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जाने पुर्तगालियों के व्यापारिक घटनाक्रम के बारे में

पुर्तगाली पहले यूरोपीय थे जिन्होंने भारत तक सीधे समुद्री मार्ग की खोज की । 20 मई 1498 को पुर्तगाली नाविक वास्को-डी-गामा कालीकट पहुंचा, जो दक्षिण-पश्चिम भारत में स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री बंदरगाह है। स्थानीय राजा जमोरिन ने उसका स्वागत किया और कुछ विशेषाधिकार प्रदान किये। भारत में तीन महीने रहने के बाद वास्को-डी-गामा सामान से लदे एक जहाज के साथ वापस लौट गया और उस सामान को उसने यूरोपीय बाज़ार में अपनी यात्रा की कुल लागत के साठ गुने दाम में बेचा।

1579 ईस्वी में शासकीय फरमान के आधार पर पुर्तगालियों को नदी के तट तक सिमित कर दिया गया जो बंगाल में सतगाँव से थोड़ी दुरी पर था और वहां से वे व्यापारिक गतिविधियाँ संचालित करते थे। विभिन्य वर्षों के दौरान, उन्होंने बड़े भवनों के निर्माण द्वारा अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी जिसने उनके व्यापार को सतगाँव से नये पतन हुगली की ओर प्रवासित किया।

पुर्तगालियों का व्यापारिक घटनाक्रम

1498 ईस्वी: वास्को-डी-गामा ने कालीकट तक यात्रा की थी।

1503 ईस्वी: पुर्तगालियों ने भारत में अपना पहला दुर्ग कोचीन में स्थापित किया था

1505 ईस्वी:  पुर्तगालियों ने भारत में अपना दूसरा दुर्ग कुन्नूर में स्थापित किया था। फ्रांसिस्को अल्मीडा को भारत क्षेत्र को गवर्नर बनाया गया 

1509 ईस्वी: अल्मीडा ने गुजरात और मिस्र के संयुक्त बेड़े को पराजित किया। अल्बुकर्क ने बीजापुर के सुल्तान को पराजित किया।

1510 ईस्वी: अल्फांस-डी-अल्बुकर्क को वायसराय बनाया गया।

1511 ईस्वी: पुर्तगालियों ने मलाया द्वीप में स्थित मलक्का पर अधिकार कर लिया।

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1515 ईस्वी: पुर्तगालियों ने फ़ारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित हरमुज पर अधिकार कर लिया। वायसराय अल्बुकर्क की मृत्यु।

1530 ईस्वी: पुर्तगालियों ने गोवा को अपने भारतीय राज्य की राजधानी बनाया।

1535 ईस्वी: पुर्तगालियों ने दीव पर आधिकार कर लिया।

1559 ईस्वी: पुर्तगालियों ने दमन पर अधिकार कर लिया।

1566 ईस्वी: पुर्तगालियों एवं तुर्कों के बीच समझौता।

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1596 ईस्वी: डचों ने पुर्तगालियों को दक्षिण-पूर्व एशिया से बाहर किया।

1612 ईस्वी: सूरत में पुर्तगालियों को पराजित कर अंग्रेजों ने अपना कारखाना स्थापित किया।

1641 ईस्वी: मलक्का दुर्ग पुर्तगालियों से डचों ने छीन लिया।

1659 ईस्वी: श्रीलंका पुर्तगालियों के हाथ से बाहर चला गया।

1663 ईस्वी: मालाबार के सभी दुर्गो को डचों ने जीत कर पुर्तगालियों को भारत से निर्णायक रूप से खादेढ़ दिया।

दुसरे यूरोपीय व्यापारिक प्रतिद्वंदियों के आगे भारत में पुर्तगाली शक्ति अधिक समय तक टिक नहीं सकी। विभिन्न व्यापारिक प्रतिद्वंदियों के मध्य हुए संघर्ष में पुर्तगालियों को अपने से शक्तिशाली और व्यापारिक दृष्टि से अधिक सक्षम प्रतिद्वंदी के समक्ष समर्पण करना पड़ा और धीरे धीरे वे सीमित क्षेत्रों तक सिमट कर रह गए।

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