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जानें भारत के पहले वर्टिकल लिफ्ट रेल सी ब्रिज के बारे में

भारत में जल्द ही अपना पहला वर्टिकल लिफ्ट सी रेलवे ब्रिज होगा. 

रामेश्वरम में एक नया पम्बन ब्रिज, तमिलनाडु में जल्द ही एक वास्तविकता बन जाएगा. पीयूष गोयल के अनुसार, "आगामी 2.07 किलोमीटर लंबा न्यू पंबन ब्रिज तमिलनाडु राज्य के रामेश्वरम और धनुषकोडि में आध्यात्मिक यात्रा शुरू करने की इच्छा रखने वाले तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए एक वरदान साबित होने वाला है."

इसमें कोई संदेह नहीं है कि पुराने पम्बन पुल ने मुख्यभूमि भारत के साथ पंबन द्वीप को जोड़ने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

पुराने पम्बन ब्रिज के बारे में

पम्बन ब्रिज मुख्य भारत के मंडपम शहर को पम्बन और रामेश्वरम से जोड़ता है. 1914 में इसने अपना परिचालन शुरू किया. जैसा कि हम जानते हैं कि यह भारत का पहला समुद्री पुल था और 2010 में बांद्रा-वर्ली सी लिंक के खुलने तक भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल था.

इसकी खासियत यह थी कि इसके मध्य में एक दो पत्ती वाला बेसक्यूल (bascule) सेक्शन है जिसे जहाजों और barges को गुजरने के लिए उठाया जा सकता है. मुख्य रूप से, यह जहाजों और vessels को गुजरने की अनुमति देने के लिए खुलता है.

इसका निर्माण 1911 में शुरू हुआ था. यह पहला भारतीय पुल था जो समुद्र के पार बनाया गया. आमतौर पर, इसे भारतीय पुलों की रानी के रूप में भी जाना जाता है. इसका निर्माण 1914 में शुरू किया गया था और इसके संचालन की शुरुआत हुई.

यह पुल 1988 तक रामेश्वरम और मुख्य भूमि के बीच की एकमात्र कड़ी थी. 1988 में, सड़क पुल शुरू हुआ.

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नया पम्बन ब्रिज क्यों बनाया जा रहा है?

पुराना पुल लगभग 106 साल पुराना है और इसमें लगातार रखरखाव की आवश्यकता होती है. ट्रेन संचालन के लिए इसकी सीमित क्षमता है.
एक नए पुल की मदद से, भारतीय रेलवे अधिक गति से मार्ग पर ट्रेनों का संचालन कर सकेगी. यह रेल गाडी को अधिक वजन रखने की भी अनुमति देगा या यू कहें कि इससे रेल गाड़ी में अधिक वजन भी ले जाया जा सकेगा.

इसके अलावा, मुख्य भूमि और रामेश्वरम के बीच, यह यातायात की मात्रा को अधिकतम करेगा. इस क्षेत्र का धार्मिक महत्व है. यह काफी दिलचस्प है कि पुल में भारत का पहला पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल सी ब्रिज होगा.

इससे  क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, मुख्य रूप से तीर्थयात्रा प्रयोजनों के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु हर साल रामेश्वरम मंदिर और ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आते हैं.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2019 में कन्याकुमारी में इस पुल की नींव रखी थी.

'न्यू' पंबन ब्रिज की विशेषताएं

आधुनिक तकनीकों की मदद से पुल का निर्माण किया जाएगा. इस पुल की ख़ासियत यह है कि जहाजों के बीच से गुजरने के लिए मध्य भाग को ऊपर उठाया जा सकेगा. इस तकनीक को 'Scherzer' रोलिंग लिफ्ट तकनीक के रूप में जाना जाता है. यानी नए वर्टिकल लिफ्ट रेल सी ब्रिज में 'Scherzer' रोलिंग लिफ्ट तकनीक होगी.

यह 18.3 मीटर के 100 स्पैन के साथ 2 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा, 63 मीटर की एक नौवहन अवधि जो जहाजों / स्टीमर की आवाजाही की अनुमति देगा, ऊपर की ओर बढ़ेगा. यानी नए पंबन ब्रिज में समुद्र में पानी के बड़े जहाज, स्टीमर, नौकाएं इत्यादि के जाने के लिए पहली बार वर्टिकल लिफ्ट (यूरोपीय तकनीक) की तर्ज पर सेतु का 63 मीटर लंबा हिस्सा रेल लाइन सहित ऊपर उठाने का इंतजाम होगा. रेल लाइन के दोनों छोर और उठने वाले हिस्से पर कंट्रोल के लिए टावर बनाए जाएंगे. 

नया पम्बन ब्रिज इलेक्ट्रो-मैकेनिकल नियंत्रित प्रणालियों से लैस होगा.

निर्बाध प्रणाली कनेक्टिविटी (seamless system connectivity) प्रदान करने के लिए इसे ट्रेन नियंत्रण प्रणालियों के साथ इंटरलॉक किया जाएगा.

ऐसा बताया जा रहा है कि पुल पर रेलवे लाइन में इस्तेमाल होने वाले स्लीपर कंपोजिट कई प्रकार की सामग्री से निर्मित होंगे ताकि समुद्र के खारे पानी व हवा से करोजन या क्षरण से बचाव हो सकेगा. साथ ही नया पुल पुराने पुराने पंबन ब्रिज से तीन मीटर अधिक ऊंचा बनाया जाएगा. यह भारतीय रेलवे का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेल सी ब्रिज होगा. 

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