मैराथन दौड़ का इतिहास क्या है और यह कितने किमी. की होती है?

एक समय था जब माता पिता अपने बच्चों को बोलते थे कि;

खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब !

पढोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब !!

लेकिन इस समय यह कहाबत लगभग उल्टी हो गयी है. अब बच्चे खेल को करियर की तरह लेते हैं. ऐसा ही एक बहुत पोपुलर खेल है मैराथन दौड़. आइये इस लेख में मैराथन दौड़ के इतिहास के बारे में जानते हैं.

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मैराथन का इतिहास;

मैराथन दौड़ का इतिहास 490 ईस्वी पूर्व शुरू हुआ था. दरअसल यूनान के एथेंस नगर से 26 मील दूर मैराथन के मैदान में यूनानी और पर्सियन/फारसी सैनिकों के बीच युद्ध हुआ था. इसमें लगभग 10 हजार यूनानी सैनिकों ने एक लाख फारसी सैनिकों को अपनी मातृभूमि की रक्षा के युद्ध में हरा दिया था. यह खबर निश्चित रूप से यूनानी सैनिकों के लिए बहुत ही बड़ी थी. इसलिए इस खुशखबरी को अपने देशवासियों को सुनाने के लिए यूनान का 'फिडिपीडेस' नाम का सैनिक युद्ध क्षेत्र से लगभग 26 मील तक बिना रुके दौड़ता हुआ एथेंस पहुंचा था.

वह इस जीत से इतना खुश था कि उसने भागने के लिए अपने शस्त्र और कवच भी उतार दिए थे. वह युद्ध से बेहद थका था फिर भी जंगलो, कटीली झाड़ियों और पहाड़ो वाले रास्ते में बिना कहीं रुके भागता ही रहा था.

जब उसने एथेंस नगर में प्रवेश किया तो उसके पैर लहुलुहान हो चुके थे. उसकी साँस उखड़ रही थी. उसने अपने देशवासियों को बोला "निक्की" अर्थात युद्ध में उसके देश की विजय हुई है, 'देशवासियों हम युद्ध जीत गये खुशियाँ मनाओ'. इस खबर को सुनाने के बाद ही उसकी मौत हो गयी थी.

मैराथन दौड़ की दूरी;

'फिडिपीडेस' नमक धावक की याद में मैराथन दौड़ को ओलिंपिक खेलों में शामिल किया गया था. ज्ञातव्य है कि पहले ओलिंपिक खेल यूनान में 1896 से शुरू हुए थे. इस रेस की दूरी 26 मील, 385 यार्ड्स वर्ष अर्थात लगभग 42.195 किलोमीटर होती है. यह भी बता दें कि मैराथन दौड़ की दूरी 26 मील रखने का कारण यह है कि मैराथन तथा एथेंस की दूरी भी लगभग इतनी ही थी.

मैराथन दौड़ की दूरी मौजूदा दूरी 26 मील, 385 यार्ड्स वर्ष 1908 में लंदन में तय गई थी. इसकी वजह ये थी कि ब्रिटेन का शाही परिवार चाहता था कि यह दौड़ ‘विंडसर कैसल’ से शुरू हो और व्हाइट सिटी स्टेडियम आकर खत्म हो.

मैराथन दौड़ में पुरुष तो 1896 से ही हिस्सा लेते आ रहे हैं लेकिन महिलाओं की पहली मैराथन दौड़ वर्ष 1984 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में आयोजित की गई थी जहां अमरीकी धावक जोन बेनोइट ने पहला स्वर्ण पदक जीता था.

वर्तमान में केन्या के ‘एलिउड किपचोगे’ पुरुषों के मैराथन के ओलिंपिक चैंपियन हैं और महिलाओं की ओलिंपिक चैंपियन केन्या की जेमिमा जेलाबेट हैं.

इस लेख को पढ़ने के बाद हमें पता चला कि मैराथन रेस शुरू होने के पीछे कितनी दिलचस्प कहानी थी. यहाँ से यह बात भी सिद्ध हो जाती है कि किसी भी काम को करने के लिए व्यक्ति में जुनून होना कितना जरूरी होता है.

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