भारतीय अर्थव्यवस्था - महत्वपूर्ण आर्थिक शब्दावली सेट 2

विशिष्ट शब्दावली (जार्गन्स– Jargons) सभी विषयों में विषय विशेष शब्द होते हैं। भारतीय अर्थव्यस्था विषय की भी विशिष्ट शब्दावली है I इसका प्रयोग लेखों/ प्रकाशनों/ रिपोर्टों आदि में बहुत किया जाता है I अगर कोई छात्र इन आर्थिक शब्दों का अर्थ समझने में असमर्थ होता है तो वह लेख/ पैराग्राफ/ रिपोर्ट का अर्थ समझने में सक्षम नहीं होगा/होगी। हमने भारतीय अर्थव्यस्था पर आपके ज्ञान को बढ़ाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कुछ शब्दों का चयन किया है।

सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product): एक वर्ष में किसी देश की सीमा के भीतर उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद कहते हैं I यह एक देश के जीवन स्तर के कई संकेतकों में से एक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है


पारिवारिक इकाई (Household Unit): व्यक्तियों का समूह जो सामान्य रूप से एक साथ रहते हैं और एक आम रसोई से भोजन प्राप्त करते हैं। यह शब्द "सामान्य रूप" का अर्थ है कि इसमें से अस्थायी आगंतुकों को नहीं गिना जाता है परन्तु जो लोग जो अस्थायी रूप से इस समूह से दूर रहते हैं, उनको शामिल किया गया है।

आयात लाइसेंस (Import Licensing): देश में वस्तुओं के आयात के लिए सरकार से आवश्यक अनुमति।

आयात प्रतिस्थापनः अर्थव्यवस्था के विकास के लिए देश की एक नीति जिसमें आत्म– निर्भरता एवं घरेलू रोजगार के आधार पर घरेलू उद्योग को प्रोत्साहित करने की दृष्टिकोण से वस्तुओं का आयात सामान्य तौर पर घरेलू उत्पादन (आयात नियंत्रण, टैरिफ और कोटा के माध्यम से) से प्रतिस्थापित किया जाता है।

शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate): यह किसी खास वर्ष में, उस वर्ष जन्म लेने वाले प्रति 1,000 जीवित शिशुओं में से, एक वर्ष की उम्र से छोटे बच्चों की मृत्यु की संख्या को गिना जाता है।

मुद्रास्फीति (Inflation):  वस्तुओं और सेवाओं के मूल्यों में लगातार होने वाली बृद्धि को मुद्रास्फीति कहते हैं I इस स्तिथि में मुद्रा के मूल्य में कमी होती है क्योंकि अब उसी मुद्रा से कम वस्तुओं को ख़रीदा जा सकता है ।

अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यम (Informal Sector Enterprises): निजी क्षेत्र के वैसे उद्यम जिनमे नियमित रूप से 10 से कम लोग काम करते हैं ।

घरेलू अर्थव्यवस्था का एकीकरण (Integration of Domestic Economy): एक स्थिति जिसमें सरकार की नीतियां के माध्यम से घरेलू अर्थव्यवस्था को विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार और निवेश के लिए जोड़ा जाता है I

अदृश्य वस्तुएं (Invisibles Goods): चालू खाते के भुगतान के संतुलन में कई वस्तुओं की प्रवृष्टि की जाती है, उनमें से कुछ दृश्य वस्तुएं नहीं होती हैं। अदृश्य वस्तुओं में मुख्य रूप से सेवाएँ जैसे पर्यटन, जहाज या हवाई जहाज द्वारा परिवहन और बीमा एवं बैंकिंग जैसी वित्तीय सेवाएं होती हैं। इसमें विदेश भेजे गए उपहार या विदेश से मिलने वाले उपहार और पैसे का निजी हस्तांतरण, सरकारी अनुदान एवं ब्याज, लाभ और लाभांश भी शामिल होता है।
श्रम कानून (Labour Laws): श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा बनाए गए सभी नियम और विनियम।

भूमि/ राजस्व निपटान (Land/Revenue Settlement): भारत के अलग– अलग हिस्सों में ब्रिटिश के क्षेत्रीय अधिकार के साथ क्षेत्रों का प्रशासन भूमि के सर्वेक्षण के आधार पर तैयार किया गया था। इसे सरकार के हित में राजस्व के रुप में तय किया जाता है। यह राजस्व भूमि के प्रत्येक खंड से एकत्र किया जाता है चाहे वह एक रैयत ( यानि किसान) हो या एक महल ( राजस्व गांव) या एक जमींदार ( भूमि का मालिक)। इनमें से प्रत्येक मामला भूमि पर बाद वाले के अधिकार के लिए चाहे भूमि के स्वामित्व या कृषि के अधिकारों के उद्देश्य के लिए था। यह प्रणाली भूमि/ राजस्व निपटान कहलाती है। भारत में अलग– अलग प्रकार की भूमि/ राजस्व निपटान समझौते किए गए थे। ये थे – क) स्थायी निपटान की प्रणाली जिसे जमींदारी प्रणाली कहा जाता है। ख) रैयतवारी प्रणाली ( राजस्व निपटान की एक प्रणाली जो सरकार और व्यक्तिगत किराएदार के बीच होती है) ग) महलवारी प्रणाली (सरकार का महल के साथ किया जाने वाला राजस्व निपटान प्रणाली) ।

जन्म (वर्ष) के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth (years): इसमें इस बात की गणना की जाती है कि जन्म के समय से कितने वर्षों तक एक नवजात शिशु जीवित रहेगा I

मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality Rate): जन्म देने वाली प्रति 10,0000 महिलाओं में से मरने वाली महिलाओं की संख्या को मातृ मृत्युदर अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है चाहे मृत्यु गर्भावस्था से संबंधित कारणों से हुई हो या गर्भपात कराने के बाद 42 दिन के भीतर हुई हो। सन 2011 से 2013  की अवधी में भारत में जन्म देते समय प्रति 100,000 महिलाओं में से 167 महिलाएं मौंत के मुंह में चली जाती हैं। विकसित देशों मे बच्चे के जन्म के दौरान मरने वाली महिलाओं की संख्या 20 से कम है। इस तरह से भारत में लगभग 44,000 महिलाएं प्रतिवर्ष जमन देते समय या गर्भ धारण के 42 दिनों के अन्दर मृत्यु का शिकार हो जातीं हैं ।

मर्चेंट बैंकर्स (Merchant Bankers): बैंक या वित्तीय संस्थान जो निवेश बैंकर्स के नाम से भी जाने जाते हैं, जो कंपनियों को सलाह देने और स्टॉक्स एवं बॉन्डों की खरीद/ बिक्री और प्रवर्तन के माध्यम से उनकी इक्विटी और ऋण आवश्यकताओँ (अक्सर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट कहा जाता है) का प्रबंधन करते हैं।

रुग्णता (Morbidity): यह बीमार होने की प्रवृत्ति है। यह किसी व्यक्ति को अस्थायी तौर पर अक्षम बनाकर उसके/ उसकी काम को प्रभावित करता है। लंबे समय की रुग्णता मृत्यु की वजह बन सकता है। हमारे देश में, श्वसन संबंधी तीव्र संक्रमण और डायरिया रुग्णता के प्रमुख दो कारण हैं।

मृत्यु दर (mortality): शब्द 'मृत्यु दर– mortality' लातिन शब्द मोर्स (यानि मृत्यु) से बने शब्द 'मोर्टल (mortal– नश्वर) से बना है। यह प्रति 1,000 व्यक्तियों पर होने वाली मृत्यु (किसी बीमारी या सामान्य परिस्थिति में) की सालाना संख्या होती है। यह रुग्णता दर, जो आबादी के कुल लोगों की संख्या की तुलना में बीमारी वाले लोगों की संख्या होती है, से अलग है।

एमआरटीपी एक्ट (MRTP Act): इस कानून का मुख्य उद्येश्य कुछ लोगो के हाथ में आर्थिक शक्तियों के केन्द्रीकरण को रोकना थाI इसे 1969 लागू किया गया था I इसे एकाधिकार और प्रतिबंधात्मक व्यापार व्यवहार अधिनियम भी कहते हैं I
बहुपक्षीय व्यापार समझौते (Multilateral Trade Agreements): एक देश द्वारा दो से अधिक देशों के साथ वस्तुओं एवं सेवाओं के आदान– प्रदान के लिए किए गए व्यापार समझौते।

राष्ट्रीय उत्पाद/ आय (National Product/Income): एक देश में उत्पादित होने वाली वस्तुओँ और सेवाओं का कुल मान के साथ– साथ उस देश को विदेश से होने वाली आमदनी को राष्ट्रीय उत्पाद/ आय कहते हैं ।

राष्ट्रीयकरण (Nationalisation):– निजी क्षेत्र से सरकारी क्षेत्र को स्वामित्व का हस्तांतरण। इसमें राज्य या केंद्र सरकार द्वारा व्यक्तिगत या व्यक्तियों के समूह के स्वामित्व वाली कंपनियों का अधिग्रहण शामिल है। कुछ संदर्भों में, इसमें राज्य सरकार के स्वामित्व का केंद्र सरकार को हस्तांतरण भी शामिल होता है।

नई आर्थिक नीति (New Economic Policy): वर्ष 1991 से भारत में अपनाई गई उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण की नीतियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द। इस नीति के बाद भारत की अर्थव्यस्था पुरे विश्व के साथ जुड़ गयी है I

गैर– नवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable Resources): ऐसे संसाधन जिनका नवीकरण नहीं किया जा सकता। बड़े भंडार होने के बावजूद ये सीमित होते हैं। कुछ उदाहरण हैं– जीवाश्म ईंधन जैसे तेल और कोयला एवं खनिज संसाधन– लोहा, जस्ता, एल्युमीनियम, यूरेनियम।

गैर– टेरिफ बाधाएं (Non-Tariff Barriers): कर के अलावा अन्य रूप में सरकार द्वारा आयात पर लगाए जाने वाले सभी प्रतिबंध। इसमें मुख्य रूप से आयात की गई वस्तुओँ की मात्रा एवं गुणवत्ता पर प्रतिबंध शामिल हैं।
अवसर लागत (Opportunity Cost): इसका मतलब किसी एक चीज को प्राप्त करने के लिए किसी दूसरी चीज को प्राप्त करने का अवसर खोना ही अवसर लागत कहलाता है I जैसे अगर किसी के पास 100 रुपया हैं तो इन रुपए से या तो वह किताब खरीद ले या खाना खा ले I

पेंशन (Pension): काम से सेवानिवृत्त हुए कार्मचारी को मिलने वाला मासिक भुगतान।

प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income): अवधि विशेष में एक देश की जनसंख्या से विभाजित उसकी कुल राष्ट्रीय आमदनी।

परमिट लाइसेंस राज (Permit License Raj): भारत में वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन के लिए किसी उद्यम को शुरु करने, चलाने और संचालित करने के लिए सरकार से अनुमति लेने को ही परमिट लाइसेंस राज कहते हैं I

गरीबी रेखा (Poverty Line): किसी व्यक्ति की खास न्यूनतम आवश्यकताओं पर होने वाला प्रति व्यक्ति खर्च जिसमें ग्रामीण इलाके में 2,400 कैलोरी और शहरी इलाकों में 2,100 कैलोरी का औसत दैनिक भोजन शामिल है।

निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान (Private Sector Establishments): वे सभी प्रतिष्ठान जिनका स्वामित या संचालन निजी व्यक्तियों या व्यक्तियों के समूह द्वारा किया जाता है।

उत्पादकता (Productivity): लगाए गए इनपुट पर प्रति यूनिट आउटपुट। पूंजी या श्रम की कुशलता बढ़ाने से उत्पादकता बढ़ती है। इस शब्द का सामान्य रूप से श्रम इनपुट में उत्पादकता को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

भविष्य निधि (Provident Fund): एक बचत कोष जिसमें नियोक्ता और कर्मचारी नियमित रूप से कर्मचारी के हित के लिए योगदान करते हैं। इसका रखरखाव सरकार करती है और कर्मचारी द्वारा इस्तीफा देने या सेवानिवृत्त होने के बाद उसे देती है।

सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठान (Public Sector Enterprises): सरकार के स्वामित्व और संचालन वाले सभी प्रतिष्ठान। वे या तो स्थानीय सरकार, राज्य सरकार द्वारा या केंद्र सरकार द्वारा स्वतंत्र रूप से या संयुक्त रूप से संचालित हो सकते हैं।

मात्रात्मक प्रतिबंध (Quantitative Restrictions): भुगतान का संतुलन (बीओपी) के घाटे और घरेलू उद्योगों के संरक्षण के लिए आयात को कम करने हेतु कुल मात्रा या कोटा के रूप में आयात पर लगाया गया प्रतिबंध।
नियमित वेतनभोगी/ वेतन कर्मचारीः व्यक्ति, जो दूसरे की कंपनी या गैर– कंपनी उद्यम में काम करता हो, और बदले में, उसे नियमित आधार पर वेतन या मजदूरी (यानि दैनिक या कार्य अनुबंध के आवधिकनवीकरण के आधार पर नहीं) मिलती हो। इनमें न सिर्फ समय से पारिश्रमिक प्राप्त करने वाले व्यक्ति आते हैं बल्कि वे लोग भी होते हैं जिन्हें पूर्ण कालिक या अंशकालिक दोनों ही रूप से टुकड़ों में मजदूरी या वेतन या वेतन पाने वाले प्रशिक्षु भी होते हैं।

अक्षय संसाधन (Renewable Resources): वैसे संसाधन जिनका बुद्धिमत्ता से प्रयोग किए जाने पर प्राकृतिक प्रक्रियाओं के माध्यम से नवीकरण किया जा सके। वन, पशु और मछलियां, अगर उनका अतिरिक्त शोषण नहीं किया जाए, आसानी से नवीकृत किए जा सकते हैं। इस श्रेणी में पानी भी आता है।

दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क): यह दक्षिण एशिया के आठ देशों का संगठन है– बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका और अफगानिस्तान। सार्क दक्षिण एशिया के लोगों को मैत्री, विश्वास और समझ के साथ मिल कर काम करने हेतु मंच प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों में आर्थिक एवं सामाजिक विकास की प्रक्रिया में तेजी लाना है।

स्वरोजगार (Self-Employed): वैसे लोग जो अपनी खुद की कंपनी या गैर– कंपनी उद्यम का संचालन करते हैं या किसी पेशे या व्यापार में एक या कुछ भागीदारों के साथ स्वतंत्र रूप से लगे हुए हैं। उनके पास कैसे, कहां और कब उत्पादन करें और उसे बेचने या उनका संचालन करने की स्वतंत्रता होता है। उनकी आमदनी पूर्ण रूप से या मुख्य रूप से बिक्री या उनके उद्यमों से होने वाले लाभ से निर्धारित होता है।

सामाजिक सुरक्षा (Social Security):  उपायों की एक सरकार या निजी स्थापित प्रणाली जो बुजुर्ग, विकलांग, बेसहारा, विधवाओं और बच्चों के लिए भौतिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। इसमें पेंशन, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि, मातृ लाभ, स्वास्थ्य देखभाल आदि शामिल हैं।

विशेष आर्थिक जोन (SEZ): यह एक भौगोलिक क्षेत्र है जिसका आर्थिक कानून देश के आदर्श आर्थिक कानूनों से अलग होते हैं। आमतौर पर इनका लक्ष्य विदेशी निवेश को बढ़ाना होता है। विशेष आर्थिक जोन– चीन, भारत, जॉर्डन, पोलैंड, कजाकिस्तान, फीलिपींस और रूस समेत कई देशों में बनाए गए हैं।

स्थिरीकरण के उपाय (Stabilisation Measures): भुगतान के संतुलन और मुद्रास्फीति की उच्च दर में होने वाले उतार– चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अपनाया गया राजकोषीय और मौद्रिक उपाय।
राज्य विद्युत बोर्ड (SEBs): ये राज्य प्रशासन के अंग होते हैं जो अलग– अलग राज्यों में बिजली पैदा करना, उनका प्रेषण और वितरण का काम करते हैं।

सांविधिक तरलता अनुपात (Statutory Liquidity Ratio (SLR): केंद्रीय बैंक (आरबीआई) के नियमों के अनुसार तरल रूप में बैंकों द्वारा रखे गए कुल जमा एवं भंडार का न्यूनतम अंश। नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) के अलावा एसएलआर का रखरखाव, बैंकों का एक दायित्व है।

स्टॉक एक्सचेंज (Stock Exchange): बाजार जिसमें सरकारी और सार्वजनिक कंपनियों की प्रतिभूतियों का व्यापार किया जाता है। यह शेयर दलालों को कंपनी के शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों का व्यापार करने की सुविधा प्रदान करता है।

शेयर बाजार (Stock Market): संस्थान जहां स्टॉक और शेयरों का कारोबार किया जाता है।

संरचनात्मक सुधार नीतियां (Structural Reform Policies): उदारीकरण, विनियमन और निजीकरण जैसे दीर्घकालिक उपाय जिनका उद्देश्य अर्थव्यवस्था की कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार लाना है।

टैरिफ (Tariff): आयात पर लगने वाला कर, जो या तो भौतिक इकायों पर लगाया जा सकता है जैसे प्रति टन (विशेष) या मान पर। टैरिफ कई कारणों से लगाया जा सकता है, जैसे– सरकारी राजस्व की उगाही के लिए, सब्सिडी या कम– मजदूरी वाले आयातों से घरेलू उद्योगों की रक्षा के लिए, घरेलू रोजगार को बढ़ावा देने के लिए या आयात में कमी के द्वारा, भुगतान संतुलन के घाटे को कम करने के लिए। टैरिफ लगने से घरेलु उपभोक्ताओं के लिए आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ जातीं हैं ।

टैरिफ बाधाएं (Tariff Barriers): कर के रूप में सरकार द्वारा आयात पर लागाई जाने वाली सभी प्रतिबंध।

ट्रेड यूनियन (व्यापार संघ): कामगारों का एक संगठन जिसका उद्देश्य मजदूरी, लाभों और काम की परिस्थितियों के संदर्भ में अपने सदस्यों के हितों को संबोधित करना है।

बेरोजगारी (Unemployment): एक ऐसी स्थिति जिसमें वे सभी कामगार जिनके पास काम नहीं है या काम नहीं करते लेकिन रोजगार एक्सचेंजों, मध्यस्थों मित्रों या रिश्तेदारों के माध्यम से काम की तलाश में हैं या संभावित नियोक्ता को नौकरी के लिए आवेदन भेजते हैं या अपनी इच्छा प्रकट करते हैं या वर्तमान प्रचलित मजदूरी दर पर काम करने को तैयार नहीं हैं I

शहरीकरण (Urbanisation): एक महानगरीय क्षेत्र का विस्तार, कुल आबादी का हिस्सा या शहरी क्षेत्र का हिस्सा (शहर या कस्बे) या समय के साथ इस अनुपात में बढ़ोतरी। इस प्रकार यह शहरी आबादी के स्तर को इलाके के कुल आबादी के सापेक्ष या जिस दर से शहरी आबादी बढ़ रही है, का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। दोनों को प्रतिशत में व्यक्त किया जा सकता है,बदलाव की दर को प्रतिशत प्रति वर्ष, दशक या जनगणना की अवधि में व्यक्त किया जा सकता है।
कामगार–आबादी अनुपात (Worker-Population Ratio): जनसंख्या से विभाजित श्रमिकों की कुल संख्या। यह प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।

जन्म (वर्ष) के समय जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy at Birth (years):

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