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26 जनवरी की परेड से संबंधित 13 रोचक तथ्य

भारत में 26 जनवरी को एक राष्ट्रीय पर्व का दर्जा प्राप्त है. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन सन 1950 में हमारे देश में संविधान लागू किया गया था. इस दिन लगभग 2 लाख लोग गणतंत्र दिवस की परेड को देखने आते हैं. परेड के दौरान राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दिए जाने की प्रथा है. क्या आप जानते है कि 21 तोपों की यह सलामी 21 बंदूकों से नहीं, बल्कि भारतीय सेना की 7 तोपों से दी जाती है जिन्हें '25 पाउंडर्स' कहा जाता है. राष्ट्रगान शुरू होते ही पहली सलामी दी जाती है और ठीक 52 सेकंड बाद आखिरी सलामी दी जाती है.

परेड से कुछ दिन पहले ही इंडिया गेट और आसपास के क्षेत्र को एक अभेद्य किले में बदल दिया जाता है. परेड को सुचारू ढ़ंग से संचालित करने के लिए सेना के हजारों जवानों के अलावा कई अन्य लोग भी सक्रिय रूप से जुटे रहते हैं. परेड के आयोजन की औपचारिक जिम्मेवारी रक्षा मंत्रालय की होती है जिसमें कम से कम 70 विभिन्न संगठन उसकी मदद करते हैं.

जैसा की हम जानते हैं कि COVID-19 महामारी के कारण, गणतंत्र दिवस का इवेंट में दर्शकों की संख्या, मार्चिंग कंटेस्टेंट्स के आकार और अन्य आकर्षण कम होंगे. पिछले साल लगभग 1.25 लाख स्पेक्टेटर आए थे और इस बार, 25,000 तक किया गया है. इस वर्ष, आम जनता के लिए टिकटों को घटाकर 4,500 कर दिया गया है, और सोशल  डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए, मार्चिंग कंटेस्टेंट्स का आकार 144 से घटाकर 96 कर दिया गया है।

 इस साल, परेड भी कम होगी. परेड लाल किले तक मार्च करने के बजाय नेशनल स्टेडियम में समाप्त होगी.  लाल किले पर Tableaux को प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाएगी. परेड में 32 झांकी के बीच पहली बार केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख भाग लेगा.

26 जनवरी, 2021 को, स्कूलों और कॉलेजों के लगभग 100 मेधावी छात्रों को प्रधानमंत्री बॉक्स से गणतंत्र दिवस परेड देखने का मौका मिलेगा. परेड के बाद छात्रों को केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल से बातचीत करने का भी मौका मिलेगा.

इस वर्ष, COVID-19 महामारी से उत्पन्न वैश्विक स्थिति के कारण गणतंत्र दिवस परेड 2021 के समारोहों में मुख्य अतिथि के रूप में कोई विदेशी नेता नहीं होगा. आइये अब हम 26 जनवरी की परेड से जुड़े 13 रोचक तथ्यों पर अध्ययन करते हैं.

गणतंत्र दिवस 2021: भारतीय गणतंत्र की यात्रा

 परेड से जुड़े 13 रोचक तथ्य

1. हम सभी को पता है कि हर वर्ष 26 जनवरी की परेड का आयोजन नई दिल्ली स्थित राजपथ पर किया जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि 1950 से लेकर 1954 ईस्वी तक परेड का आयोजन स्थल राजपथ नहीं था? इन वर्षों के दौरान 26 जनवरी की परेड का आयोजन क्रमशः इरविन स्टेडियम (अब नेशनल स्टेडियम), किंग्सवे, लाल किला और रामलीला मैदान में किया गया था. 1955 ईस्वी से राजपथ 26 जनवरी की परेड का स्थायी आयोजन स्थल बन गया. उस समय राजपथ को “किंग्सवे” के नाम से जाना जाता था.

Image source: CDN Times

2. 26 जनवरी की परेड के दौरान हर साल किसी ना किसी देश के प्रधानमंत्री/राष्ट्रपति/शासक को अतिथि के रूप में बुलाया जाता है. 26 जनवरी 1950 को आयोजित पहले परेड में अतिथि के रूप में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति डॉ. सुकर्णो को आमंत्रित किया गया था. जबकि 1955 में राजपथ पर आयोजित पहले परेड में अतिथि के रूप में पाकिस्तान के गवर्नर जेनरल मलिक गुलाम मोहम्मद को आमंत्रित किया गया था.

दक्षिण अफ्रीका के पांचवें और वर्तमान राष्ट्रपति मैटामेला सिरिल रामफोसा, भारत के 70 वें गणतंत्र दिवस 2019 के मुख्य अतिथि होंगे.

3. 26 जनवरी की परेड की शुरूआत राष्ट्रपति के आगमन के साथ होती है. सबसे पहले राष्ट्रपति के घुड़सवार अंगरक्षकों के द्वारा तिरंगे को सलामी दी जाती है, उसी समय राष्ट्रगान बजाया जाता है और 21 तोपों की सलामी दी जाती है. लेकिन क्या आप जानते है कि वास्तव में वहां 21 तोपों द्वारा फायरिंग नहीं की जाती है? बल्कि भारतीय सेना के 7 तोपों, जिन्हें “25 पौन्डर्स” कहा जाता है, के द्वारा तीन-तीन राउंड की फायरिंग की जाती है.

रोचक बात यह है तोप द्वारा की जाने वाली फायरिंग का समय राष्ट्रगान के समय से मेल खाता है. पहली फायरिंग राष्ट्रगान के शुरूआत के समय की जाती है जबकि अंतिम फायरिंग ठीक 52 सेकेण्ड के बाद की जाती है. इन तोपों को 1941 में बनाया गया था और सेना के सभी औपचारिक कार्यक्रमों में इसे शामिल किया जाता है.

Image source: BDalbum

भारत का राष्ट्रीय ध्वजः तथ्यों पर एक नजर

4. परेड के दिन परेड में भाग लेने वाले सभी दल सुबह 2 बजे ही तैयार हो जाते हैं और सुबह 3 बजे तक राजपथ पर पहुँच जाते हैं. लेकिन परेड की तैयारी पिछले साल जुलाई में ही शुरू हो जाती है जब सभी दलों को परेड में भाग लेने के लिए अधिसूचित किया जाता है. अगस्त तक वे अपने संबंधित रेजिमेंट केन्द्रों पर परेड का अभ्यास करते हैं और दिसंबर में दिल्ली आते हैं. 26 जनवरी की परेड में औपचारिक रूप से भाग लेने से पहले तक विभिन्न दल लगभग 600 घंटे तक अभ्यास कर चुके होते हैं.

5. परेड में शामिल होने वाले टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों तथा भारत की सामरिक शक्ति को प्रदर्शित करने वाले अत्याधुनिक उपकरणों के लिए इंडिया गेट परिसर के भीतर एक विशेष शिविर बनाया जाता है. प्रत्येक हथियार की जाँच एवं रंग-रोगन का कार्य 10 चरणों में किया जाता है.

भारतीय गणतंत्र दिवस परेड में आने वाले सभी मुख्य अतिथियों की सूची (1950-2021)

6. 26 जनवरी की परेड के लिए हर दिन अभ्यास के दौरान और फुल ड्रेस रिहर्सल के दौरान प्रत्येक दल 12 किमी की दूरी तय करती है जबकि परेड के दिन प्रत्येक दल 9 किमी की दूरी तय करती है. पूरे परेड के रास्ते पर जजों को बिठाया जाता है जो प्रत्येक दल पर 200 मापदंडों के आधार पर बारीकी से नजर रखते हैं, जिसके आधार पर “सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग दल” को पुरस्कृत किया जाता है.

7. 26 जनवरी की परेड के शरूआत से लेकर अंत तक हर गतिविधि सुनियोजित होती है. अतः परेड के दौरान छोटी-से-छोटी गलती या कुछ ही मिनटों के विलम्ब के कारण भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

8. परेड में भाग लेने वाले प्रत्येक सैन्यकर्मी को चार स्तरीय सुरक्षा जाँच से गुजरना पड़ता है. इसके अलावा उनके द्वारा लाए गए हथियारों की गहन जाँच की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उनके हथियारों में जिन्दा कारतूस तो नहीं है.

9. परेड में शामिल सभी झांकियां 5 किमी/घंटा की गति से चलती हैं ताकि गणमान्य व्यक्ति इसे अच्छे से देख सके. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन झांकियों के चालक एक छोटी सी खिड़की के माध्यम से वाहनों को चलाते है.

Image source: Athavan English News  

10. परेड का सबसे रोचक हिस्सा “फ्लाईपास्ट” होता है. इस फ्लाईपास्ट की जिम्मेवारी पश्चिमी वायुसेना कमान के पास होती है जिसमें 41 विमान भाग लेते हैं. परेड में शामिल होने वाले विभिन्न विमान वायुसेना के अलग-अलग केन्द्रों से उड़ान भरते हैं और तय समय पर राजपथ पर पहुँच जाते है.

Image source: Festivals of India

11. प्रत्येक गणतंत्र दिवस परेड में गीत Abide with Me (मेरे पास रह)” निश्चित रूप से बजाया जाता है क्योंकि यह महात्मा गांधी का पसंदीदा गीत था.

12. परेड में भाग लेने वाले सेना के जवान स्वदेश में निर्मित “इंसास (INSAS)” राइफल लेकर चलते हैं जबकि विशेष सुरक्षा बल के जवान ईजराइल में निर्मित “तवोर (Tavor)” राइफल लेकर चलते हैं.

Image source: Firstpost

13. RTI से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 में 26 जनवरी की परेड के आयोजन में लगभग 320 करोड़ रूपये खर्च किये गए थे. जबकि 2001 में यह खर्च लगभग 145 करोड़ था. इस प्रकार 2001 से लेकर 2014 के दौरान 26 जनवरी की परेड के आयोजन में होने वाले खर्च में लगभग 54.51% की वृद्धि हुई है.

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