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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शहरों का चयन किस प्रक्रिया द्वारा किया जाता है?

एक समय था जब भारत को सपेरों और भिखारियों के देश के रूप में जाना जाता था लेकिन अब हालात बदल गए हैं और भारत दुनिया की 6 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. हालाँकि कुछ क्षेत्र अभी भी सरकार के लिए चिंता का कारण हैं.

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार; भारत में स्लम आबादी शहरी आबादी की 17.36% थी. अब सरकार गरीबी और मलिन बस्तियों के चंगुल से अधिक से अधिक लोगों को बाहर निकालने की कोशिश कर रही है.  इसलिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का शुभारंभ इस दिशा में एक अच्छा कदम है.

शुरुआत होने की तारीख:
स्मार्ट सिटीज मिशन (एससीएम); भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 25 जून, 2015 को शुरू किया गया था.

स्मार्ट सिटीज मिशन का उद्येश्य

स्मार्ट सिटीज मिशन (SCM) भारत में 100 शहरों के निर्माण के लिए एक शहरी विकास कार्यक्रम है.

स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य ऐसे शहरों को बढ़ावा देने का है जो मूल बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराएँ, अपने नागरिकों को एक सभ्य गुणवत्तापूर्ण जीवन प्रदान करे और एक स्वच्छ और टिकाऊ पर्यावरण एवं 'स्मार्ट' तरीके से संसाधनों का प्रयोग करें.

अर्थात स्मार्ट सिटी मिशन स्थानीय विकास को सक्षम करने और प्रौद्योगिकी की मदद से नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए बनाया गया है.

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स्मार्ट सिटी मिशन का खर्च:

स्मार्ट सिटी मिशन एक केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित किया जा रहा है और केंद्र सरकार द्वारा मिशन को पांच साल में करीब प्रति वर्ष प्रति शहर 100 करोड़ रुपये औसत वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव है.

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत दिसम्बर 2018 तक; 2,05,018 करोड़ रुपए के 5000 से ज्यादा स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की शुरुआत और कार्यान्वयन किया जा चुका है.

केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा 2017-2022 के बीच शहरों को वित्तीय सहायता दी जाएगी, और उम्मीद है कि मिशन 2022 से परिणाम दिखाना शुरू कर देगा.

स्मार्ट शहरों का चयन करने के लिए मानदंड:

पहला चरण:
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का चयन 2 दौर की चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है.  पहले दौर में राज्य / संघ राज्य क्षेत्रों के संभावित स्मार्ट शहरों को स्कोरिंग मानदंडों के आधार पर चुना जाता है. इसमें यह देखा जाता है कि किस शहर में कितनी सुविधाएँ और कितनी जनसँख्या है.

इस चरण में एक प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच में ही प्रतियोगिता होती है और जो शहर इस चरण में चुने जाते हैं उनको दूसरे चरण के लिए भेजा जाता है.

दूसरा चरण:

दूसरे दौर में शहरी विकास मंत्रालय शहरों का चयन करता है. इस दौर में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता संभावित 100 स्मार्ट शहरों के बीच होती है.

इस चरण में प्रत्येक शहर अपना स्मार्ट सिटी प्रस्ताव (एससीपी) प्रस्तुत करता है जिसमें यह जानकारी होती है कि किस वह शहर किस तरह का विकास मॉडल चुनेगा? यह मॉडल रेट्रोफिटिंग या पुनर्विकास या ग्रीनफील्ड विकास या इसके मिश्रण से बनाया जायेगा. इसके अलावा शहरों को यह भी बताना होता है कि वह अपने शहर में मौजूद समस्याओं को कैसे ख़त्म करेगा.

सभी स्मार्ट सिटी प्रस्ताव का मूल्यांकन एक समिति द्वारा किया जाएगा जिसमें अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय विशेषज्ञों, संगठनों और संस्थानों का एक पैनल शामिल होगा. इस दौर में जिस शहर का चयन होगा उसकी घोषणा शहरी विकास मंत्रालय द्वारा की जाती है.

ज्ञातव्य है कि अब तक चार चरणों में 100 स्मार्ट शहरों का चयन किया जा चुका है. स्मार्ट सिटी मिशन में तमिलनाडु के सबसे अधिक 12 शहर चुने जा चुके हैं इसके बाद उत्तर प्रदेश के 11 शहर हैं लेकिन आश्चर्यजनक है कि जम्मू और कश्मीर का कोई भी शहर आज तक इस परियोजना में नहीं चुना गया है.

स्मार्ट शहरों में निम्न सुविधाएँ मिलेगीं;

1. निश्चित विद्युत आपूर्ति

2. पर्याप्त पानी की आपूर्ति

3. बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएँ

4. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता

5. कुशल सार्वजनिक परिवहन सुविधाएँ

6. गरीबों और अन्य के लिए किफायती आवास

7. सुदृढ़ सूचना कनेक्टिविटी और डिजिटलीकरण

8.सुशासन, विशेष रूप से ई-गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी

9.टिकाऊ पर्यावरण

10. नागरिकों की सुरक्षा और संरक्षा, विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा

केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजना का शुभारंभ इस देश की आम जनता को बेहतर जीवन शैली और सुविधाएं प्रदान करने की दिशा में एक ठोस कदम है. इस परियोजना की सबसे आकर्षक विशेषता यह है कि यह देश के समग्र विकास को बढ़ावा दे रही है और आशा है कि बहुत जल्द इस योजना के सकारात्मक परिणाम आम लोगों के जीवन में दिखाई देंगे.

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