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भारत में समाजवाद के अग्रदूत डॉ. राम मनोहर लोहिया के बारे में 10 अनजाने तथ्य

भारत के इतिहास और समृद्धि में भारत के महानतम स्वतंत्रता सेनानियों में से एक राममनोहर लोहिया का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने न केवल आजादी से पहले ब्रिटिश शासकों के खिलाफ आवाज उठाई थी बल्कि स्वतंत्र भारत में सामाजिक अन्याय, वर्ग और जाति के भेदभाव और लैंगिक पूर्वाग्रह का भी विरोध किया थाl लोहिया ने देश के युवाओं को स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल किया और देश को बेहतर ढ़ंग से समझने के लिए उन्हें साहित्य, कविता, कला और सौंदर्यशास्त्र से संबंधित विषयों में मार्गदर्शन किया। इस लेख में हम डॉ. राममनोहर लोहिया के जन्मदिवस के अवसर पर उनके बारे में 10 अनजाने तथ्यों का विवरण दे रहे हैंl  

भारत में समाजवाद के अग्रदूत डॉ. राम मनोहर लोहिया के बारे में 10 अनजाने तथ्य

 
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1. लोहिया के व्यक्तित्व पर गांधीजी का प्रभाव था
डॉ. राम मनोहर लोहिया का जन्म उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में 23 मार्च 1910 को हुआ थाl उनके पिता श्री हीरालाल शिक्षक थे और गांधीजी के अनुयायी थेl उनकी माता का नाम चंदा देवी थाl गांधीजी के अनुयायी होने के कारण लोहिया के पिता अक्सर गांधीजी से मिलने जाया करते थेl इस दौरान वे अपने साथ लोहिया को भी ले जाते थेl इसके कारण बचपन से ही लोहिया पर महात्मा गांधी का काफी प्रभाव थाl
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2. जर्मनी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी

राममनोहर लोहिया की शुरूआती पढ़ाई टंडन स्कूल से हुई थीl बाद में उन्होंने विश्वेश्वरनाथ विद्यालय से हाईस्कूल की शिक्षा पूरी की थीl 1927 में काशी विश्वविद्यालय से 12वीं पास करने के बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई कलकत्ता के विद्यासागर कॉलेज से पूरी की थीl इसके बाद उन्होंने जर्मनी जाकर अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थीl
3. 10 साल की उम्र में ही सत्याग्रह से जुड़ाव
राममनोहर लोहिया भारतीय राजनीति में सबसे अधिक महात्मा गांधी से प्रेरित थेl भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थीl वे सिर्फ 10 साल की उम्र में ही सत्याग्रह से जुड़ गए थेl 1935 में तत्कालीन कांग्रेस के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू ने लोहिया को कांग्रेस का महासचिव नियुक्त किया थाl
4. द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों के भाग लेने का विरोध किया

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द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश रॉयल सेना में भारतीयों के भाग के खिलाफ उनके जोरदार विरोध के कारण उन्हें 1939 में जेल भेज दिया गया थाl इसके बाद साल 1940 में "सत्याग्रह अब" नामक लेख लिखने के कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें दो साल की सजा सुनाई थी, लेकिन दिसम्बर 1941 में उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया थाl
5. पिता की मृत्यु होने पर भी अंग्रेजों से पेरोल की मांग नहीं की  
भारत छोड़ो आंदोलन में गांधीजी समेत कई बड़े कांग्रेसी नेता के गिरफ्तार होने के कारण लोहिया भूमिगत होकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे थेl 20 मई 1944 को उन्हें बम्बई में गिरफ्तार किया गया और लाहौर जेल में बंद कर दिया गया थाl 1945 में उन्हें आगरा जेल में स्थानांतरित कर दिया गयाl इस दौरान उनके पिता की मृत्यु हो गई लेकिन स्वाभिमानी लोहिया ने ब्रिटिश सरकार का अहसान नहीं लिया और पेरोल ठुकरा दीl इसके बाद 11 अप्रैल 1946 को लोहिया को रिहा कर दिया गया थाl
6. आजादी के बाद नेहरू से मतभेद
1947 में भारत की आजादी के बाद लोहिया और नेहरू में मतभेद शुरू हो गए, जिसके कारण लोहिया ने कांग्रेस छोड़ दीl इसके बाद कांग्रेस का विरोध करना ही लोहिया की राजनीति का आधार बन गया था। उन्होंने अकेले दम पर विपक्ष खड़ा किया, नतीजतन कांग्रेस को कई राज्यों में हार का मुंह देखना पड़ा।
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7. स्वदेशी के समर्थक  
राममनोहर लोहिया स्वदेशी के बहुत बड़े पैरोकार थे। उन्होंने अंग्रेजी भाषा का विरोध किया था और इसे शासकों की भाषा बताया था। लोहिया का मानना था कि देश का विकास सिर्फ अपनी मातृभाषा में ही हो सकती है।
8. भारतीय समाजवाद के अग्रदूत  
 
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कांग्रेस से अलग होने के बाद लोहिया ने समाजवाद का रास्ता चुना और देश के प्रख्यात समाजवादी नेता के रूप में मशहूर हुएl उन्होंने किसानों को कृषि समाधान के साथ मदद करने के लिए हिंद किसान पंचायत नामक संगठन की स्थापना की थीl लोहिया ने जातिवाद तोड़ने के लिए रोटी और बेटी का सिद्धांत दिया था। उनका कहना था, "जातिवाद का खात्मा करने के लिए समाज की हर जाति को एक दूसरे के साथ बैठ कर खाना चाहिए। इसके साथ ही अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देना चाहिए।"
लोहिया आर्थिक बराबरी के बिना किसी भी तरह की बराबरी को बेमानी मानते थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मौत के बाद उन्होंने अपने पीछे कोई जायदाद नहीं छोड़ी थीl
9. सरकारी स्कूलों के समर्थक
लोहिया ने हर स्तर पर बराबरी की बात कही थी। उनका कहना था कि शिक्षा के स्तर पर बराबरी लाने का एक ही तरीका है कि सरकारी स्कूलों की हालत सुधारी जायl लोहिया अपने समाजवादी मित्रों एवं नेताओं को भी कहते थे कि वे अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में ही पढाएंl
10.  फिजुलखर्जी के विरोधी
लोहिया फिजुलखर्जी के सख्त खिलाफ थे। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पर टिप्पणी करते हुए एक बार उन्होंने कहा था, कि “जब देश के बहुसंख्यक लोग सिर्फ 3 आना कमाता हैं, तो नेहरू का एक दिन का खर्च 25 हजार रूपए कैसे हो सकता हैl”
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