जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्रियों की सूची

जम्मू कश्मीर, हिमालय पर्वत की गोद में स्थित भारतीय केंद्र शासित प्रदेश है. अपनी खूबसूरती के कारण इसे भारत के सिर का ताज भी कहा जा सकता है. 4 अगस्त, 2019 तक इस राज्य को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ था लेकिन अब यह एक केंद्र शासित प्रदेश बन चुका है.

जम्मू और कश्मीर के बारे में तथ्य (Facts about Jammu and Kashmir):-

1. क्षेत्रफल: 2,22236 वर्ग किमी.

2. जनसंख्या: 1.24 करोड़ (2011 की जनगणना)

3. स्थापना: 26 अक्टूबर, 1947

4. राजभाषा: राज्य की आधिकारिक भाषा उर्दू है. अन्य भाषाएँ कश्मीरी, डोगरी, पहाड़ी, बलती, लद्दाखी, पंजाबी, गुरजी, दादरी हैं.

5. राजधानी: श्रीनगर (ग्रीष्मकालीन), जम्मू (शीतकालीन)

30 मार्च 1965 से जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री राज्य के मुख्य कार्यकारी बने. इसलिए शुरू में 5 लोग जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं.
जम्मू और कश्मीर राज्य के पहले प्रधानमंत्री भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के श्री मेहर चंद महाजन थे. श्री मेहर चंद महाजन ने 15 अक्टूबर 1947 को पीएम के रूप में शपथ ली और 5 मार्च 1948 तक इस पद पर बने रहे.

जम्मू और कश्मीर के 5 प्रधान मंत्री की सूची (List of 5 Prime Minister of Jammu and Kashmir) 

Name

Term

Party

1. मेहर चंद महाजन

15 अक्टूबर 1947 - 5 मार्च 1948

(142 दिन)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

2. शेख अब्दुल्ला

5 मार्च 1948 - 9 अगस्त 1953 (5 वर्ष, 157 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस 

3. बख्शी गुलाम मोहम्मद

9 अगस्त 1953 - 12 अक्टूबर 1963 (10 वर्ष, 64 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

4.  ख्वाजा शमसुद्दीन

12 अक्टूबर 1963 - 29 फरवरी 1964 (140 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

5. गुलाम मोहम्मद सादिक

29 फरवरी 1964 - 30 मार्च 1965 (1 वर्ष, 30 दिन)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

तो ये थे जम्मू-कश्मीर के 5 प्रधानमंत्री. बाद में जम्मू और कश्मीर के संविधान में परिवर्तन हुआ और प्रधानमंत्री के स्थान पर मुख्यमंत्री का पद आ गया. सत्ताधारी पार्टी के प्रधानमंत्री गुलाम मोहम्मद सादिक ने 30 मार्च 1965 को जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी.

जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्रियों की सूची (List of Chief Minister of Jammu and Kashmir)

Name

Tenure

Party

1. गुलाम मोहम्मद सादिक

30 मार्च 1965 - 12 दिसंबर 1971 (6 वर्ष, 257 दिन)

 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

2. सैयद मीर कासिम

12 दिसंबर 1971 - 25 फरवरी 1975 (3 वर्ष, 75 दिन)

 

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

3. शेख अब्दुल्ला

25 फरवरी 1975 - 26 मार्च 1977 (2 वर्ष, 29 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

4. फारूक अब्दुल्ला

8 सितंबर 1982 - 2 जुलाई 1984 (1 वर्ष, 298 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

5. ग़ुलाम मोहम्मद शाह

2 जुलाई 1984 - 6 मार्च 1986 (1 वर्ष, 247 दिन)

अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस

फारूक अब्दुल्ला

7 नवंबर 1986 - 19 जनवरी 1990 (3 वर्ष, 73 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

फारूक अब्दुल्ला

9 अक्टूबर 1996 - 18 अक्टूबर 2002 (6 वर्ष, 9 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

6. मुफ्ती मोहम्मद सईद

2 नवंबर 2002- 2 नवंबर 2005 (3 वर्ष, 0 दिन)

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी

7. ग़ुलाम नबी आज़ाद

  2 नवंबर 2005 - 11 जुलाई 2008 (2 वर्ष, 252 दिन)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

8. उमर अब्दुल्ला

  5 जनवरी 2009 - 8 जनवरी 2015 (6 वर्ष, 3 दिन)

नेशनल कांफ्रेंस

मुफ्ती मोहम्मद सईद

1 मार्च 2015 - 7 जनवरी 2016 (312 दिन)

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी

9. महबूबा मुफ्ती

  4 अप्रैल 2016 - 20 जून 2018 (2 वर्ष, 77 दिन)

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी

मार्च 1965 के बाद से जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में 9 व्यक्ति चुने गए हैं. महबूबा मुफ्ती, जम्मू और कश्मीर राज्य की पहली और आखिरी महिला मुख्यमंत्री थीं.

ऊपर दी गयी सारिणी से यह स्पष्ट है कि कश्मीर की राजनीति अब्दुल्ला परिवार के आसपास ही घूमती रही है. शेख अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला सिर्फ एक परिवार के तीन मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

उमर अब्दुल्ला (फारूक अब्दुल्ला का बेटा), अब्दुल्ला परिवार की तीसरी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहा है. वे 5 जनवरी 2009 को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने थे.
मुफ्ती मोहम्मद सईद, जम्मू-कश्मीर के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिनका जनवरी 2016 में अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कार्यालय में निधन हो गया था.

मुफ्ती मोहम्मद सईद की मृत्यु के बाद; उनकी बेटी महबूबा मुफ्ती, 2016 में अपने पिता के पद पर रहीं. वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं. उन्होंने 4 अप्रैल 2016 को ऑफिस संभाला था और 20 जून 2018 तक इस पद पर बनी रही थीं.

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तो उपरोक्त आंकड़ों से पता चलता है कि या तो जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री 3 परिवारों से बनते रहे हैं या फिर वहां पर राज्यपाल/ राष्ट्रपति शासन लगा रहा है.

लेकिन अब जम्मू और कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश बन गया है और आर्टिकल 370 के हटने से इसके विशेषाधिकारों को खत्म कर दिया गया है, इसलिए यह भारत के अन्य केंद्र शासित प्रदेशों की तरह हो गया है.उम्मीद है कि अब इस राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा जिसके कारण इस राज्य में पर्यटन की संभावनाओं में इजाफा होगा और राज्य फिर से शांति और विकास के पथ पर अग्रसर होगा.

परिसीमन क्या होता है और केंद्र सरकार इसे जम्मू कश्मीर में क्यों लागू करना चाहती है?

J&K से Article 370 हुआ खत्म, सरकार के फैसले का तुलनात्मक अध्ययन

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