Advertisement

अप्रैल फूल दिवस (मूर्ख दिवस) की शुरूआत कब और कहाँ हुई थी

“अप्रैल फूल दिवस” अर्थात् “मूर्ख दिवस” विश्वभर में 1 अप्रैल के दिन मनाया जाता हैl इस दिन लोग अपने मित्रों, पड़ोसियों और यहां तक कि अपने घर के सदस्यों से भी बड़े ही विचित्र प्रकार के हंसी-मजाक, मूर्खतापूर्ण कार्य और धोखे में डालने वाले उपहार देकर आनन्दित होते हैंl लेकिन क्या आपको पता है कि अप्रैल फूल दिवस की शुरूआत कब और कहाँ से हुई थी? इस लेख में हम “अप्रैल फूल दिवस” की शुरूआत एवं इस तिथि से जुड़े विभिन्न लोककथाओं का विवरण दे रहे हैंl
 
Image source: SendScraps.com

अप्रैल फूल दिवस की शुरूआत

अप्रैल फूल दिवस की शुरूआत के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभिन्न देशों में मुर्ख दिवस की शुरूआत के बारे में अलग-अलग अवधारणाएं प्रचलित हैं।
इनमें सबसे अधिक प्रचलित अवधारणा के मुताबिक प्राचीनकाल में रोमन लोग अप्रैल में अपने नए वर्ष की शुरूआत करते थे, तो वहीं मध्यकालीन यूरोप में 25 मार्च को नववर्ष के उपलक्ष्य में एक उत्सव भी मनाया जाता थाl लेकिन 1852 में पोप ग्रेगरी अष्ठम ने ग्रेगेरियन कैलेंडर (वर्तमान में मान्य कैलेंडर) की घोषणा की, जिसके आधार पर जनवरी से नए वर्ष की शुरुआत की गईl
फ्रांस द्वारा इस कैलेंडर को सबसे पहले स्वीकार किया गया थाl लेकिन जनश्रुति के अनुसार यूरोप के कई लोगों ने जहां इस कैलेंडर को स्वीकार नहीं किया था तो वहीं कई लोगों को इसके बारे में जानकारी ही नहीं थीl जिसके कारण नए कैलेंडर के आधार पर नववर्ष मनाने वाले लोग पुराने तरीके से अप्रैल में नववर्ष मनाने वाले लोगों को मूर्ख मनाने लगे और तभी से अप्रैल फूल या मूर्ख दिवस का प्रचलन बढ़ता चला गया।

जानें 26 दिसम्बर को बॉक्सिंग डे क्यों कहा जाता है?

अप्रैल फूल दिवस से जुड़ी लोककथाएँ

 
Image source: Kidzworld

1. बहुत समय पहले यूनान में “मोक्सर” नामक एक मजाकिया राजा थाl एक दिन उसने सपना देखा कि किसी चींटी ने उसे जिंदा निगल लिया हैl सुबह जब उसकी नींद टूटी तो वह अपने सपने को याद कर जोर-जोर से हंसने लगाl उसकी रानी ने जब उससे हंसने का कारण पूछा तो उसने बताया कि “रात में मैंने सपने में देखा कि एक चींटी ने मुझे ज़िन्दा निगल लिया है।“ यह सुनकर रानी भी हंसने लगीl तभी एक ज्योतिष ने राजा से आकर कहा कि इस सपने का अर्थ है “आज का दिन आप हंसी-मजाक व ठिठोली के साथ व्यतीत करेंl” उस दिन अप्रैल महीने की पहली तारीख थी। अतः उस दिन से हर वर्ष 1 अप्रैल को हंसी-मजाक से भरा दिन के रूप में मनाया जाने लगाl
2. एक अन्य लोक कथा के अनुसार एक अप्सरा ने किसान से दोस्ती की और कहा, “यदि तुम एक मटकी भर पानी एक ही सांस में पी जाओगे तो मैं तुम्हें वरदान दूंगीl” मेहनतकश किसान ने तुरंत पानी से भरा मटका उठाया और पी गयाl जब उसने वरदान वाली बात दोहराई तो अप्सरा बोली, “‘तुम बहुत भोल-भाले हो, आज से तुम्हें मैं यह वरदान देती हूं कि तुम अपनी चुटीली बातों द्वारा लोगों के बीच खूब हंसी-मजाक करोगेl” अप्सरा का वरदान पाकर किसान ने लोगों को बहुत हंसाया और हंसने-हंसाने के कारण हंसी के एक पर्व का जन्म हुआ जिसे हम मूर्ख दिवस के नाम से पुकारते हैंl
3. किसी समय स्पेन का राजा “माउन्टो बेर” थाl एक दिन उन्होंने घोषणा कराई कि जो सबसे सच्चा झूठ लिख कर लाएगा, उसे ईनाम दिया जाएगाl प्रतियोगिता के दिन राजा के पास “सच्चे झूठ” के हजारों खत पहुंचे, लेकिन राजा किसी के खत से संतुष्ट नहीं थाl अंत में एक लड़की ने आकर कहा “महाराज मैं गूंगी और अंधी हूँl” यह सुनकर राजा चकराया और पूछा  “तुम्हारे पास क्या सबूत है कि तुम सचमुच अंधी होl” तब उस लड़की ने बताया कि, “महल के सामने जो पेड़ लगा है, वह आपको तो दिखाई दे रहा है, लेकिन मुझे नहीं दिखाई दे रहा हैl” इस बात पर राजा खूब हंसा। उसने लड़की को झूठे मजाक का ईनाम दिया और प्रजा के बीच घोषणा करवाई कि अब हम हर वर्ष पहली अप्रैल को मूर्ख दिवस मनाएंगेl तब से आज तक यह परम्परा चली आ रही हैl
4. ईसा पूर्व एथेंस नगर में चार मित्र रहते थे। इनमें से एक अपने को बहुत बुद्धिमान समझता था और दूसरों को नीचा दिखाने में उसको बहुत मजा आता थाl एक बार तीनों मित्रों ने मिल कर एक चाल सोची और उस से कहा कि कल रात में एक अनोखा सपना दिखायी दिया। सपने में हमने देखा कि एक देवी हमारे समाने खड़ी होकर कह रही है कि कल रात पहाड़ी की चोटी पर एक दिव्य ज्योति प्रकट होगी और मनचाहा वरदान देगी, इसलिए तुम अपने सभी मित्रों के साथ वहाँ ज़रूर आनाl
अपने को बुद्धिमान समझने वाले उस मित्र ने उनकी बात पर विश्वास कर लियाl निश्चित समय पर वह पहाड़ की चोटी पर पहुँच गया साथ ही कुछ और लोग भी उसके साथ यह तमाशा देखने के लिए पहुँच गए और जिन्होंने यह बात बताई थी वह छिप कर सब तमाशा देख रहे थेl धीरे धीरे भीड़ बढ़ने लगी और आकाश में चन्द्रमा और तारे भी चमकने लगे पर उस दिव्य ज्योति के कहीं दर्शन नहीं हुए और न ही उनका कहीं नामों निशान दिखाl कहते हैं कि उस दिन 1 अप्रैल था और उस दिन के बाद से एथेंस में हर वर्ष मूर्ख बनाने की प्रथा चल पड़ीl बाद में धीरे धीरे दूसरे देशों ने भी इसको अपना लिया और अपने जानने वाले चिर-परिचितों को 1 अप्रैल को मूर्ख बनाने लगे। इस तरह मूर्ख दिवस का जन्म हुआ।

विश्व क्षयरोग (TB) दिवस की महत्ता और क्षय रोग (TB) से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

अप्रैल फूल दिवस के अवसर पर होने वाले कार्यक्रम


Image source: April Fool's Day Pranks

1. फ्रांस में “अप्रैल फूल दिवस” के अवसर पर मूर्खों, कवियों और व्यंग्यकारों का रोमांचक कार्यक्रम होता हैl यह कार्यक्रम 7 दिनों तक लगातार चलता है। इस मनोरंजक कार्यक्रम में भाग लेने वाले युवक को युवती की ड्रेस पहननी पड़ती है और मूर्ख बनने वाले व्यक्ति को ईनाम दिया जाता है।
2. चीन में फ्रांस में “अप्रैल फूल दिवस” के अवसर पर बैरंग पार्सल भेजने और मिठाई बांटने की परंपरा है। इस दिन यहाँ के बच्चे खूब हंसते हैं। यहाँ के लोग जंगली जानवर के मुखौटे पहनकर आने-जाने वाले लोगों को डराते हैं।
3. रोम में “अप्रैल फूल दिवस” के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम 7 दिनों तक चलता है और चीन की भांति बैरंग पार्सल भेज कर मूर्ख बनाया जाता है।
4. जापान में “अप्रैल फूल दिवस” पर बच्चे पतंग पर इनामी घोषणा लिख कर उड़ाते हैं और पतंग पकड़ कर इनाम मांगने वाला व्यक्ति “अप्रैल फूल” बन जाता हैl
5. इंग्लैंड में “अप्रैल फूल दिवस” के अवसर पर अत्यंत मनोरंजक एवं रोचक कार्यक्रम होते हैं। इस कार्यक्रम में मूर्खता भरे गीत गाकर लोगों को मूर्ख बनाया जाता है।
6. स्कॉटलैंड में “अप्रैल फूल दिवस” को “हंटिंग द कूल” के नाम से जाना जाता है। इस दिन “मुर्गा चुराना” यहाँ की विशेष परंपरा है। मुर्गे का मालिक भी इसका बुरा नहीं मानता हैl इसके अलावा नए-नए तरीके ढूंढ़ कर लोग एक-दूसरे को बेवकूफ बनाते हैं।
अर्थ आवर (Earth Hour) क्या है और यह हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण है

Advertisement

Related Categories

Advertisement