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जानें नीलामी के सिद्धांत के बारे में

जैसा की हम जानते हैं कि आर्थिक विज्ञान में 2020 का नोबेल पुरस्कार पॉल आर मिलग्रॉम (Paul R Milogram) और रॉबर्ट बी विल्सन (Robert B Wilson) को "नीलामी के सिद्धांत और नए नीलामी प्रारूपों के आविष्कारों में सुधार" ("for improvements to auction theory and inventions of new auction formats") के लिए दिया गया है. 

पॉल आर मिलग्रॉम, स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में मानविकी और विज्ञान के प्रोफेसर हैं और रॉबर्ट बी विल्सन स्टैनफोर्ड में प्रतिष्ठित प्रोफेसर एमेरिटस हैं. 

यहीं आपको बता दें कि इस पुरस्कार को आधारिक रूप से 'स्विरिजेस रिक्सबैंक प्राइज इन इकोनॉमिक साइंसेज इन मेमोरी ऑफ़ अल्फ्रेड नोबेल (The Sveriges Riksbank Prize in Economic Sciences in Memory of Alfred Nobel) के तौर पर जाना जाता है.

नोबेल समिति के अनुसार "उनकी खोजों ने दुनिया भर के विक्रेताओं, खरीदारों और करदाताओं को लाभान्वित किया है". नीलामी प्रारूपों का उपयोग रेडियो आवृत्तियों, मछली पकड़ने के कोटा और हवाई अड्डे के लैंडिंग स्लॉट को बेचने के लिए किया गया है.

पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा स्टॉकहोम में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज के महासचिव गोरान हैंसन (Goran K. Hansson) द्वारा की गई.

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आइये अब विस्तारपूर्वक नीलामी के सिद्धांत के बारे में अध्ययन करते हैं.

इस सिद्धांत में नीलामी के डिजाइन, नीलामी से संबंधित नियम, जो बोली लगाता है उसका व्यवहार एवं नीलामी के नतीजे के बारे में अध्ययन किया जाता है.

इसमें कोई संदेह नहीं कि नीलामी से ही किसी वास्तु के मूल्य कि खोज यानी डिस्कवरी होती है.

जब नीलामी की जाती है तो उसका नतीजा तीन कारकों पर निर्भर करता है जैसे 

1. नीलामी का नियम 

2. जो नीलाम होनी है यानी वस्तु एवं सेवाएं 

3. अनिशिचतता 

सबसे पहले नीलामी के नियम के बारे में अध्ययन करते हैं :

यह बोली लगाने वाले के व्यवहार को प्रभावित करता है जैसे अगर दो नीलामी में एक में खुली नीलामी और दूसरे में बंद सील में नीलामी का नियम हो तो दोनों के लिए जो बोली लगाएगा उस व्यक्ति का व्यवहार अलग-अलग होगा.

जो नीलाम होनी है यानी वस्तु एवं सेवाएं 

यह वास्तु और सेवाओं पर भी निर्भर करता है कि उसकी बोली कितनी लगेगी. ऐसा भी देखा गया है कि नीलामी में कुछ वस्तुओं का मूल्य लगाना आसान होता है अधिकतर तब ऐसा होता है जब समान प्रयोग या उपयोग के लिए किसी वस्तु का इस्तेमाल किया जाता है जैसे स्पेक्ट्रम की नीलामी में इसकी वैल्यू का अनुमान लगाना आसान हो जाता है क्योंकि सारी कंपनियों का मकसद अधिकतर एक जैसा ही होता है और इस वैल्यू को कॉमन वैल्यू (Common Value) कहा जाता है.

लेकिन किसी-किसी वस्तु कि नीलामी के लिए उसके मूल्य का अनुमान लगाना आसान नहीं होता है जैसे पेंटिंग की नीलामी. ऐसा भी हो सकता है कि यदि P व्यक्ति के लिए उस पेंटिंग की वैल्यू Q व्यक्ति से ज्यादा हो. इस प्रकार के वैल्यू को प्राइवेट या पर्सनल वैल्यू भी कहा जाता है.

इस प्रकार के वस्तु की नीलामी में मूल्य का अनुमान लगाना काफी मुश्किल है क्योंकि व्यक्ति पेंटिंग खरीदने के लिए ज्यादा भी मूल्य चुका सकता है.

जो व्यक्ति नीलामी में बोली लगाता है अक्सर वह अपनी कॉमन ओरे प्राइवेट वैल्यू को ध्यान में रखता है.

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आइये अब अनिशिचतता के बारे में अध्ययन करते हैं.

इससे मतलब है कि जो व्यक्ति बोली लगा रहा है नीलामी में उसके पास वस्तुओं से संबंधित सूचनाओं के बारे में अभाव या अनिशिचतता  हैं.

नीलामी के सिद्धांत में पॉल आर मिलग्रॉम (Paul R Milogram) और रॉबर्ट बी विल्सन (Robert B Wilson) का क्या योगदान है.

इन्होने नीलामी सिद्धांत पर महत्वपूर्ण कार्य किया है और साथ ही नीलामी प्रक्रिया की वर्तमान समझ के विकास का अधिकांश भाग का अध्ययन किया और यह उनके शोध का ही परिणाम है. रॉबर्ट बी विल्सन ने कॉमन वैल्यू के साथ वस्तुओं की नीलामी के सिद्धांत को विकसित किया.

साथ ही विल्सन ने विजेता का अभिशाप (Winner's curse) के बारे में बताया या व्याख्या करते हुए कहा कि यह कैसे बोली यानी bidding को प्रभावित करता है.

Winner's curse क्या है ?

यह एक नीलामी जीतने की प्रव्रति है. इसमें जो बोली लगाता है वह वस्तु के वास्तविक मूल्य से अधिक मूल्य लगाकर वस्तु को खरीद लेता है.

इस केस में जो व्यक्ति ज्यादा बोली लगाता है या ज्यादा कीमत बोलता है तो वह जीत जाता है परन्तु देखा जाए तो हकीकत में उसे नुक्सान या हानि होती है.

रॉबर्ट बी विल्सन ने यह भी बताया कि Winner's curse के कारण या इसके भय के कारण बोली लगाने वाले समझदार लोग Rational Bidders अपनी अनुमानित मूल्य या वैल्यू से भी कम पर बोली लगाते हैं.

दूसरी तरफ देखे तो पॉल आर मिलग्रॉम ने नीलामी के बारे में एक ऐसी जेनरल थ्योरी का विकास किया जो दोनों यानी कॉमन वैल्यू और प्राइवेट वैल्यू को भी स्वीकार करती है.

आगे पॉल आर मिलग्रॉम ने काफी सारे ऑक्शन फॉर्मेट में बोली की रणनीतियों का विश्लेषण करने के बाद बताया कि यदि बोली लगाने के समय पर बोली लगाने वाले एक-दूसरे की अनुमानित मूल्य का पता लगा लेते हैं तो विक्रेता को अधिक अनुमानित रेवेन्यु मिल जाता है या अधिक पैसा मिल जाता है.

अन्य तथ्य इस प्रकार हैं:

- अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 2019 अभिजीत बनर्जी, एस्थर डूफ्लो *Esther Duflo) और माइकल क्रेमर (Michael Kremer) को गरीबी उन्मूलन पर किये गए एक्सपेरिमेंटल कार्य  (“for their experimental approach to alleviating global poverty”) के लिए मिला था.

- अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में अर्थशास्त्र में Sveriges Riksbank पुरस्कार बैंक ऑफ स्वीडन द्वारा 1968 में स्थापित किया गया था, और इसे पहली बार 1969 में सम्मानित किया गया था.

- 1969 मं पहला अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार राग्नेर फ्रिस्च (Ragnar Frisch) और Jan Tinbergen को work in econometrics के लिए दिया गया था.

तो अब आप जान गए होंगे कि नीलामी के प्रारूप को डिज़ाइन करने के लिए तीन मुख्य कारकों को समझने की आवश्यकता होती है : पहला नीलामी के नियम, दूसरा नीलाम होने वाली वस्तु या सेवा की क़ीमत को आँकना और तीसरा कारक अनिश्चितता से सम्बंधित है.

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