क्रिकेट में अंपायरों द्वारा कौन-कौन से उपकरणों का प्रयोग किया जाता है?

जैसे जैसे तकनीकी विकास आगे बढ़ रहा है विभिन्न खेलों में प्रौद्योगिकी का उपयोग भी बढ़ रहा है. प्रौद्योगिकी के उपयोग ने मैच रेफरी और अंपायरों द्वारा लिए गए निर्णयों में सटीकता बढ़ाई है.
इस लेख में हमने एक मैच के दौरान क्रिकेट अंपायरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों के बारे में बताया है.

1. गिनती करने वाला काउंटर (The Counter)
इस उपकरण के आविष्कार से पहले अंपायर, एक ओवर में गेंदों को गिनने के लिए 6 सिक्कों, पत्थरों को अपने हाथ में रखा करता था.बॉलर द्वारा फेंकी गयी गेंदों की गिनती के लिए अंपायर,पत्थर को एक हाथ से दूसरे हाथ में स्थानांतरित करता था.

लेकिन अब तकनीकी के विकास से अंपायर इसकी जगह "काउंटर" का उपयोग करते हैं. इस उपकरण के प्रत्येक साइड पर विभिन्न बटन होते हैं और  जैसे ही एक गेंद फेंकी जाती है, एक ओवर समाप्त होता है और विकेट गिरता है तो अंपायर बटन दबाता है. ध्यान रहे कि ओवर, आउट और बॉल का बटन अलग-अलग होता है.

2. स्निक-ओ-मीटर (Snick-o-meter)

इस उपकरण का उपयोग तीसरे अंपायर द्वारा विकेट कीपर द्वारा विकेट के पीछे कैच (caught behind) की अपील पर सही निर्णय लेने के लिए किया जाता है.

अंपायर ,स्लो मोशन टेलीविज़न रिप्ले का उपयोग करते हुए यह निर्णय लेता है कि बॉल ने बल्ले को छुए या नहीं?

स्टंप के अंदर इस्तेमाल किए गए छोटे माइक की सहायता से अंपायर यह पता लगाता है कि बॉल ने किस चीज को टच किया है; बैट को, पैड को या जमीन को? यहाँ पर अंपायर स्निक-ओ-मीटर की सहायता से बनाये गए पैटर्न का विश्लेषण करके निर्णय लेता है.

यदि पैटर्न में एक ऊंची स्पाइक है, तो यह इंगित करता है कि गेंद बल्ले से टकराई है, अगर स्निक-ओ-मीटर, पैटर्न में एक मोटी स्पाइक दिखाता है तो इसका मतलब है कि गेंद पैड या जमीन पर लगी है.

3.  बॉल गेज (The Ball Gauge)

जब विस्फोटक बल्लेबाज जैसे एबी डिविलियर्स और क्रिस गेल बल्लेबाजी करते हैं तो अक्सर गेंद का आकार बिगड़ जाता है, वह चपटी सी हो जाती है या गोल नहीं रहती है. इसकी गोलाई का पता लगाने के लिए अंपायर, बॉल गेज का उपयोग करते हैं कि गेंद प्रयोग करने योग्य है या नहीं.

यदि बॉल गोल रिंग से बाहर नहीं निकलती है तो उसको खेलने के योग्य नहीं समझा जाता है और बदल दिया जाता है.

4. लाइट-ओ-मीटर (The Light-o-Meter)
यह उपकरण जमीन पर प्रकाश (लुमेन में) को मापता है. यह डिवाइस मुख्य रूप से टेस्ट मैचों में उपयोग किया जाता है.

यदि अंपायर को संदेह है कि जमीन पर पर्याप्त रोशनी नहीं है तो वह लाइट (ओ-मीटर) के माध्यम से मैदान (आमतौर पर पिच) और आउटफील्ड के बीच में प्रकाश को मापता है.

इस उपकरण ने कई टेस्ट मैचों में विवाद पैदा कर दिया है क्योंकि ऐसे कई मामले हैं जब मैच जीतने के लिए गेंदबाजी करने वाली टीम को अंतिम दिन सिर्फ एक विकेट की आवश्यकता होती है, लेकिन इस उपकरण के माध्यम से रोशनी मापने के कारण मैच को रोकना पड़ा और मैच ड्रा हो गया.

5. सुरक्षा कवच (The Protective shield)
यह डिवाइस अंपायर द्वारा पहनी जाने वाली नई डिवाइस में से एक है. इसका प्रयोग अंपायर किसी तेज शॉट से अपने आप को बचाने के लिए करता है. इसे अंपायर के हाथ पर बाँधा जाता है.यह पारदर्शी बनाया जाता है.

कई बार देखा गया है कि अंपायर तेज शॉट से घायल हो जाते हैं इसलिए इस सुरक्षा कवच की मदद से तेज शॉट से खुद का बचाव किया जा सकता है.

6. वाकी-टॉकी (Walkie-Talkie)

यह हमारे हाथों में एक मोबाइल फोन की तरह है. वॉकी टॉकी; (वाक करते हुए टॉक करना). ऑन-फील्ड अंपायरों द्वारा मैच रेफरी और थर्ड अंपायर के साथ बात-चीत में उपयोग किया जाता है. वॉकी-टॉकी की मदद से अंपायर स्टंप से जुड़े माइक्रोफोन से  आवाज सुनता है.

फील्ड अंपायर; तीसरे अंपायर से बाउंड्री लगने या किसी भी संदिग्ध कैच या रन आउट और स्टंपिंग जैसे किसी अन्य फैसले के बारे में पूछता है.

तो ये थे कुछ दिलचस्प उपकरण, जिनका उपयोग क्रिकेट अंपायर सही निर्णय लेने के लिए करते हैं, साथ ही तेज शॉट से खुद को बचाने के लिए भी किया जाता है.

उम्मीद है कि इस लेख से आपके सामान्य ज्ञान में काफी वृद्धि हुई होगी. ऐसे ही और लेख पढने के लिए नीचे लिंक पर क्लिक करें.

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