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भारत के प्रसिद्ध चैत्यों और विहारों की सूची

बौद्ध वास्तुकला भारतीय उपमहाद्वीप में विकसित हुई। यह तीन प्रकार के ढांचे जुड़े हुए हैं: मठ (विहार), अवशेषों (स्तूप), और चैत्यगृह।

चैत्य बौद्ध मंदिर को बोला जाता है जिसमे एक स्तूप समाहित होता है। भारतीय वास्तुकला से संबंधित आधुनिक ग्रंथों में, शब्द चैत्यगृह उन पूजा या प्रार्थना स्थलों के लिए प्रयुक्त किया जाता है जहाँ एक स्तूप उपस्थित होता है। वही  बौद्ध मठों को बोला जाता है जहा बौद्ध भिक्षु निवास करते है। वैसे तो विहार और चैत्य दोनों ही निवास स्थान के रूप में प्रयोग हो सकते हैं।

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भारत के प्रसिद्ध चैत्य और विहार

1. कार्ले चैत्यगृह

यह चैत्यगृह महाराष्ट्र में लोनावाला के निकट कार्ली में स्थित हैं। इसे चट्टानों को काट कर प्राचीन बौद्ध मन्दिर बनाया गया हैं। इसकी लम्बाई 38.25 मीटर, चौड़ाई 15.10 मीटर तथा ऊँचाई 14.50 मीटर है। इस विशाल चैत्यगृह में तीन विहार भी हैं। इस चैत्यगृह के अन्दर एवं बाहर कई अभिलेख अंकित है जिसके अनुसार इसका निर्माण प्रथम शताब्दी ई. का प्रारम्भिक चरण में हुआ था।

2. नासिक चैत्यगृह

यह महाराष्ट्र के नासिक 200 ई. पू. की पांडुलेण नामक बौद्ध गुफ़ाओं का एक समूह है जिसमे 16 विहार और एक चैत्यगृह है। यह हिनायन बौद्ध धर्म (सतवाहन काल) से संबंधित थे। यहाँ के गुफाओं में  मानव का चित्र स्तंभों और विहारों के छत पर उत्कीर्ण किया गए हैं।

3. जुन्नार विहार

यह महाराष्ट्र राज्य के पुणे ज़िले में स्थित है और प्राचीन समय में यह हीनयान सम्प्रदाय का केन्द्र था। इस विहार के एक गुफा में शक नरेश नहपान के मंत्री अयम का अभिलेख 124 ई. का प्राप्त हुआ है। इस अभिलेख में नहपान को 'महाक्षत्रप' कहा गया है। इससे नहपान का उस भाग में आधिपत्य सिद्ध होता है।

4. भाज चैत्यगृह

यह महाराष्ट्र के लोनावाला के पास पुणे जिले में स्थित है और इसका निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। यहाँ 22 गुफ़ाएँ हैं, जिनमे चैत्यगृह, विहार और ठोस स्तूप सम्मिलित हैं। इसका निर्माण 200 ई. पूर्व के आस-पास हुआ था। इस चैत्य का गवाक्ष गोलाकार है, पाषाण खम्भे थोड़े तिरछे हैं तथा स्तूप में किसी प्रकार के अलंकरण की जानकारी नहीं मिलती। चित्रों के अलावा यहाँ त्रिरत्न, नंदिपद, श्रीवत और चक्र को अंकित किया गया है यहाँ की दीवारों में।

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5. कोंकडे विहार

यह महाराष्ट्र के कोलाबा जिले में स्थित है। इसे लकड़ी से बनाया गया है।

6. पीतलखोर चैत्यगृह

यह महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में स्थित है। यह 13 गुफाओं से मिल कर बना है। यहाँ के स्तूप और अभिलेख के अनुसार इसका निर्माण सम्भवतः द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ था। 37 स्तंभों  में से 12 बचें है, तथा बाकी सारे नष्ट हो चुके हैं। बचे-खुचे अवशेषों के आधार पर इस चैत्यगृह की लम्बाई 15 मीटर तथा 10.25 मीटर चौड़ा और 6.10 मीटर ऊँचा रहा होगा।

7. वेदसा चैत्यगृह

यह कार्ल चैत्यगृह के दक्षिण में स्थित है। यह चैत्यगृह लकड़ी के वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।  

8. कान्हेरी विहार

कान्हेरी शब्द कृष्णगिरी यानी काला पर्वत से निकला है। यह मुंबई शहर के पश्चिमी क्षेत्र में बसे में बोरीवली के उत्तर में संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के परिसर स्थित हैं। इसको बेसाल्ट की चट्टानों को तराशकर बनाया गया है। यह विहार हीनयान संप्रदाय से सम्बंधित है और इसका निर्माण दूसरी शताब्दी के अंत में हुआ था। इस विहार की गणना पश्चिमी भारत के प्रधान बौद्ध गिरिमंदिरों में की जाती है और उसका वास्तु अपने द्वार, खिड़कियों तथा मेहराबों के साथ कार्ली की शिल्पपरंपरा का अनुकरण करता है।

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