भारत द्वारा विकसित 5 स्वदेशी रक्षा हथियारों और सिस्टम की सूची

भारत एक ऐसे महाद्वीप में स्थित है जहाँ पर देश की सुरक्षा बहुत ही मुश्किल काम है. ऐसे माहौल में भारत को अपनी रक्षा जरूरतों को मजबूत रखना ही होगा. इसलिए भारत के आयात बिल में हथियारों के आयात का बिल बहुत अधिक होता है. यूनियन बजट 2019 में; भारत का रक्षा बजट 3.18 लाख करोड़ रुपये को छू गया जो कि सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 1.6% है. 

SIPRI की रिपोर्ट में अनुसार, मार्च 2019 में भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश था और दुनिया के कुल हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 9.5% थी. सऊदी अरब 12% की हिस्सेदारी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश बन चुका है.

भारत सरकार, आगामी वर्षों में अपने हथियार आयात बिल को कम करना चाहती है इसलिए ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत हथियार भारत में ही बनाये जायेंगे. इस दिशा में; भारत ने बहुत पहले से पहल शुरू कर दी थी. भारत ने स्वदेश में कई हथियार विकसित किए हैं. आइये इस लेख में टॉप 5 हथियारों के बारे में जानते हैं.

1. तेजस विमान (Tejas Aircrafts): तेजस एक स्वदेशी हल्का वजन, मल्टी रोल सुपरसोनिक विमान है. इसे प्रशिक्षण और लड़ाई के उद्देश्यों के लिए विकसित किया गया है. तेजस को हवा से हवा में मार करने, हवा से सतह पर हमला करने के लिए बनाया गया है. इसमें सफलतापूर्वाक हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता भी है.

वर्तमान में यह विमान सेवा में है. भारतीय वायुसेना ने पहले ही 40 विमानों का अनुबंध कर लिया है और वह जल्द ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 83 और तेजस विमानों को खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट करेगा.हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द ही तेजस भारत के बूढ़े होते मिग -21 फाइटर जेट्स की जगह ले लेगा.

2. अर्जुन टैंक (Arjun Tank): यह DRDO द्वारा विकसित तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है. यह पहली बार 2004 में निर्मित किया गया था और इसकी एक इकाई की लागत लगभग रु. 6 करोड़ है. इसे स्वदेश में बनाया गया था और भारत में इस टैंक की लगभग 366 इकाइयाँ हैं. इसका नाम महाकाव्य महाभारत के नायक "अर्जुन" के नाम पर रखा गया है.

3. नेत्र (NETRA): NETRA का फुल फॉर्म "NEtwork TRaffic Analysis" है. NETRA भारत के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (CAIR) द्वारा विकसित एक सॉफ्टवेयर नेटवर्क है. इसका उपयोग रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और इंटेलिजेंस ब्यूरो द्वारा किया जाता है.

भारतीय एयरफोर्स ने इसकी पहली एयरबोर्न नियंत्रण प्रणाली को 2017 में शामिल किया था. NETRA एयरबोर्न नियंत्रण प्रणाली की रेंज 200 किलोमीटर है. आप; NETRA की क्षमताओं का आकलन इस बात से लगा सकते हैं कि यह गूगल टॉक और स्काइप जैसे सॉफ़्टवेयर से गुजरने वाले ‘आवाज़ ट्रैफ़िक’ का विश्लेषण कर सकता है.

4. अस्त्र मिसाइल (ASTRA Missile): हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल अस्त्र, बियॉन्ड विजुअल रेंज भी हमला करने में सक्षम है. इस मिसाइल को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा स्वदेशी और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा 2017 में निर्मित किया गया था. इसकी एक इकाई की लागत 7-8 करोड़ रुपये आती है.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय वायुसेना ने सितम्बर 2019 में हवा से हवा में मार करने वाली अस्त्र मिसाइल का तीसरा सफल परीक्षण किया था. मिसाइल ने 90 किलोमीटर दूर ओडिशा के पास अपने लक्ष्य को बेहद सटीकता के साथ भेद दिया था.

इसे Su-30MKI विमान से लॉन्च किया जा सकता है और इसकी गति 4.5 mach या 5556.6 किमी / घंटा है. इसे जल्द ही एयरफोर्स में शामिल किया जाएगा.

5. आकाश (AKASH): यह एक मध्यम दूरी की "सरफेस टू एयर" मिसाइल है. यह एक बार में कई लक्ष्यों को टारगेट कर सकती है. इस सुपरसोनिक आकाश मिसाइल की क्षमता यह है कि यह 25 किमी की दूरी और 18,000 मीटर या 59,000 फीट की ऊंचाई तक एक विमान को गिरा सकती है.

यहां तक कि यह बैलिस्टिक मिसाइलों, फाइटर जेट्स, क्रूज मिसाइलों और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों के हमलों को भी बेअसर कर सकती है.
सुपरसोनिक आकाश मिसाइल प्रणाली को औपचारिक रूप से 5 मई, 2015 को भारतीय सेना में शामिल किया गया और 10 जुलाई, 2015 को भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था.

यह 2009 से सेवा में है और अब तक 3000 मिसाइलों का निर्माण किया जा चुका है. इसे डीआरडीओ ने डिजाईन किया था जबकि इसका निर्माण ऑर्डनेंस फैक्ट्रीज बोर्ड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा किया गया था.

तो ये थे कुछ हथियार और प्रणालियां जिन्हें भारत में स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है. हमें उम्मीद है कि बहुत जल्द भारत भविष्य में और अधिक उन्नत हथियारों का उत्पादन शुरू करेगा और बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा की बचत होगी.

 

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