लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला: जीवनी और राजनीतिक कैरियर

लोकसभा स्पीकर संसद के निचले सदन का प्रमुख होता है. साधारण भाषा में यह कहा जा सकता है कि लोकसभा का अध्यक्ष लोकसभा का बॉस होता है और उसको मिली पॉवर के हिसाब से ही सदन की कार्यवाही चलती है. लोकसभा स्पीकर को भारत के संविधान, लोक सभा की प्रक्रिया संचालन नियम और संसदीय परम्पराओं से पॉवर मिलती है.

लोकसभा के अध्यक्ष या स्पीकर के रूप में नव निर्वाचित सदस्यों में से किसी ऐसे व्यक्ति को लोकसभा का स्पीकर चुना जाता है जिसे भारत की संसदीय प्रणाली की उचित जानकारी हो. साधारणतः नव निर्वाचित सदस्यों की पहली बैठक में ही स्पीकर का चुनाव कर लिया जाता है.

भारत में 17वीं लोकसभा के लिए श्री ओम बिरला को 17वां लोकसभा स्पीकर चुना गया है वे सुमित्रा महाजन की जगह लेंगे. आइये जानते हैं कि ओम बिरला की जीवनी और राजनीतिक करियर कैसा था?

नाम: ओम बिड़ला
जन्म तिथि: 23 नवंबर 1962, कोटा, (राजस्थान)
निर्वाचन क्षेत्र: कोटा
पार्टी: भारतीय जनता पार्टी
पिता का नाम: श्री श्रीकृष्ण बिड़ला
माता का नाम: स्वर्गीय श्रीमती. शकुंतला देवी
जन्म स्थान: कोटा, राजस्थान
जीवनसाथी का नाम: डॉ. अमिता बिड़ला
पुत्र: कोई नहीं
शैक्षिक योग्यता: एम.कॉम. गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज, कोटा और एमडीएस विश्वविद्यालय, अजमेर (राजस्थान)
राजनीतिक कैरियर
वह छात्र राजनीति से उभरे और वह 1979 में छात्र संघ के अध्यक्ष थे. ओम बिड़ला ने 2003 में कोटा (दक्षिण)सीट से अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता. उन्हें 2008 में फिर से असेंबली चुनावों में जीत मिली और फिर वे 2013 में तीसरी बार विधायक बने.
संसद सदस्य के रूप में
ओम बिरला कोटा निर्वाचन क्षेत्र से 16वीं और 17वीं लोकसभा के लिए चुने गये हैं. इस प्रकार केवल दूसरी बार संसद सदस्य बनने पर ही उन्हें लोक सभा स्पीकर बनने का अवसर मिल गया है. वह 17वीं लोकसभा के 17वें लोकसभा अध्यक्ष होंगे.
लोकसभा अध्यक्ष:
स्पीकर; लोकसभा का प्रमुख होता है. वह संसद के सदस्यों की शक्ति और विशेषाधिकारों का संरक्षक होता है. स्पीकर लोकसभा की ओर से मुख्य वक्ता होता है और संसद की कार्यवाही और मर्यादा का सभी सदस्यों से पालन करवाता है.
स्पीकर, लोकसभा (संसद का निचला सदन) का पीठासीन अधिकारी होता है. उसका सबसे पहला कर्तव्य सदन की कार्यवाही के संचालन के लिए विधि और नियमों का निर्वहन करना होता है.

स्पीकर ही तय करता है कि कोई विधेयक; “धन” विधेयक है या नहीं; उसका निर्णय अंतिम होता है. इसके अलावा वह सविधान की 10 वीं अनुसूची के आधार पर दल बदल के उपबंध के तहत किसी सदस्य की अयोग्यता के प्रश्न का निर्धारण करता है.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि लोकसभा का अध्यक्ष; संसद के निचले सदन का बॉस होता है और सभी को उसकी बात को मानना पड़ता है. अब आने वाले समय में ही पता चलेगा कि लोकसभा के नव-निर्वाचित स्पीकर ओम बिरला किस प्रकार के स्पीकर सिद्ध होते हैं?

भारत के लोकसभा अध्यक्षों की सूची

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