भारत में सिक्का ना लेने पर क्या सजा हो सकती है?

दरअसल रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रलाय के पास पूरे देश से ख़बरें आ रहीं हैं कि दुकानदार और ग्रहकों के साथ बैंक भी सिक्के लेने से मना कर रहे हैं. इस तरह लोग जाने अनजाने एक जुर्म कर रहे हैं जो कि अपराध की श्रेणी में आता है.

भारतीय रिजर्व बैंक भारत का सर्वोच्च मौद्रिक प्राधिकरण है. यह 2 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक के नोटों को प्रिंट करने के लिए अधिकृत है. एक रुपये का नोट आरबीआई के बजाय वित्त मंत्रालय द्वारा मुद्रित किया जाता है और उस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं.

सिक्का अधिनियम 2011: भारत में सिक्कों के साथ क्या नहीं कर सकते

यदि कोई व्यक्ति किसी भी सिक्के (यदि सिक्का चलन में है) को लेने से मना करता है तो उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जा सकती है. उसके खिलाफ भारतीय मुद्रा अधिनियम व आइपीसी की धाराओं के तहत कार्रवाई होगी. मामले की शिकायत रिजर्व बैंक में भी की जा सकती है.

सिक्का ना लेने पर सजा और जुर्माना

सिक्का अधिनियम, 2011 की धारा 6 के तहत रिजर्व बैंक द्वारा जारी सिक्के भुगतान के लिए वैध मुद्रा हैं बशर्ते कि सिक्के को जाली नहीं बनाया गया हो.

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत नोट या सिक्के का जाली मुद्रण, जाली नोट या सिक्के चलाना और सही सिक्कों को लेने से मना करना अपराध है. इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक जुर्माना, कारावास या दोनों का प्रावधान है.

अगर कोई व्यक्ति वैध सिक्के को लेने से मना करता है तो आप तुरंत उसका वीडियो बनायें और पास के थाने में शिकायत दर्ज कराएँ. पुलिस को उस व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही करनी ही पड़ेगी.

अफवाह फ़ैलाने की सजा;

जो लोग सही सिक्के को भी नकली बताकर अफवाह फैलाते हैं उनके लिए भी सजा का प्रावधान है. अफवाह फैलाने वालों पर आरबीआई के नियम के अलावा आईपीसी की धारा 505 के तहत भी मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा सकती है. इसमें अधिकतम 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है जबकि सिक्के को गलाना एक अपराध है जिसमें 7 साल की सजा हो सकती है.

कौन से सिक्के बंद हो गये हैं;

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने 30 जून 2011 से बहुत ही कम वैल्यू के सिक्के जैसे 1 पैसे, 2 पैसे, 3 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे मूल्यवर्ग के सिक्के संचलन से वापस लिए गए हैं. इसलिए ये वैध मुद्रा नहीं हैं और कोई भी दुकानदार और बैंक वाला इन्हें लेने से मना कर सकता है.

नोट: ध्यान रहे कि 50 पैसा अभी भारत में वैध सिक्का है और दुकानदार और पब्लिक उसको लेने से मना नहीं कर सकते हैं.

तो आप समझ गये होंगे कि वैध सिक्कों को ना लेना एक अपराध है क्योंकि सिक्का भारत सरकार के द्वारा जारी किया गया आदेश होता है. यदि कोई व्यक्ति या संस्था सिक्कों को लेने से मना करती है तो इसका सीधा मतलब है कि वह सरकार के आदेश को मानने से इंकार कर रहा है. इसलिए उसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी.

नोट पर क्यों लिखा होता है कि “मैं धारक को 100 रुपये अदा करने का वचन देता हूँ.”

जानें भारत में एक नोट और सिक्के को छापने में कितनी लागत आती है?

Advertisement

Related Categories

Popular

View More