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एयरबोर्न ट्रांसमिशन (Airborne Transmission) क्या है? जानें एक नए अध्ययन के बारे में जो SARS CoV 2 की लंबी दूरी पर हवा से फैलने पर प्रकाश डालता है

जैसा की हम जानते हैं कि COVID-19  वायरस जो SARS-CoV-2 का कारण बनता है, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में श्वसन की बूंदों के माध्यम से फैलता है. अभी तक इस बात पर डिबेट जारी है कि क्या छोटे एयरोसोल्स (Aerosols) सहित बूंदें, वायरस युक्त हवा में लंबे समय तक निलंबित रहती हैं.

हालाकि कई वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोनावायरस का ट्रांसमिशन अभी एयरबोर्न नहीं हुआ है लेकिन हाल ही में एक रिसर्च सामने आई है जिसमें कोरोनावायरस को लेकर एयरबोर्न ट्रांसमिशन की बात की गई है. कोरोनावायरस का ट्रांसमिशन एयरबोर्न है या नहीं इस पर डिबेट जारी है. 

इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर इस वायरस का ट्रांसमिशन एयरबोर्न हो जाता है तो वायरस का खतरा काफी बढ़ जाएगा, घरों में भी मास्क लगाना होगा, और भी कई सारे एहतियात बरतने होंगे.

जब शोधकर्ताओं ने एक COVID-19 वार्ड में वेंटिलेशन ओपेनिंग्स की जाँच की और तीन COVID-19 वार्डों से इनडोर वायु को बाहर निकालने वाले केंद्रीय नलिकाएं (central ducts), वे केंद्रीय वेंटिलेशन सिस्टम में SARS-CoV-2 का पता लगाने में सक्षम थीं और  रोगी के क्षेत्रों से दूर थीं, जिसका अर्थ यह है कि वायरस लंबी दूरी तक पहुँच सकता है.

अध्ययन में, लेखक बताते हैं कि यह केवल उचित बूंदों के ट्रांसमिशन द्वारा स्पष्ट नहीं किया जा सकता है और SARS-CoV-2 के एयरबोर्न ट्रांसमिशन को निवारक उपायों के लिए ध्यान में रखा जाना चाहिए. उनके निष्कर्षों को जर्नल नेचर (journal Nature) में 11 नवंबर को प्रकाशित किया गया था.

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आखिर एयरबोर्न ट्रांसमिशन (Airborne Transmission) क्या है?

WHO के अनुसार, एयरबोर्न ट्रांसमिशन को एयरोसोल (Aerosols) के प्रसार के कारण संक्रामक एजेंट के प्रसार के रूप में परिभाषित किया जाता है जो लंबी दूरी और काफी समय तक हवा में निलंबित होने पर संक्रामक बने रहते हैं. आसान शब्दों में कहे तो कोरोनावायरस का हवा में होना और उसके जरिये फैलना. एयरोसोल ट्रांसमिशन, एयरोसोल-जनरेटिंग चिकित्सा प्रक्रियाओं (Aerosol-Generating Medical Procedures) के दौरान और यहां तक कि बोलने और गायन के माध्यम से भी हो सकता है.  ये अभी तक प्रूव नहीं किया जा सका है परन्तु इस पर रिसर्च चल रही है और जो जर्नल नेचर में प्रकाशित हुआ है उसके बारे में विस्तार से इस लेख में आगे जानेंगे.

इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देश

इस डिबेट के बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अपने दिशानिर्देशों को अपडेट किया है. जबकि WHO ने पहले ही स्वीकार किया था कि एयरोसोल्स उत्पन्न करने वाली चिकित्सा प्रक्रियाओं के दौरान एयरबोर्न ट्रांसमिशन हो सकता है, अपडेटेड दिशानिर्देशों में कहा गया है कि "WHO, वैज्ञानिक समुदाय के साथ मिलकर, इस बात पर सक्रिय रूप से चर्चा और मूल्यांकन कर रहा है कि क्या  SARS-CoV-2 एयरोसोल्स के माध्यम से भी हो सकता है, एयरोसोल-जनरेटिंग प्रक्रियाओं की अनुपस्थिति में, विशेष रूप से खराब वेंटिलेशन के साथ इनडोर सेटिंग्स में ”.

एयरबोर्न ट्रांसमिशन, एयरोसोल को लेकर अन्य रिसर्च 

यहीं आपको बता दें कि सितंबर में, JAMA नेटवर्क में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया कि चीन में एक बस में एक COVID-19 संक्रमित व्यक्ति से 23 अन्य यात्रियों को कोरोना हो गया. ऐसा एयरबोर्न ट्रांसमिशन के कारण भी हो सकता है. 

इस अध्ययन में, लेखकों ने उल्लेख किया कि अध्ययन किए गए व्यक्तियों के बीच, जो लोग बस 2 में यात्रा करते थे, अन्य लोगों की तुलना में संक्रमण को अनुबंधित करने का अधिक खतरा था. यानी जो बस में यात्रा कर रहे थे उनमें अधिक खतरा था बनिस्पत जो नहीं कर रहे थे. ऐसे में एयरबोर्न ट्रांसमिशन भी एक कारण हो सकता है.

 मई में, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (US Centers for Disease Control and Prevention , CDC) ने 'High SARS-CoV-2 Attack Rate Following Exposure at a Choir Practice’ शीर्षक से एक अध्ययन प्रकाशित किया था. 

शोधकर्ताओं, जिन्होंने "सुपरस्प्रेडिंग इवेंट्स" का अध्ययन किया, ने पाया कि एक लक्षणसूचक सूचकांक (symptomatic index) रोगी सहित 61 व्यक्तियों द्वारा भाग लेने वाले 2.5 घंटे के गायन अभ्यास के बाद, 32  केस कनफर्म्ड हुए और 20 संभावित सेकेंडरी Covid-19 मामले हुए; तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, और दो की मौत हो गई. इस प्रकार का अन्य प्रकोप संभवतः रेस्तरां और फिटनेस कक्षाओं में एयरोसोल के माध्यम से इनडोर भीड़ भरे स्थानों में भी रिपोर्ट किए गए हैं. यानी कोरोनावायरस गाना गाने और इंडोर में भी फैल सकता है. 

आइये अब केस स्टडी या रिसर्च के बारे में अध्ययन करते हैं, उसमें क्या बताया गया है?

अपने अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने वायरस RNA को वार्डों में वेंट ओपनिंग में पाया जहां COVID-19 रोगी या मरीज मौजूद थे. उन्होंने वेंट ओपनिंग के नीचे निलंबित खुले व्यंजनों में रखे तरल पदार्थ में वायरल RNA को भी पाया और वायरल RNA के समान स्तरों को निकास फिल्टर और खुले पेट्री डिश में भी पाया.

इसलिए, अध्ययन में एविडेंस मिला कि  SARS-CoV-2, रोगी वार्ड वेंट ओपनिंग तक फैल गया और इसके साथ-साथ वेंटिलेशन निकास फिल्टर में वायरल RNA का भी पता चला जो कि कम से कम 50 मीटर रोगी कक्ष वेंट ओपनिंग से दूरी पर था और यह एयरबोर्न ट्रांसमिशन को लेकर अधिक सबूत प्रदान करता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा की क्या यह एयरबोर्न ट्रांसमिशन है. ऐसा भी कहा जा सकता है कि एयरबोर्न ट्रांसमिशन का रिस्क हो सकता है. वायरस का फैलाव किन कारणों से हो रहा है इसे स्पष्ट करने और जानने के लिए अभी अधिक शोध की आवश्यकता है. इस पर अभी अध्ययन हो रहा है लेकिन मास्क का उपयोग करें, एहतियात बरते. 

आइये अंत में जानते हैं कि एयरबोर्न ट्रांसमिशन और ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन में क्या अंतर होता है?

कुछ अध्ययन के अनुसार एयरबोर्न वायसस लगभग 6-9 फीट तक दूरी तक फैल सकता है और बूंदें कुछ सतहों पर बस जाती हैं. बैक्टीरिया या वायरस कुछ मिनटों या कुछ घंटों के लिए सतहों पर जिंदा रह सकते हैं. अगर हम इस तरह की सतह को छूते हैं और फिर हमारे चेहरे / नाक / मुंह को छूते हैं, तो संभावना है कि यह हमारे श्वसन तंत्र में प्रवेश कर सकता है. 

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