PMC Bank घोटाला: बैंक घोटाले का पूर्ण विवरण

वर्तमान में भारतीय बैंकिंग प्रणाली कठिन समय से गुजर रही है. बैंकिंग सेक्टर में नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) 8 लाख करोड़ के आस पास है. इस कठिन समय में पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक में एक घोटाले का मामला सामने आया है. आइये जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और इसे किस तरह से अंजाम दिया गया है?

पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (PMC) बैंक के बारे में (About the Punjab & Maharashtra Cooperative (PMC) Bank)

पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी (PMC) बैंक की स्थापना 13 फरवरी, 1984 को एकल शाखा सहकारी बैंक के रूप में की गई थी. यह बैंक एक बहु-राज्य, अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक है, जिसकी शाखाएं देश के 6 राज्यों; महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में है. इसकी सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 35 वर्षों के कार्यकाल में इसकी शाखाओं की संख्या 137 तक पहुँच गयी है. PMC के पास कुल 1814 कर्मचारी हैं और यह बैंक देश के टॉप 10 सहकारी बैंकों में गिना जाता है.
अपनी स्थापना के समय पीएमसी एक सहकारी बैंक था लेकिन 2000 में इसे भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा अनुसूची वाणिज्यिक बैंक का दर्जा दिया गया था. पीएमसी बैंक अनुसूचित बैंक का दर्जा हासिल करने वाला सबसे युवा बैंक है.

PMC बैंक स्कैम कैसे हुआ था? (How PMC Bank scam taken place)

पुलिस जांच में पाया गया है कि इस बैंक में 21049 खाते फर्जी खाते खोले गए थे जिनमें से अधिकतर लोग या तो मृत थे या फिर इन लोगों ने इस बैंक में अपने खाते बंद करवा दिए थे. ये 21049 खाते कोर बैंकिंग सिस्टम (Core Banking System) में नहीं बनाए गए थे बल्कि इन्हें एडवांस मास्टर इंटेंड एंट्री के रूप में आरबीआई के सामने पेश किया गया था. 

PMC बैंक के बड़े अधिकारियों ने PMC बैंक द्वारा दिए गए कुल लोन का लगभग 70% लोन एक कंपनी हाउिसंग डेवलपमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर (HDIL) और इसकी सहायक कंपनियों को दिया था. HDIL और उसकी सहायक कंपनियों ने लोन की राशि छुपाने के लिए 44 लोन अकाउंट खोले थे जिनमें यह लोन की राशि ट्रान्सफर की गयी थी. अगर मैं बैंक घोटाले की कुल राशि की बात करूं तो यह लगभग 4,355 करोड़ रुपये बतायी जा रही है. 

इस बैंक घोटाले का पर्दाफाश पीएमसी बैंक के क्रेडिट विभाग की महिला कर्मचारियों के एक समूह ने किया है. इन कर्मचारियों ने RBI को बताया कि उन्हें इन फर्जी खतों की जानकारी थी.  यह मामला तब प्रकाश में आया जब HDIL समय पर लोन नहीं चुका पाया और बैंक का NPA 70% तक पहुँच गया. खाता धारकों में उनका जमा पैसा मिलने में दिक्कत होने लगी.

बैंक से पैसा ना मिलने की खबर आग की तरह ग्राहकों में फैली और पीएमसी बैंक के ग्राहक अपनी गाढ़ी कमाई को वापस लेने के लिए पीएमसी बैंक पहुंचे, लेकिन उन्हें अपने जमा किए गए पैसे देने से मना कर दिया गया और बैंक द्वारा निकासी की सीमा निर्धारित कर दी गई है.

अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एचडीआईएल समूह की 3,500 करोड़ रुपये की संपत्ति को सील कर दिया है और एचडीआईएल के प्रमुख राकेश वधावन और उनके बेटे सारंग वधावन को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है.

ध्यान रहे की इस घोटाले से पहले देश में विजय माल्या का मामला, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के मामले पहले ही देश में बैंकिंग सिस्टम को कमजोर कर चुके हैं.
अब यह समय की जरूरत है कि केंद्र सरकार को देश में इस तरह के बैंकिंग धोखाधड़ी को रोकने के लिए कुछ सख्त नीतियां बनाने की जरूरत है. इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कार्य 
भारतीय बैंकों के कामकाज में राजनीतिक हस्तक्षेप को प्रतिबंधित करना होना चाहिए.

 

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