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जानें E20 Fuel के बारे में

हाल ही में, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन (draft notification) GSR 757(E) प्रकाशित कर ई20 ईंधन (E20 Fuel) अपनाए जाने पर और इससे होने वाले उत्सर्जन मानकों पर जन प्रतिक्रिया आमंत्रित की है. 

सरकार परिवहन आवेदन के लिए इस ईंधन के लिए बड़े पैमाने पर उत्सर्जन मानकों को अपना रही है. इसके अतिरिक्त, यह E20 वाहनों के विकास को सुविधाजनक बनाने की भी इच्छा रखता है. सरकार का मानना है कि  E20 मिश्रण से न केवल वाहन उत्सर्जन पर अंकुश लगेगा बल्कि देश के तेल आयात बिल को कम करने में भी मदद मिलेगी.

E20 fuel क्या है?

E20, गैसोलीन (पेट्रोल) के साथ 20% इथेनॉल (Ethanol) का मिश्रण है और वर्तमान में उपलब्ध ईंधन के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. सम्मिश्रण का वर्तमान अनुमन्य स्तर इथेनॉल का 10% है, हालांकि भारत 2019 में सम्मिश्रण का केवल 5.6% तक पहुंचा था.

वाहन की अनुकूलता (Vehicle compatibility)

इथेनॉल और गैसोलीन के मिश्रण में इथेनॉल के प्रतिशत के लिए वाहन की अनुकूलता को वाहन निर्माता द्वारा परिभाषित किया जाएगा और वही वाहन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला स्टिकर लगाकर प्रदर्शित किया जाएगा.

E20 fuel का महत्व 

यह कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन इत्यादि के उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगा. साथ ही यह तेल आयात बिल को कम करने में मदद करेगा, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ेगी.

जैव ईंधन या Biofuel किसे कहते हैं?

जैव ईंधन (Biofuel) को हरा ईंधन (Green fuel) के रूप में भी जाना जाता है. यह एक प्रकार का ईंधन है जो पौधों और जानवरों की सामग्री से डिसटिल (Distilled) होता है, कुछ लोगों द्वारा माना जाता है कि व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले जीवाश्म ईंधन की तुलना में अधिक पर्यावरण के अनुकूल है जो कि दुनिया में सबसे अधिक पॉवर देते हैं.

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है:

जैव ईंधन, कोई भी ईंधन जो बायोमास से प्राप्त होता है - यानी, पौधे या शैवाल सामग्री या पशु अपशिष्ट. चूंकि इस तरह के फीडस्टॉक सामग्री को आसानी से फिर से बनाया जा सकता है, इसलिए जैव ईंधन को पेट्रोलियम, कोयला और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन के विपरीत, अक्षय ऊर्जा (Renewable energy) का एक स्रोत माना जाता है. आमतौर पर जैव ईंधन को पेट्रोलियम और अन्य जीवाश्म ईंधन के लिए एक लागत प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में माना जाता है.

जैव ईंधन या Biofuel के प्रकार 

अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विपरीत, बायोमास को सीधे तरल ईंधन में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसे परिवहन ईंधन की जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए "जैव ईंधन" कहा जाता है. आज उपयोग में आने वाले दो सबसे आम प्रकार के जैव ईंधन इथेनॉल और बायोडीजल हैं, जो दोनों जैव ईंधन प्रौद्योगिकी की पहली पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं.

1. बायोगैस (Biogas)

यह जानवरों और मनुष्यों के सीवेज जैसे कार्बनिक पदार्थों के अवायवीय अपघटन द्वारा निर्मित होता है. बायोगैस का प्रमुख अनुपात मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड है, हालांकि इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड, हाइड्रोजन, कार्बन मोनोऑक्साइड और siloxanes के कुछ कम अनुपात भी होते हैं. यह आमतौर पर हीटिंग, बिजली और ऑटोमोबाइल के लिए उपयोग किया जाता है.

2. बायोइथेनॉल (Bioethanol)

इथेनॉल (CH3CH2OH) एक अक्षय ईंधन है जिसे विभिन्न संयंत्र सामग्रियों से बनाया जा सकता है, जिसे सामूहिक रूप से "बायोमास" के रूप में जाना जाता है. इथेनॉल एक अल्कोहल है जिसका उपयोग गैसोलीन के सम्मिश्रण के रूप में किया जाता है ताकि ऑक्टेन को बढ़ाया जा सके और कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य स्मॉग पैदा करने वाले उत्सर्जन में कटौती की जा सके.

बायोमास को इथेनॉल में परिवर्तित करने की सामान्य विधि को किण्वन (Fermentation) कहा जाता है. किण्वन के दौरान, सूक्ष्मजीव (जैसे, बैक्टीरिया और खमीर) पादप शर्करा को चयापचय करते हैं और इथेनॉल का उत्पादन करते हैं.
यानी किण्वन प्रक्रिया (fermentation process) का उपयोग करके मकई और गन्ने से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है. एक लीटर इथेनॉल में लगभग दो तिहाई ऊर्जा होती है जो एक लीटर पेट्रोल द्वारा प्रदान की जाती है. पेट्रोल के साथ मिश्रित होने पर, यह दहन प्रक्रिया में सुधार करती है और कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करती है.  

3. बायोडीजल (Biodiesel)

यह सोयाबीन तेल या ताड़ के तेल, वनस्पति अपशिष्ट तेलों और पशु वसा जैसे वनस्पति तेलों से प्राप्त होता है, जिसे "ट्रांसएस्टेरीफीकेशन" (Transesterification) कहा जाता है. यह डीजल की तुलना में बहुत कम या हानिकारक गैसों की मात्रा पैदा करता है.

4. बायोब्यूटेनॉल (Biobutanol)

यह उसी तरह से उत्पादित किया जाता है जैसे कि बायोएथेनॉल यानी स्टार्च के किण्वन के माध्यम से. ब्यूटेनॉल में ऊर्जा अन्य गैसोलीन विकल्पों में सबसे अधिक है. उत्सर्जन को कम करने के लिए इसे डीजल में ऐड किया जा सकता है. यह कपड़ा उद्योग में एक विलायक के रूप में कार्य करता है और परफ्यूम में बेस के रूप में भी उपयोग किया जाता है.

5. बायोहाइड्रोजन (Biohydrogen)

बायोहाइड्रोजन, जैसे बायोगैस, को कई प्रक्रियाओं जैसे कि पायरोलिसिस (Pyrolysis), गैसीकरण (Gasification) या जैविक किण्वन (Biological fermentation) का उपयोग करके उत्पादित किया जा सकता है. यह जीवाश्म ईंधन के लिए सही विकल्प हो सकता है.

जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए क्या-क्या पहल की जा रही हैं?

- जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 (National Policy on Biofuels, 2018)

नीति तीन श्रेणियों के तहत उपयुक्त वित्तीय और राजकोषीय प्रोत्साहन के विस्तार को सक्षम करने के लिए जैव ईंधन को "मूल जैव ईंधन" (Basic Biofuels) के रूप में वर्गीकृत करती है:

फर्स्ट जनरेशन (1G) इथेनॉल और बायोडीजल और "उन्नत जैव ईंधन" (Advanced Biofuels)

दूसरी जनरेशन (2G) इथेनॉल, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट ( Municipal Solid Waste, MSW) ड्रॉप-इन ईंधन के लिए.

तीसरी जनरेशन (3 G) जैव ईंधन, bio-CNG इत्यादि.

- प्रधानमंत्री 'जी-वन' योजना, 2019

योजना का उद्देश्य व्यावसायिक परियोजनाओं की स्थापना के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना और 2G इथेनॉल क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना है.

- इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol, EBP) कार्यक्रम

 मक्का, ज्वार, बाजरा फल और सब्जी के waste जैसे खाद्यान्न की अधिशेष मात्रा से ईंधन निकालने के लिए.

- GOBAR (Galvanizing Organic Bio-Agro Resources) DHAN योजना, 2018

इसे स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत लॉन्च किया गया था. यह खेतों में मवेशियों के गोबर और ठोस कचरे को उपयोगी खाद, बायोगैस और जैव-CNG के प्रबंधन और परिवर्तित करने पर केंद्रित है, इस प्रकार यह गांवों को साफ रखता है और ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि भी होती है.

- Repurpose Used Cooking Oil (RUCO)

यह भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा लॉन्च किया गया था और इसका उद्देश्य एक ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए है जो इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल के संग्रह और रूपांतरण को बायोडीजल में सक्षम बनाएगा.

ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि भारत एक बड़ी कृषि अर्थव्यवस्था होने के कारण, बड़ी मात्रा में कृषि अवशेष उपलब्ध हैं, इसलिए देश में जैव ईंधन के उत्पादन की गुंजाइश बहुत अधिक है. जैव ईंधन नई नकदी फसलों के रूप में ग्रामीण और कृषि विकास में मदद कर सकता है. एक अच्छी तरह से डिजाइन और कार्यान्वित जैव ईंधन समाधान भोजन और ऊर्जा दोनों प्रदान कर सकता है.

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