अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) अपने सदस्य देशों को लोन कैसे देता है?

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक (IBRD) की स्थापना जुलाई 1944 में ब्रेटनवुड्स, न्यू हैम्पशायर, अमेरिका में आयोजित 44 देशों के सम्मेलन में की गयी थी. भारत इस संगठन का संस्थापक सदस्य है.

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और आईबीआरडी की स्थापना एक ही समय और जगह पर हुई थी; इस कारण इन दोनों को ‘ब्रेटनवुड्स ट्विन्स’ के रूप में जाना जाता है.

विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights) के बारे में;

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष अपने सदस्य देशों के प्रतिकूल संतुलन को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों को आर्थिक सहायता प्रदान करता है. विश्व में अंतर्राष्ट्ररीय नकदी की समस्या को दूर करने के लिए इसने विशेष आहरण अधिकार (Special Drawing Rights) की शुरुआत 1971 में की थी.

वर्तमान में IMF का कुल सदस्य कोटा: SDR- 477 बिलियन (US$- 692 बिलियन) है जबकि इसने अपने सदस्य देशों को 204 अरब SDR या (US$-296 बिलियन) बाँट दिए हैं.

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वर्तमान में IMF में भारतीय कोटा 2.76% (SDR कोटा) है. संयुक्त राज्य अमेरिका का कोटा सबसे अधिक 17.46% का सबसे बड़ा कोटा है जिसके बाद जापान (6.48%) और चीन (6.41%) का नंबर आता है.

यहाँ पर यह बताना जरूरी है कि SDR का मूल्य 5 मुद्राओं की टोकरी द्वारा निर्धारित किया जाता है. इसमें शामिल मुद्राएँ हैं; यूएस डॉलर, यूरो, जापानी येन, चीनी युआन और पाउंड स्टर्लिंग.

चीनी युआन को अक्टूबर 2016 में SDR टोकरी में 5वीं मुद्रा के रूप में शामिल किया गया था.

SDR का मूल्य निर्धारित करने में सबसे अधिक भार (वेटेज) अमेरिकी डॉलर (41.73%) का है, इसके बाद यूरो (30.93%) का नम्बर आता है.

SDR इंटरनेशनल लेखा और भुगतान की इकाई है. SDR ना तो इंटरनेशनल करेंसी है और ना ही स्वीकृत अर्थ में अंतरराष्ट्रीय साख सुविधा.

SDR एक ऐसी रिज़र्व मुद्रा है जिसके द्वारा IMF का सदस्य देश विदेशी भुगतानों के लिए अन्य सदस्य देशों से अपने कोटे के SDR के बदले में विदेशी मुद्राएँ प्राप्त कर अपने ऋणों या भुगतानों का निपटान कर देता है.

जिन सदस्य देशों को SDR का अधिकार दिया जाता है वे अन्य सदस्य देशों से निश्चित मुद्रा प्राप्त कर सकते हैं. इसका आवंटन कोष और सदस्य देशों के निर्णय के अनुसार लिया जाता है.

SDR के सृजन के पीछे मूल भावना यह है कि मुद्रा कोष के सभी सदस्यों को अधिक साधन उपलब्ध हो सकें ताकि वे कोष के साधनों पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना अपनी विदेशी विनिमय की कठिनाई को दूर कर सकें जिससे कि अंतरराष्ट्रीय तरलता की समस्या का समाधान हो सके.

SDR के माध्यम से IMF लोन कैसे देता है?

जिस देश को परिवर्तनशील विदेशी विनिमय के लिए इंटरनेशनल करेंसी की जरुरत होती है और उसे लोन सस्ती दरों पर किसी देश से नहीं मिलता है तो वह IMF के पास SDR के लिए आवेदन करता है. इस दशा में सदस्य देश का जितना कोटा IMF में होता है उसको उसके अनुसार SDR का आवंटन कर दिया जाता है.

आवेदन प्राप्त होने पर मुद्रा कोष ऐसे देश को जिसका भुगतान संतुलन और रिज़र्व की मात्रा अधिक होती है इस आवेदक देश की विनिमय आवश्यकता की पूर्ती करने को कहता है अर्थात SDR देने के लिए कहता है. इस देश को अधिकृत देश कहा जाता है.

आवेदक देश, अधिकृत देश से अपने SDR कोटे की अधिकतम सीमा की दुगुनी मात्रा तक SDR ले सकता है. इस प्रकार आवेदक देश SDR के माध्यम से अपनी विनिमय जरूरतों को पूरा कर सकता है. अर्थात आवेदक देश को जिन देशों को विदेशी मुद्रा में भुगतान करना होता है वह अधिकृत देश के द्वारा कर दिया जाता है.

ध्यान रहे कि जो देश SDR का प्रयोग करेगा उसका SDR कोटा कम हो जायेगा और जो देश SDR के बदले विदेशी विनिमय प्रदान करते हैं उनके SDR कोटा संग्रह में वृद्धि होती है. ध्यान रहे कि आवेदक देशों को SDR की इशू की गयी मात्रा पर साधारण ब्याज देना पड़ता है. यह ब्याज दर बहुत ही कम लगभग 2% से कम होती है.

सारांश के तौर यह कहा जा सकता है कि SDR ने इंटरनेशनल लेवल पर तरलता की समस्या को ख़त्म कर दिया है है साथ ही इसने लेन देन के लिए स्वर्ण को भी रिप्लेस कर दिया है.

उम्मीद है कि इस लेख को पढ़ने के बाद आपको स्पष्ट रूप से समझ आ गया होगा कि IMF अपने सदस्य देशों को किस तरह SDR की सहायता से लोन देता है.

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