सुपरकंप्यूटर किसे कहा जाता है और ये क्या कार्य करता हैं?

आजकल हम सूचना प्रोद्योगिकी के युग में जी रहे हैं और यह प्रोद्योगिकी कंप्यूटर के बिना हो ही नहीं सकती है. हम डेली लाइफ में जो कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं उसे साधारण कंप्यूटर कहा जाता है.

साधारण कंप्यूटर से साधारण कार्य जैसे छोटी-मोटी गणना करना, पिक्चर देखना, टेक्स्ट टाइप करना इत्यादि किये जाते हैं लेकिन सुपरकंप्यूटर काम इन सब कामों के अलावा बहुत कम समय में बड़े बड़े कैलकुलेशन, भविष्य और मौसम के बारे में बताना, नेचुरल रिसोर्सेज के बारे जानकारी इकठ्ठा करने का कार्य करता है.

आइये इस लेख में माध्यम से जानते हैं कि सुपरकंप्यूटर क्या क्या करता है, इसका प्राइस कितना होता है और किस देश के पास सबसे तेज सुपरकंप्यूटर है?

सुपरकंप्यूटर को वहां पर काम मे लिया जाता है जहाँ पर बहुत ज्यादा पॉवर और तेज गति के साथ रियल टाइम में गणना करने की जरूरत होती है. किसी भी कंप्यूटर को इस काबिलियत के आधार पर सुपर कहा जाता है कि वह कितना बड़ा कैलकुलेशन कितनी जल्दी कर लेता है. सुपरकंप्यूटर की गति की गणना फ्लॉप्स (Floating Points Operation Per Second i.e. FLOPS)  में की जाती है. साधारण कंप्यूटर कार्य की गणना "प्रति सेकेंड लाखों निर्देश" या Million Instructions Per Second (MIPS) में की जाती है.

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आज के सुपरकंप्यूटर में हजारों प्रोसेसर होते हैं जो प्रति सेकंड अरबों और ट्रिलियन गणना करने में सक्षम होते हैं. सुपरकंप्यूटर समांतर प्रसंस्करण (parallel processing) के आधार पर काम करते हैं. प्रत्येक काम को कई भागों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक माइक्रोप्रोसेसर हर भाग में दिए गए कार्य को करता है.

सुपरकंप्यूटर में ऑपरेटिंग सिस्टम:

नए ज़माने के सुपरकंप्यूटर में “लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम” का इस्तेमाल किया जाता है हालाँकि मैन्युफैक्चरर अपनी जरुरत के हिसाब से ऑपरेटिंग सिस्टम को चेंज भी कर लेते हैं. लिनक्स के आलावा bullx SCS, SUSE CentOS और Cray लिनक्स जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल भी किया जाता है.

सुपरकंप्यूटर से किस तरह के काम किये जाते हैं:

सुपरकंप्यूटर की जरुरत वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग प्रयोगों जिनमें बहुत ज्यादा डेटाबेस और हाई लेवल के कैलकुलेशन की गणना की जाती है, के लिए इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन बदलते समय के साथ सुपरकंप्यूटर से लिया जाने वाला काम भी बदल गया है.

सुपरकंप्यूटर बहुत तेज, शक्तिशाली और महंगे होते हैं इसलिए इसका उपयोग वहीँ पर किया जाता है जहाँ पर बहुत बड़ा और तेजी से कैलकुलेशन करना होता इसके अलावा स्पेशल ऑपरेशनों में भी इसकी जरूरत होती है. 

सुपरकंप्यूटर से मुख्यतः निम्न कार्य किये जाते हैं; (Functions of Supercomputers)

1. जलवायु अनुसंधान (Climate Research)

2. मौसम की भविष्यवाणी (Weather Forecasting)

3. तेल और गैस की खोज (Oil and Gas Exploration)

4. शारीरिक सिमुलेशन (Physical Simulations)

5. आणविक मॉडलिंग (Molecular Modeling)

6. क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics)

7. एनिमेटेड ग्राफिक्स (Animated Graphics)

8. परमाणु ऊर्जा अनुसंधान (Nuclear Energy Research)

9. तरल गतिशील गणना (Fluid Dynamic Calculations)

10. कोड ब्रेकिंग (Code-Breaking)

11. जेनेटिक एनालिसिस (Genetic Analysis)

सुपरकंप्यूटर की कीमत कितनी होती है?  (Price of Supercomputers)

सुपरकंप्यूटर की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि यह कितनी फ्लोटिंग पॉइंट पर सेकंड्स की गति से गणना कर सकता है. सुपरकंप्यूटर जितना तेज होगा वह उतना ही महंगा होगा इसलिए सुपरकंप्यूटर को बनाने और इस्तेमाल करना इतना आसान नहीं होता है. सामान्य सुपरकंप्यूटर लगभग $20,000 में खरीदा जा सकता है लेकिन बड़े सुपरकंप्यूटर की कीमत 300 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाती है.

विश्व और भारत का सबसे तेज कंप्यूटर: (Fastest Supercomputer of the World)

विश्व के दो सबसे तेज सुपर कंप्यूटर अब अमेरिका के हैं. इन दोनों कंप्यूटर के नाम हैं; Summit and Sierra. ये दोनों आईबीएम प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं. Summit को जून, 2018 में दुनिया के सबसे तेज कंप्यूटर का ताज पहनाया गया था, उसने गणितीय परीक्षण LINPACK का प्रदर्शन प्रति सेकंड 122.3 पेटाफ्लॉप्स प्रति सेकंड पर किया था.

Summit के पहले चीन का सनवे ताइहुलाइट (Sunway TaihuLight) विश्व का सबसे तेज कंप्यूटर था. जिसका अनुमानित मूल्य 273 मिलियन अमेरिकी डॉलर है.  कुल मिलाकर, सबसे तेज 10 सुपर कंप्यूटरों में से पांच अमेरिकी हैं, दो चीनी हैं, जबकि स्विट्जरलैंड, जापान और जर्मनी में से प्रत्येक में एक-एक है.

(Summit Supercomputer)

ज्ञातव्य है कि प्रत्यूष (Cray XC40) भारत में सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर है. इसकी मैमोरी 1.5 टेरा बाइट है. प्रत्यूष का उद्घाटन (8 जनवरी 2018) केन्द्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ हर्षवर्धन द्वारा किया गया था और यह पुणे में 'भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान' (आईआईटीएम) में स्थित है. भारत के सुपर कंप्यूटर की टॉप स्पीड 42.56 TFLOPS/s है जबकि चीन के सुपरकंप्यूटर की टॉप स्पीड 125,436 TFLOPS/s है.

भारत में सुपर कंप्यूटर के नाम इस प्रकार हैं;

1. प्रत्यूष (Cray XC40),

2. मिहिर (Cray XC40)

3. InC1 - Lenovo C1040

4. SERC - Cray XC40

5. iDataPlex DX360M4

6. परम सीरीज (वर्तमान में “परम ईशान”  लेटेस्ट सीरीज है)

सुपरकंप्यूटर के लाभ:

आईबीएम, पेपाल इत्यादि जैसी कई बड़ी कंपनियों द्वारा सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया जाता है. ये कंप्यूटर ऑनलाइन लेनदेन में धोखाधड़ी को रोकने में मदद करते हैं. साथ ही कई कम्पनियाँ लोगों की पसंद और ना पसंद के बारे में जानने के लिए सुपर कंप्यूटर का उपयोग करतीं हैं. इसके अलावा ईंधन की खपत जानने और अच्छे उत्पादों की डिजाइन निर्माण के लिए कई ऑटोमोबाइल कंपनियां इन कंप्यूटरों का उपयोग करती हैं. सुपरकंप्यूटर, चिकित्सा क्षेत्र में शोध करने में भी मदद करते हैं.

कुल मिलाकर आसान शब्दों में यह कहा जा सकता है कि सुपरकंप्यूटर आज के ज़माने की जरूरत बन चुका है और कुछ क्षेत्र तो इन पर इतने आश्रित हो गये हैं कि इन सुपरकंप्यूटर कि अनुपस्तिथि में उनका काम ही ठप पड़ जायेगा.

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