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भारत की नई सार्वजनिक वाई-फाई योजना (PM-WANI): उद्देश्य, प्रक्रिया, महत्व और लाभ

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दूरसंचार विभाग (DoT) को  सार्वजनिक वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (Public Wi-Fi Access Network Interface) स्थापित करने के लिए एक प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है. वर्ष 2017 में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा सार्वजनिक वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस (पीएम वाणी) को पहली बार अनुशंसित किया गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि "ऐतिहासिक पीएम वाणी (वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफ़ेस) योजना, जिसे मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी गई है, तकनीक की दुनिया को पुनर्जीवित करेगी और भारत की लेंथ और ब्रेथ में वाईफाई की उपलब्धता में काफी सुधार करेगी."

नरेन्द्र मोदी जी ने एक ट्वीट में ये भी कहा, "यह ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) और ईज़ ऑफ लिविंग (Ease of Living) होगी. उन्होंने कहा, यह योजना छोटे दुकानदारों को वाई-फाई सेवा प्रदान करने में सक्षम करेगी, इससे आय में वृद्धि होगी और युवाओं को निर्बाध इंटरनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी. यह डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूत करेगा."

आइये अब पीएम वाणी (PM-WANI) के बारे में अध्ययन करते हैं

सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क सेवा को पीएम वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफेस या पीएम वाणी (PM-WANI) योजना  कहा जाता है. यह सार्वजनिक डेटा कार्यालय एग्रीगेटर्स या PDOAs द्वारा स्थापित किया जाएगा और सार्वजनिक डेटा कार्यालयों या PDO के माध्यम से वाई-फाई सेवा प्रदान करेगा. इसके तहत ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने के लिए किसी प्रकार का लाइसेंस शुल्क नहीं लिया जाएगा.

इसमें विभिन्न हितधारक शामिल होंगे जैसे PDO, PDOAS, एप प्रदाताओं और एक केंद्रीय रजिस्ट्री. पीएम वाणी (PM-WANI) के बुनियादी ढाँचे को एक पिरामिड के रूप में स्ट्रक्चर्ड किया जा सकता है. साथ ही आपको बता दें कि सभी ऐप प्रदाताओं, पीडीओए और पीडीओ के विवरण का रिकॉर्ड रखने के लिये एक केंद्रीय रजिस्ट्री स्थापित की जाएगी. सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DoT) इस रजिस्ट्री की देखरेख करेगा.

भारत में सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क की आवश्यकता क्यों है?

इस पहल के माध्यम से, देश में उद्यमियों के लिए व्यापार करने में आसानी होगी और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा.

यह कदम सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के माध्यम से ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवाओं के प्रसार की प्रक्रिया को भी तेज करेगा. यानी पर्याप्त मोबाइल डेटा कवरेज वाले शहरी क्षेत्रों में भी, मोबाइल इंटरनेट टैरिफ में वृद्धि होगी.

इससे सामान्य नागरिक को लागत प्रभावी विकल्प उपलब्ध होंगे.

यह डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.

पीएम वाणी (PM-WANI): प्रक्रिया

सार्वजनिक वाई-फाई एक्सेस नेटवर्क इंटरफ़ेस विभिन्न प्लेयर्स द्वारा संचालित एक इको-सिस्टम होगा. पीएम वाणी योजना निम्नलिखित के जरिए काम करेगी:

1. सार्वजनिक डेटा कार्यालय (Public Data Office, PDO): ये इकाइयाँ वाणी अनुरूप वाई-फाई पहुँच बिंदुओं के संचालन, स्थापना में मदद करेंगी. ये ग्राहकों को ब्रॉडबैंड सेवा भी प्रदान करेगी.

2. पब्लिक डेटा ऑफिस एग्रीगेटर (Public Data Office Aggregator, PDOA): ये PDOs को एकत्रित करेंगे और प्राधिकरण और लेखा सहित सभी कार्यों को पूरा करेंगे.

3. ऐप प्रदाता (App Provider): एक ऐसा एप्लिकेशन कार्ड पर होगा जो उपयोगकर्ताओं को पंजीकृत करेगा और स्थानीय क्षेत्र के सभी वाणी-अनुरूप वाई-फाई हॉटस्पॉट की भी तलाश करेगा. यह इंटरनेट सेवा तक पहुँचने के लिए आवेदन के भीतर प्रदर्शित किया जाएगा.

4. केंद्रीय रजिस्ट्री (Central Registry): ऐप प्रदाताओं, PDOAs, साथ ही PDOs के विवरण को बनाए रखने वाली एक केंद्रीय रजिस्ट्री भी होगी. इस केंद्रीय रजिस्ट्री का रखरखाव C-DoT या टेलीमैटिक्स सेंटर फॉर डेवलपमेंट द्वारा किया जाएगा.

आइये अब पीएम वाणी (PM-WANI) योजना के उद्देश्य और लाभ के बारे में अध्ययन करते हैं.

- पीएम वाणी (PM-WANI) योजना व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देकर अधिक व्यापार के अनुकूल वातावरण बनाएगी. यानी यह ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) और ईज़ ऑफ लिविंग (Ease of Living) को और आगे बढ़ाएगी और यह छोटे दुकानदारों को वाई-फाई सेवा प्रदान करने में सक्षम करेगा.

- इसका उद्देश्य COVID-19 महामारी के दौरान भी आवश्यकता के रूप में सामने आए हाई-स्पीड इंटरनेट को उपलब्ध कराना है. 

- हाई-स्पीड इंटरनेट उन क्षेत्रों में सुलभ नहीं है, जिनमें 4G मोबाइल कवरेज नहीं है. पीएम वाणी (PM-WANI) योजना का उद्देश्य सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क सेवा को उपलब्ध कराना है. 

- इस योजना में बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी के लिये लागत-प्रभावी साधन उपलब्ध कराना है.

- सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के प्रसार से रोजगार को बढ़ावा मिलेगा. यानी इस योजना के तहत 2 करोड़ से अधिक नौकरियों और उद्यमशीलता के अवसरों के सृजन की क्षमता है.

- छोटे और मध्यम व्यापारियों के हाथों में डिस्पोजेबल आय में वृद्धि की भी उम्मीद है और इससे जीडीपी में वृद्धि होगी.

- सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट के उपयोग से पूरे देश में इन्टरनेट एक्सेस को बढ़ावा मिलेगा.

क्या सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क के वैश्विक उदाहरण हैं?

अधिकांश यूरोपीय देशों और कुछ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में, सार्वजनिक वाई-फाई की अवधारणा एक विकेंद्रीकृत नेटवर्क की है, जहां दुकानों, रेस्तरां और कैफे, सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं ने अपने दम पर वायरलेस इंटरनेट को रोल आउट किया है. हालांकि, दुनिया भर में सार्वजनिक हॉटस्पॉट की संख्या बढ़ रही है.

सिस्को वार्षिक इंटरनेट रिपोर्ट (2018-2023) के अनुसार, 2023 तक दुनिया भर में लगभग 623 मिलियन सार्वजनिक वाई-फाई हॉटस्पॉट होंगे, 2018 तक 169 मिलियन हॉटस्पॉट थे. साथ ही 2023 तक एशिया प्रशांत क्षेत्र में 46% यानी सबसे ज्यादा हॉट स्पॉट के शेयर होंगे. सिस्को के अनुमानों के आधार पर, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की गणना के अनुसार, भारत में 2023 तक 100 मिलियन वाई-फाई हॉटस्पॉट हो सकते हैं.

इसमें कोई संदेह नहीं है कि पीएम वाणी (PM-WANI) योजना को शुरू करने का यह सरकार का कदम सराहनीय है और इससे हॉटस्पॉट की संख्या बढ़ने की उम्मीद है.

जानें 5G नेटवर्क की विशेषताएं क्या हैं

 

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