराष्ट्र साइबर विभाग के अंदर काम करेगा. 

AMBIS सिस्टम अपराधी को पकड़ने में कैसे मदद करेगा;

इस सिस्टम में किसी भी पूर्व अपराधी के बारे में पहले से ही पूरी जानकारी स्टोर होगी जैसे; अपराध की प्रकृति, समय सीमा और क्षेत्र का विवरण. इसमें अपराध होते ही,(घटना स्थल से ही) इसकी जानकारी सभी कनेक्टेड सर्वर की मदद से मुंबई पुलिस को मिल जाएगी और पुलिस एक्टिव होकर अपराधी को पकड़ने के लिए जाल बिछा सकेगी.

AMBIS सिस्टम की विशेषताएं (Features of the AMBIS System)

1. ऑटोमेटेड मल्टीमॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AMBIS) ने पुलिस को उन अपराधियों का चेहरा पहचानने के करीब पहुंचा दिया है जिनके फिंगर प्रिंट्स कई दशकों पहले पुलिस द्वारा कागज पर लिए गए थे.

2. AMBIS सिस्टम; आपराधिक रिकॉर्ड की एक डिजिटल लैब की तरह काम करेगा. इसमें सभी अपराधियों की तस्वीरें, उंगलियों के निशान और रेटिना स्कैन जैसे रिकॉर्ड होंगे.

3. AMBIS सिस्टम; एक केंद्रीय सर्वर से जुड़ा हुआ है, इसलिए देश और विदेश के पुलिस विभाग किसी विशेष अपराधी के विवरण का पता लगाने में सक्षम होंगे.

4.  AMBIS सिस्टम की मदद से पुलिस मौके पर ही (मोबाइल लाइव स्कैनर की मदद से) ट्रेस कर पाएगी कि संदिग्ध का कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड था या नहीं? यदि AMBIS में संग्रहीत पुराने डेटा के साथ नया डेटा मेल नहीं खाता है, तो इससे पता चल जायेगा कि अपराधी एक नया व्यक्ति है.

5. अब तक AMBIS में 6.5 लाख अपराधियों का विवरण दर्ज किया जा चुका है. AMBIS में संग्रहीत डेटा में अपराधी द्वारा किये गए अपराध के प्रकार, क्षेत्र और इंटेंसिटी के बारे में भी पता चल जायेगा.

6. AMBIS की मदद से केवल 0.46 मिलीसेकंड में अपराधियों के विवरण का पता लगाया जा सकता है.
पुलिस, अपराध से सम्बंधित डेटा को डायरेक्ट क्राइम साइट से AMBIS में फीड कर सकेगी जो कि पूरी मुंबई में सीसीटीवी कैमरा नेटवर्क के साथ-साथ केंद्र सरकार के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम से भी जुड़ा होगा.

7.पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की थी कि आने वाले दिनों में AMBIS सिस्टम का क्रियान्वयन; मुंबई के सभी 94 पुलिस स्टेशनों में, राज्य के के सभी 1160 पुलिस स्टेशनों,  सभी 36 जिलों, 12 पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों, 10 केंद्रीय जेलों, 7 पुलिस रेंजों और 4 फिंगरप्रिंट ब्यूरो में किया जायेगा.

8. ऑटोमेटेड मल्टीमॉडल बायोमेट्रिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AMBIS) के संचालन के लिए 2600 पुलिस-कर्मियों को प्रशिक्षित किया जायेगा.

अब तक साइबर पुलिस विभाग, 1950 के दशक के बाद से कागज पर दर्ज किए गए 6.5 लाख से अधिक उंगलियों के निशान को डिजिटल कर चुका है. इसलिए यह उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में AMBIS का क्रियान्वयन, मुंबई पुलिस को शहर और राज्य में अपराध को कम करने में मदद करेगा.

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