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भारत में फ्लाइट लेट या कैंसिल होने पर यात्री के क्या अधिकार हैं?

ऐसे समय में जब भारत का विमानन क्षेत्र बहुत तेजी से बढ़ रहा है तो यात्रियों की शिकायतों की संख्या में भी कई गुना वृद्धि हुई है. नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से अप्रैल 2017 के बीच में लगभग 5.12 लाख यात्रियों ने शिकायतें दर्ज की थीं.

ये शिकायतें मुख्य रूप से रिफंड की लड़ाई, कैंसल्ड फ्लाइट या रीशेड्यूलिंग या फ्लाइट में ना बैठने देने से सम्बंधित थीं. इस दौरान विभिन्न एयरलाइन्स ने यात्रियों को लगभग 22 करोड़ का जुर्माना दिया था.

ज्ञातव्य है कि भारत के घरेलू मार्किट में सबसे अधिक हिस्सेदारी (47%) इंडिगो एयरलाइन्स की है  इसके बाद लगभग  13.6% की हिस्सेदारी के साथ जेट एयरवेज का नम्बर है जबकि लगभग 12.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ एयर इंडिया तीसरे नम्बर पर है.

जनवरी 2021 तक 54.3% की बाजार हिस्सेदारी के साथ IndiGo भारत की सबसे बड़ी यात्री (Passenger) एयरलाइन है. 

हवाई जहाज 1 लीटर में कितना माइलेज देता है?

आइये इस लेख में जानते हैं कि यदि कोई एयरलाइन्स किसी यात्री को परेशान करती है या यात्री को फ्लाइट से रिलेटेड किसी अन्य तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है तो ऐसे में यात्रियों के पास कौन-कौन से अधिकार हैं?

1. सामान खो जाने के मामले पर (Rules for Lost Luggage on Airport)

यदि एअरपोर्ट पर आपका कोई सामान गुम हो जाता है या फट जाता या उसमें किसी अन्य तरह का नुकसान होता है तो इस स्थिति में आपको तुरंत एयरलाइन्स को एक लिखित शिकायत देनी चाहिए. इसके अलावा आपको एअरपोर्ट छोड़ने से पहले संपत्ति अनियमितता रिपोर्ट (इसे PIR भी कहा जाता है) लेना भी जरूरी होता है.

क्षतिग्रस्त सामान के मामले में, एयरलाइन आपको सामान की मरम्मत के लिए भुगतान कर सकती है या उस बैग या सूटकेस की जगह दूसरा बैग या सूटकेस उपलब्द कराएगा. सामान खो जाने के मामले में एयरलाइन्स का यह दायित्व है कि वह यात्री को "द कैरिज बाय एयर एक्ट, 1972" के अनुसार कॉम्पन्सेशन प्रदान करे.

2. बोर्डिंग से मनाही (Consumer rights on Refusal to Boarding)

सभी एयरलाइन्स को इस बात का डर रहता है कि उनकी सीटें टिकेट कैंसिल होने के कारण खाली रह सकतीं हैं इसलिए ये कम्पनियाँ ओवरबुकिंग करतीं हैं. किसी खास फ्लाइट में ओवरबुकिंग के कारण यात्रियों की संख्या उपलब्ध सीटों से ज्यादा हो सकती है. इस स्थिति में एयरलाइन कन्फर्म बुकिंग के बावजूद फ्लाइट पर बोर्ड करने से यात्री को रोक सकती है.

लेकिन DGCA ने इसके लिए यह नियम बनाया है कि अब अगर किसी यात्री को ओवरबुकिंग के चलते बोर्डिंग से मना किया जाता है तो एयरलाइन्स का यह कर्तव्य है कि यात्री को किसी अन्य वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था करे.

ध्यान रहे कि दूसरी फ्लाइट छूटने का समय पहले वाली बुकिंग के समय से सिर्फ एक घंटे के भीतर हो. यदि एयरलाइन्स वैकल्पिक एयरलाइन की व्यवस्था नहीं करती है या यात्री वैकल्पिक एयरलाइन से नहीं जाना चाहता है तो उसे, पूरा किराया वापस+बेसिक किराये का 400 %+फ्यूल सरचार्ज जो कि अधिकतम 20 हजार तक हो सकता है, वापस करना होगा.

3. फ्लाइट कैंसिल होने पर (Consumer rights on Flight Cancellation)

यदि फ्लाइट रद्द हो जाती है, तो यात्रियों को प्रस्थान की निर्धारित तारीख से कम से कम दो सप्ताह पहले सूचित किया जाना चाहिए और वापसी या वैकल्पिक फ्लाइट का विकल्प उन्हें पेश किया जाना चाहिए. लेकिन अगर एयरलाइन ऑपरेटर यात्रियों को सूचित नहीं करता है तो उन्हें हवाई टिकट की कीमत की वापसी प्राप्त करने के अलावा मुआवजा दिया जाना चाहिए. यह मुआवजा 5,000 रुपये से 10,000 रुपये हो सकता है.

नोट: यहाँ पर जरूरी बात है कि टिकट बुक करते हुए आप सही जानकारी दें. इनमें आपका ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर शामिल है. डीजीसीए के नियम कहते हैं कि संपर्क की गलत सूचना देने पर हर्जाना नहीं दिया जाएगा.

4. फ्लाइट में देरी (Delay in Flight)

डीजीसीए के अनुसार, निर्धारित समय से 24 घंटे से कम की देरी पर आप एयरपोर्ट पर भोजन और रिफ्रेशमेंट के हकदार हैं. यदि विलंब 24 घंटे से अधिक होता है तो आपके होटल में ठहरने की व्यवस्था एयरलाइन को करानी होगी. ऐसे मामले में होटल चुनने का हक़ पूरी तरह से एयरलाइन पर निर्भर होगा.

5. रिफंड (Refund in flight delay or Cancellation)

डीजीसीए की वेबसाइट के अनुसार, यदि आपने कैश में भुगतान किया है तो एयरलाइन को तुरंत रिफंड करना होगा. इसके अलावा क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने पर पैसों को 7 दिनों के भीतर लौटाना होगा. अगर ट्रेवल एजेंट से टिकट बुक कराए हैं तो व्यक्ति को एजेंट से संपर्क करना होगा.

रिफंड में पैसेंजर सर्विस फीस, एयरपोर्ट डेवलपमेंट फीस और सर्विस टैक्स शामिल होते हैं. आपके पास विकल्प है कि आप पैसे रिफंड करा लें या दूसरी तारीख पर यात्रा कर लें.

आइये अब यात्रियों के कर्तव्यों के बारे में जान लेते हैं;

1. यात्री अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें. यह बात रेल के साथ हवाई यात्रा के लिए भी लागू होती है. इसलिए डीजीसीए की सभी यात्रियों से यह रिक्वेस्ट है कि लोग अपने अपने व्यक्तिगत पर्स में; रुपये, कीमती धातुएं, जेबरात, महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट्स, प्रतिभूतियां, व्यक्तिगत पहचान डाक्यूमेंट्स और अन्य कीमतों चीजों को रख लें.

2. यदि आप एक अभ्यस्त धूम्रपान (habitual smoker) करने वाले हैं, तो विमान के अंदर या शौचालय में कभी भी धूम्रपान न करें.

3. कॉकपिट में जाने की कोशिश न करें.

4. चालक दल की अनुमति के बिना सीटें न बदलें. अर्थात जिस सीट पर आपको बैठाया गया है उसी पर बैठें.

5. हमेशा उड़ान के दौरान उड़ान केबिन क्रू द्वारा की गई घोषणाओं पर ध्यान दें.

सारांश के तौर पर यह कहा जा सकता है कि DGCA ने ग्राहक के हितों की रक्षा करने के लिए कई नियम बनाये हैं. अतः DGCA चाहता है कि भारत में “ग्राहक देवता होता है” वाली कहावत चरितार्थ होनी ही चाहिए.


क्या आप पेट्रोल पम्प पर अपने अधिकारों के बारे में जानते हैं?

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