1947 से अब तक भारत के मानचित्र में क्या-क्या बदलाव हुए

15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिलने के बाद देश की आंतरिक सीमाएं बदलती रहीं हैं। 2019 में जम्मू और कश्मीर राज्य को द्विभाजित करके दो नए केंद्र शासित प्रदेशों (UT) के निर्माण के साथ एक बार फिर भारत के मानचित्र में बदलाव देखा गया। हालांकि भारत की आंतरिक सीमाओं का सबसे बड़ा पुनर्गठन 1956 में हुआ था जब आधिकारिक राज्य पुनर्गठन अधिनियम लागू किया गया था।

जानें भारत का पहला मानचित्र किसने बनाया था

भारतीय क्षेत्र में रियासतों (Princely States) का समावेश

26 जनवरी 1950 तक भारत एक गणतत्र राष्ट्र बन गया था जिसमें कई छोटे राज्यों को मिला कर बड़े राज्य बनाए गए। इन राज्यों को तीन वर्गों में बांटा गया - पूर्व प्रांत (भाग ए), रियासतें (भाग बी), और केंद्र शासित क्षेत्र (भाग सी)। 

भाषा के आधार पर राज्यों का विभाजन 

1953 में मद्रास राज्य के तेलुगु भाषी क्षेत्रों के लिए एक आंध्र राज्य के निर्माण के बाद, राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) को भाषा के आधार पर गणतंत्र के पुनर्गठन का मूल्यांकन करने के लिए स्थापित किया गया था। 1956 में देश को 14 राज्यों और छह केंद्र शासित प्रदेशों में संगठित किया गया था। यह राष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़ा पुनर्गठन है। छह राज्यों और पांच केंद्र शासित प्रदेशों ने तब भी अपनी सीमाओं को वापस रखा। दिलचस्प बात यह है कि एसआरसी ने भाषा के आधार पर बंबई और पंजाब को विभाजित करने का विरोध किया था। हालांकि संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन और महागुजरात आंदोलन के विरोधों ने 1960 में बॉम्बे राज्य को दो भागों में विभाजित किया: महाराष्ट्र और गुजरात।

अकाली दल ने पंजाबी सूबा आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके कारण 1966 में पंजाबी-भाषी और सिख-बहुल पंजाब राज्य और हिंदी-भाषी और हिंदू-बहुल राज्य हरियाणा का निर्माण हुआ। पूर्ववर्ती पंजाब के पहाड़ी भागों को भी केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए तत्कालीन हिमाचल प्रदेश में मिला दिया गया था।

उत्तर पूर्वी राज्यों का विभाजन और सम्मिलन 

70 के दशक में उत्तर-पूर्वी सीमा के साथ-साथ राज्य की सीमाओं में कई बदलाव हुए जो उग्रवाद और हिंसा की आग को कम करने के लिए हुए। मणिपुर और त्रिपुरा को राज्य का दर्जा दिया गया और 1972 में मेघालय और केंद्र शासित प्रदेश मिज़ोरम को असम से अलग किया गया। तीन साल बाद, सिक्किम में आयोजित एक जनमत संग्रह ने एक राज्य के रूप में भारतीय संघ में शामिल होने के लिए मतदान किया। 

80 के दशक में दो और उत्तर-पूर्वी राज्यों का जन्म हुआ, जब मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश को 1987 में राज्य का दर्जा दिया गया। (वे पहले यूटी थे)

80 के दशक में हुए कई बड़े बदलाव 

1980 के दशक में, गोवा, दमन और दीव को अलग कर गोवा को राज्य और दमन और दीव को केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। सीमाओं के अगले बदलाव सहस्राब्दी के पहले वर्ष में हुए, जिसमें उत्तरांचल को उत्तर प्रदेश से, झारखंड को बिहार से और छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश से अलग कर नए राज्य बनाये गए। 

60 के दशक में राज्यों को भाषा के आधार पर अलग करने के विपरीत, इन राज्यों को लंबे समय से लंबित क्षेत्रीय मांगों और क्षेत्रीय विकास में असमानताओं को दूर करने के लिए बनाया गया था। तेलंगाना का गठन भी 2014 में ऐसी मांगों के आधार पर किया गया था।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का विभाजन 

जम्मू-कश्मीर राज्य को 2019 में विभाजित कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख - दो केंद्र शासित क्षेत्रों में बांटा गया है। इस नवीनतम बदलाव को विकास के आधार पर उचित ठहराया गया है। यह भारत की आंतरिक सीमाओं में परिवर्तन का अंत नहीं है। भारत में कई क्षेत्रों में पूर्ण राज्य के लिए आकांक्षा है, हालांकि मांग की तीव्रता क्षेत्रों में और समय के साथ बदलती है। केंद्र सरकार विभिन्न मापदंडों द्वारा तय करती है की कब और किस राज्य में सम्मिलन और विभाजन की आवश्यकता है। 

जानें भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों का नामकरण कैसे होता है?

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