भारत का राष्ट्रीय जल मिशन क्या है?

जल प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। कहने को तो पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है लेकिन मात्र 2.5% पानी ही प्राकृतिक स्रोतों - नदी, तालाब, कुओं और बावडियों-से मिलता है जबकि आधा प्रतिशत भूजल भंडारण है। 97 प्रतिशत जल भंडारण तो समुद्र में है। लेकिन यह भी एक कडवी सच्चाई है कि भारत जल संकट वाले देशों की लाईन के मुहाने पर खड़ा है। जल के इसी महत्व के मद्देनजर भारत सरकार ने राष्ट्रीय जल मिशन की शुरुवात की है ताकि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरे से निपटा जा सके।

जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन का संभावित प्रभाव

भारतीये जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन का संभावित छः प्रभाव को सूचीबद्ध किया है जो नीचे दिए गए हैं:

1. हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियरों और बर्फ के क्षेत्र में कमी;

2. देश के अनेक भागों में वर्षा के दिनों की संख्या में समग्र कमी के कारण सूखे की स्थिति में वृद्धि;

3. वर्षा के दिनों की तीव्रता में भारी वृद्धि के कारण बाढ़ आने की घटनाओं में वृद्धि।

4. बाढ़ और सूखे की घटनाओं में वृद्धि के कारण कछारी एक्विफरों में भूमि-जल की गुणवत्ता पर प्रभाव

5. वृष्टिपात और वाष्पीकरण में बदलाव के कारण भूमि-जल पुनर्भरण पर प्रभाव;

6. समुद्र के बढ़ते जल स्तर के कारण तटीय तथा द्वीपीय एक्विफरों में लवणीयता का बढ़ना।

राष्ट्रीय जल मिशन की मुख्य विशेषताएं

1. राष्ट्रीय जल नीति की समीक्षा

2. जल संसाधनों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से संबंधित सभी पहलुओं पर अनुसंधान और अध्ययन जिसमें जल संसाधनों की गुणवत्ता के पहलू शामिल हैं

3. जल संसाधनों की परियोजनाओं के लिए विशेष रूप से बहुउद्देशीय परियोजनाओं के भंडारण पर तेजी से कार्यान्वयन

4. जल संरक्षण की पारंपरिक प्रणाली को बढ़ावा देना

5. अति-शोषित क्षेत्रों में भूजल पुनर्भरण के लिए गहन कार्यक्रम

6. अपशिष्ट जल सहित पानी के पुनर्चक्रण के लिए प्रोत्साहन

7. एकीकृत जल संसाधन विकास और प्रबंधन के सिद्धांत पर योजना

8. विभिन्न जल संसाधन कार्यक्रमों के बीच अभिसरण सुनिश्चित करना

9. पंचायती राज संस्थानों, शहरी स्थानीय निकायों और युवाओं के लिए गहन क्षमता निर्माण और जागरूकता कार्यक्रम

10. समस्या के आयामों पर अति शोषित क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों को संवेदनशील बनाना और जल संरक्षण की दिशा में नरेगा के तहत निवेश उन्मुख करना

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राष्ट्रीय जल मिशन के लक्ष्य

राष्ट्रीय जल मिशन के तहत भारत सरकार ने पांच लक्ष्य प्रतिष्ठापित किया है जिसकी चर्चा नीचे किया गया हैं:

1. सार्वजनिक डोमेन में व्यापक जल डेटा बेस और जल संसाधन पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का आकलन,

2. जल संरक्षण, संवर्द्धन और संरक्षण के लिए नागरिक और राज्य कार्यों को बढ़ावा देना

3. अति-शोषित क्षेत्रों सहित संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना

4. 20% से जल उपयोग दक्षता में वृद्धि करना

5. बेसिन स्तर के एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देना

राष्ट्रीय जल मिशन का उद्देश्य

1. पानी के संरक्षण पर जोर देना

2. पानी के अपव्यय को कम करना

3. एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन के माध्यम से पूरे देश और राज्यों में समान वितरण सुनिश्चित करना

राष्ट्रीय जल मिशन ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से निपटने के लिए अच्छी तरह से तैयार किया गया दस्तावेज़ है, जिसके

ग्लोबल वार्मिंग के कारण वर्षा, बर्फ पिघल और पानी की उपलब्धता में लौकिक और स्थानिक भिन्नता की तीव्रता को कम करने के लिए और उसके प्रभावों से निपटने के लिए राष्ट्रीय जल मिशन एक अच्छी तरह से तैयार किया गया दस्तावेज़ है।

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