क्रिकेट में “सुपर ओवर” क्या होता है और इसके क्या नियम होते हैं?

विश्व कप 2019 का रोमांच;

क्रिकेट विश्व कप इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि फाइनल मैच टाई हुआ हो और फिर इसके बाद खेला गया सुपर ओवर भी टाई हुआ हो. विश्व कप 2019 चैंपियन का फैसला सुपर ओवर में भी ना हो सका था. इसलिए विजेता का फैसला ICC के नियम के अनुसार हुआ.

यह नियम कहता है कि जो टीम पूरे मैच में ज्यादा चौके लगाती है वह विजेता घोषित होती है. पूरे मैच में इंग्लैंड ने 22 चौके लगाये जबकि न्यूजीलैंड की टीम ने सिर्फ 14 चौके लगाये थे.

इस प्रकार अधिक “चौके” लगाने के कारण इंग्लैंड को विश्व कप विजेता घोषित किया गया है.

इस प्रकार 2019 के फाइनल मैच से क्रिकेट की दुनिया को एक नया क्रिकेट विश्व कप चैंपियन मिला है.
लेकिन अभी भी बहुत से लोगों को सुपर ओवर और इसके नियमों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. इसलिए आइये जानते हैं कि सुपर ओवर की शुरुआत कब हुई और इसके लिए क्या क्या नियम बनाये गये हैं.

सुपर ओवर की शुरुआत: (Beginning of Super Over)

सुपर ओवर की शुरुआत 2008 में T-20 क्रिकेट में हुई थी. इससे पहले "बाल-आउट" तरीके का इस्‍तेमाल किया जाता था. एकदिवसीय अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट में इसकी शुरुआत 2011 में हुई थी.

क्रिकेट में “बॉल आउट” ठीक वैसा ही है जैसे फुटबाल में पेनल्टी शूटआउट.  बॉल आउट में हर साइड के 5 खिलाड़ी 1 या 2 बॉल फेंकते हैं और तीनों स्टम्पों में किसी एक को भी गिराने की कोशिश करते हैं. जिस टीम के खिलाड़ी ज्यादा विकेट गिरा देते हैं वह टीम जीत जाती है.
ध्यान रहे कि जब बॉलर बॉल फेकता है तो बैट्समैन के रूप में उसे कोई खेलता नहीं है.
लेकिन यदि दोनों टीमों के खिलाड़ी बराबर-बराबर विकेट गिरा देते हैं तो बालिंग होती रहती है जब तक कि विकेट गिरने में अंतर ना आ जाये.

सुपर ओवर का अर्थ (Meaning of Super Over):

सुपर ओवर (Super Over) का इस्‍तेमाल तब होता है जब दोनों टीमों का स्कोर बराबर हो जाता है. इस मेथड का प्रयोग टी-20 और एक दिवसीय मैचों में परिणाम लाने के लिए किया जाता है. इस तरह के "सुपर ओवर" को एलिमिनेटर (Eliminator) या वन ओवर पर साइड एलिमिनेटर (one-over-per-side eliminator) भी कहा जाता है.

सुपर ओवर के नियम (Rules for Super over):

1. सुपर ओवर में एक टीम की ओर से अधिकतम तीन खिलाड़ी (जो कि बैटिंग शुरू करने से पहले से ही बताने पड़ते है) भाग ले सकते है. दो ओपनिंग जोड़ी के रूप में और एक अन्य किसी खिलाड़ी के आउट होने की दशा में. यानी कुल मिलाकर तीन बल्‍लेबाज क्रीज पर आ सकते हैं.

2. प्रत्येक टीम को एक ओवर खेलने को दिया जाता है.

3. जो टीम मैच में दूसरी पारी में बल्लेबाजी करती है, वो टीम सुपर ओवर में पहले बल्लेबाजी करने आती है. विश्व कप 2019 में भी ऐसा ही हुआ है. सुपर ओवर खेलने के पहले न्यूजीलैंड ने पहले बैटिंग की थी लेकिन सुपर ओवर में इंग्लैंड ने पहले बैटिंग की थी.

4. कोई एक खिलाड़ी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों काम नहीं कर सकता है.

5. सुपर ओवर में किसी भी टीम के 2 विकेट गिरते ही पारी समाप्त हो जाती है.

6. अगर डकवर्थ लुईस नियम हुआ तो जो टीम “सुपर ओवर” की आखिरी गेंद पर ज्यादा रन बनाती है वह जीत जाती है.

7. गेंदबाजी करने वाली टीम चुनती है कि वह किस “छोर” से गेंदबाजी करेगी.

8. अगर सुपर ओवर भी टाई हो गया तो जिस टीम ने पूरे मैच में ज्यादा चौके लगाये हैं वह टीम जीत जाती है. विश्व कप 2019 के विजेता का निर्णय भी इसी तरीके से हुआ था.

9. अगर सुपर ओवर में भी मैच टाई हो जाता है तो 2010 से पहले जो टीम सुपर ओवर में ज्यादा छक्के लगाती थी वह टीम जीतती थी.

10. सुपर ओवर में बनाये गए रन और विकेट रिकॉर्ड में नही जोड़े जाते हैं.

तो इस प्रकार ऊपर दिए गए विश्लेषण से यह बात स्पष्ट हो जाती है कि जिस मैच का फैसला सामान्य तरीके से नहीं हो पाता है उसका फैसला सुपर ओवर की मदद से किया जाता है. इस प्रकार स्पष्ट है कि सुपर ओवर वाला मैच बहुत ही रोमांचक होता है.

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