रासायनिक अभिक्रियाएं कितने प्रकार की होती हैं

रसायनिक अभिक्रियाओं में अणुओं के बीच बंध का बनने और टूटने से नए पदार्थ का निर्माण होता है. यू कहें तो इसमें पुराने आबन्ध टूटते हैं और नये आबन्ध बनते हैं. अभिक्रिया करने के लिए सबसे पहले ऊर्जा की आवश्यकता होती है. ऊर्जा किसी भी रूप में दी जा सकती है जैसे ऊष्मा, प्रकाश, विद्युत अथवा अभिकर्मक के अणुओं के बीच पर्याप्त संपर्क बनाने के लिए उन्हें हिलाकर यांत्रिक ऊर्जा में जब रासायनिक अभिक्रियाएं होती हैं, तो परमाणुओं की पुनर्व्यवस्था विविध प्रकार से हो सकती है. जैसे जल के अणुओं के टूटने से ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन उत्पन्न होता है जबकि कार्बन और ऑक्सीजन के बीच बंध बनने से कार्बन डाइऑक्साइड प्राप्त होता है.
क्या आप जानते हैं कि दैनिक जीवन में भी रासायनिक अभिक्रियाएँ होती है जैसे भोजन का पाचन, दूध का दही बनना, फलों का पकना, शराब बनाने के लिए अंगूरों का किण्वन आदि. यहां तक कि सांस द्वारा भी हम कोशिकाओं में उपस्थित अणुओं तथा वायु की ऑक्सीजन में परस्पर अभिक्रिया के लिए आवश्यक परिस्थिति प्रदान करते हैं. रसायनिक अभिक्रियाएँ पांच प्रकार की होती हैं, आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते है.
रसायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार
1. संयोजन अभिक्रिया (Combination Reaction)
जिस अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकार्कों से एक एकल उत्पाद का निर्माण होता है उसे संयोजन अभिक्रिया कहते है.
A+B → AB
उदाहरण: दीवारों पर चूने से सफेदी करना. चूने को जब पानी में डाला जाता है, तो बुझा हुआ चूना बनता है यानी कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (calcium hydroxide) और कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड वायु में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) के साथ धीरे-धीरे अभिक्रिया करके दीवारों पर कैल्शियम कार्बोनेट (calcium carbonate) की पतली परत बना देता है.

CaO + H 2O → Ca(OH)2

चूना + जल → बुझा हुआ चूना अथवा कैल्सियम हाइड्राक्साइड

Ca(OH)2 + CO2 → CaCO3+ H 2O

कैल्सियम हाइड्राक्साइड + कार्बन डाइऑक्साइड → कैल्सियम + जल कार्बोनेट
इसे अवक्षेपण अभिक्रिया भी कहते है. कोयले का जलना भी संयोजन अभिक्रिया है.

C(s) + O2 (g) → CO2 (g)

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2. वियोजन या अपघटन अभिक्रिया (Decomposition Reaction)
वियोजन अभिक्रिया, संयोजन अभिक्रिया के विपरीत होती है. इस अभिक्रिया में एकल अभिकारक वियोजित या विघटित होकर दो या अधिक उत्पादों का निर्माण करता है. यह तीन प्रकार की होती है: उष्मीय वियोजन जो ऊष्मा के द्वारा होती है, विद्युत वियोजन जिसमें ऊष्मा विद्युत के रूप में प्रदान की जाती है, प्रकाशीय वियोजन जिसमें ऊष्मा प्रकाश के द्वारा प्रदान की जाती हैं.
3. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction)
इस अभिक्रिया में अधिक अभिक्रियाशील पदार्थ कम अभिक्रियाशील पदार्थ को उसके यौगिक से अलग कर देता है.

Fe(s) + CuSO4 (aq) → FeSO4 (aq) + Cu(s)

इस अभिक्रिया में लोहा कॉपर से अधिक अभिक्रियाशील पदार्थ है जिससे यह कॉपर को उसके यौगिक कॉपर सल्फेट से अलग कर देता है.  
4. द्वी-विस्थापन अभिक्रिया (Double Displacement Reaction)
इस अभिक्रिया में अभिकर्कों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है.
Ab + Cd → Ad + Cb

Na2 SO4 + BaCl2 → BaSO4 + 2NaCl

NaOH + H 2SO4 → Na 2SO4 + H 2O

5. उपचयन एवं अपचयन अभिक्रिया (Oxidation and Reduction Reaction)
उपचयन अभिक्रिया (Oxidation Reaction)
इसमें किसी पदार्थ में ऑक्सीजन की वृद्धि और हाइड्रोजन की कमी हो जाती है.
उदाहरण: जब कार्बन में ऑक्सीजन की वर्धि होती है तो कार्बन डाइऑक्साइड बनता है यानी यह कार्बन डाइऑक्साइड उपचयित (oxidised) हो जाता है.

C + O2 → CO2

2Cu + O2 → 2CuO

जब हाइड्रोजन का ह्रास होता है तब:
सल्फर हाइड्राइड से हाइड्रोजन का ह्रास होता है और उपचयित (oxidised) होता है.

H 2S + Br2 → 2HBr + S

H 2S + I2 → 2HI + S

अपचयन अभिक्रिया (Reduction Reaction)
इस अभिक्रिया में ऑक्सीजन का ह्रास और हाइड्रोजन में वृद्धि होती है. जैसे

CuO + H2 → Cu + H 2O

H 2S + Cl2 → 2HCl +S

संक्षारण यानी corrosion, विक्रतगंधिता यानी rancidity आदि उपचयन के ही प्रभाव है.  
इस लेख के माध्यम से हमने अध्ययन किया कि रसायनिक अभिक्रिया क्या होती है और कितने प्रकार की होती हैं.

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