पटना कलम शैली- उत्पत्ति और विशेषताएं

भारतीय चित्रकला की उत्पत्ति प्राचीन काल से है जब हमारे पूर्वज अपने जीवन और रीति-रिवाजों का चित्रण दीवारों पर किया करते थे। साहित्यिक अभिलेखों से पता चलता है कि प्रारंभिक काल से ही चित्रकारी विद्वान और धार्मिक दोनों को ही कलात्मक अभिव्यक्ति का एक महत्वपूर्ण रूप प्रदान करता आया है।

मुगल के आगमन के बाद भारतीय चित्रशैली को नया आयाम मिला और उनकी शैली ने चित्रकला के कई ऐसे भारतीय विद्यालयों को प्रभावित किया जिनकी उत्पत्ति बाद में हुई थी। पटना कलम शैली या पटना स्कूल ऑफ पेंटिंग उन स्कूलों में से एक था, जो बिहार में 18 वीं से 20 वीं शताब्दी के शुरुआती दिनों में मुगल चित्रकला का एक आदर्श था।

पटना कलम शैली की उत्पत्ति

पटना कलम शैली की उत्पत्ति, ब्रिटिश शैली के संयोग से अंग्रेजों के संरक्षण में हुआ था। मुगल साम्राज्य के पतन के दौरान शाही दरबार में कलाकारों को प्रश्रय नहीं मिलने के कारण इनका पलायन अन्य क्षेत्रों में होने लगा था। इसी क्रम में 1760 के लगभग पलायित चित्रकार तत्कालीन राजधानी ‘पाटलिपुत्र  वापस आ गये। इन पलायित चित्रकारों ने राजधानी क्षेत्र में तथा उसके आस पास क्षेत्रों में बसकर स्थानीय अभिजात वर्ग के संरक्षण में चित्रकला के क्षेत्रीय रूप को विकसित किया। यह चित्रकला शैली ही ‘पटना कलम’ या ‘पटना शैली’ कही जाती है।

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पटना कलम शैली की विशेषताएँ

पटना कलम शैली की विशेषताओं पर नीचे चर्चा की गई हैं:

1. इस चित्रशैली में व्यक्ति चित्रों की प्रधानता होती है तथा इस शैली में उकेरे गये चित्र आम जीवन की त्रासदियों को दर्शाया जाता है।

2. अधिकांश चित्रकारी लघु श्रेणी की होती है और अधिकतर कागज पर बनाई जाती है। बाद में इस तरह की चित्रकारी हाथी के दांत पर भी किया जाने लगा है।

3. दैनिक जीवन पर चित्रकारी इस शैली में बहुतायत में हैं।

4.चित्रकारी का विषय दैनिक मजदूर, मछली बेचने वाले, टोकरी बनाने वाले पर आधारित होती है।

5. चित्रकला की इस शैली में, देशी पौधों, छाल, फूलों और धातुओं से बने रंगों का इस्तेमाल होता है। अधिकांशत: गहरे भूरे, गहरे लाल, हल्का पीला और गहरे नीले रंगों का प्रयोग किया गया है।

6. इस शैली के प्रमुख चित्रकार सेवक राम, हुलास लाल, जयराम, शिवदयाल लाल आदि हैं। चूंकि इस शैली के अधिकांश चित्रकार पुरुष हैं, इसलिए इसे ‘पुरुषों की चित्रशैली’ भी कहा जाता है।

7. इस शैली में चित्र की आकृति को रेखांकित करने के लिए पेंसिल का उपयोग किए बिना ब्रश से सीधे चित्रकारी किया जाता है। इस तकनीक को आमतौर पर 'कजली सिहाई' के नाम से जाना जाता है।

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