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जानें भारत के पहले प्रीमियम कॉटन ब्रांड 'कस्तूरी' के बारे में

केंद्रीय कपड़ा और महिला बाल विकास मंत्री स्मृति जुबानी ईरानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए द्वितीय विश्व कपास दिवस के मौके पर भारतीय कपास के लिए पहली बार ब्रांड और लोगो लॉन्च किया। 

On the occasion of World Cotton Day, launched Indian Cotton Brand ‘Kasturi’ along with its logo. Cotton has been an instrumental part of our history & civilisation; ‘Kasturi’ will further help harness true strength & potential of Indian Cotton. pic.twitter.com/lVwBF8WU5N

— Smriti Z Irani (@smritiirani) October 7, 2020

इस लॉन्च बाद अब भारत के प्रीमियम कपास को विश्व कपास ट्रेड में 'कस्तूरी कॉटन' के नाम से जाना जाएगा। कस्तूरी कॉटन ब्रांड सफेदी, चमक, कोमलता ,शुद्धता , सुंदरता, विशिष्टता और भारतीयता का प्रतिनिधित्व करेगा। 

केंद्रीय कपड़ा मंत्री के अनुसार यह एक बहुप्रतीक्षित क्षण है कि भारतीय कपास को एक ब्रांड और लोगो के तौर पर पहचान मिली। कपास भारत की मुख्य व्यावसायिक फसलों में से एक है। इससे करीब 60 लाख किसानों की रोजी रोटी चलती है। भारत कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और दुनिया में कपास का सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। भारत में हर साल करीब 60 लाख टन कपास का उत्पादन होता है जो कि पूरी दुनिया का करीब 23% है। इसी तरह भारत दुनिया के कुल जैविक कपास के उत्पादन का 51% उत्पादन करता है। 

उन्होंने आगे कहा कि देश में बनने वाले आर्गेनिक प्रोडक्ट की विश्वसनीयता और गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए देश में इंटरनेशनल मानकों पर आधारित प्रमाणन संस्था की जरूरत है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत APEDA के माध्यम से कपड़ा मंत्रालय ने कार्बनिक कपास के लिए एक प्रमाणन प्रणाली निर्धारित की है जिसे संपूर्ण कपड़ा मूल्य श्रृंखला में चरणों में पेश किया जाएगा। इसी तरह, गैर-कार्बनिक कपास के लिए एक प्रमाणन प्रणाली निर्धारित करना भी APEDA के साथ लिया गया है ताकि कपास के उपयोग को उपयुक्त रूप से बढ़ाया जा सके।

कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास का अब तक का उच्चतम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बनाया है और उम्मीद है कि नए कपास के मौसम के दौरान MSP के तहत खरीद बढ़ाई जाएगी। 

इसके तहत CCI ने सभी कपास उगाने वाले राज्यों में 430 खरीद केंद्र खोले हैं और 72 घंटों के भीतर किसानों के खाते में भुगतान डिजिटल रूप से किया जा रहा है। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए, एक मोबाइल ऐप, "कॉट-एली" को सीसीआई द्वारा मौसम की स्थिति, फसल की स्थिति और सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों के बारे में नवीनतम समाचार प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है। सीसीआई द्वारा 300 रुपये प्रति कैंडी की छूट दी जा रही है। एमएसएमई मिलों, खादी और ग्रामोद्योग, सहकारी क्षेत्र के लिए इसकी नियमित बिक्री उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता और दक्षता को बढ़ाने के लिए है। कपास का इस्तेमाल तकनीकी वस्त्रों के सभी आयामों में किया जा सकता है।

महत्वपूर्ण बातें:

1- भारत कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और दुनिया में कपास का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
2- भारत हर साल लगभग 6 मिलियन टन कपास का उत्पादन करता है,  जो विश्व कपास उत्पादन का लगभग 23% है। 
3- भारत विश्व की कुल जैविक कपास ऊपज के लगभग 51% का उत्पादन करता है।

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