स्मार्ट बॉल: माइक्रोचिप वाली क्रिकेट बॉल

आजकल का क्रिकेट तकनीकी क्रांति से गुजर रहा है. क्रिकेट के खेल में पहले से ही; स्मार्ट बैट, अल्ट्रा-एज, स्निक-ओ-मीटर, द बॉल गेज, द लाइट-ओ-मीटर, द प्रोटेक्टिव शील्ड, हॉके, काउंटर, हॉटस्पॉट और स्टंप माइक्रोफोन जैसी तकनीकी का प्रयोग किया जा रहा है. अब इसमें एक और तकनीकी जुड़ने जा रही है इसका नाम है, स्मार्ट बॉल.

स्मार्ट बॉल का विचार ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज माइकल कास्परोविक ने इजाद किया है. इस गेंद का निर्माण फर्म स्पोर्टकोर द्वारा ऑस्ट्रेलियाई बॉल निर्माता कूकाबुरा के साथ मिलकर किया जायेगा.

स्मार्ट बॉल में इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकी: (Technology used in the Smart Ball)
स्मार्ट बॉल, एक माइक्रो-चिप के साथ आती है, जो बॉल की सबसे अंदर की परत में रखी होती है. इसके बाद इस पर लेदर और रबर की परतें लपेटी जाती हैं. फिर अन्य क्रिकेट गेंदों की तरह गेंदों के विभिन्न टुकड़ों को सिलकर बॉल को बनाया जाता है. यह स्मार्ट बॉल, सामान्य क्रिकेट बॉल की तरह दिखती, दौड़ती और टप्पा खाती है.

इस बॉल में लगी चिप की लाइफ 18 महीने की होगी और चिप की बैटरी को 8 घंटे तक चार्ज रखा जा सकता है. हालाँकि इसे कभी भी चार्ज भी किया जा सकता है.

स्मार्ट बॉल की विशेषताएं और लाभ (Features and benefits of Smart ball):

बॉल के अंदर की चिप; जिस डिवाइस;फोन, स्मार्ट वॉच या टैबलेट ऐप से कनेक्ट होती है उसको सूचना भेजती रहती है. यह सूचना मुख्य रूप से फेंकने के समय, टप्पा खाने के बाद और टप्पा खाने से पहले बॉल की गति से जुडी होती है. 

खेल की गोपनीयता बनाए रखने के लिए गेंद के टर्न होने पर बने कोण की जानकारी बॉलर को नहीं मिलेगी. हालाँकि स्मार्ट बॉल के निर्माताओं के अनुसार, स्मार्ट बॉल सटीक उछाल, स्विंग, ड्रिफ्ट और डिप जैसी जानकारी देने में भी सक्षम होगी, लेकिन बॉलर को तुरंत यह सूचना नहीं दी जाएगी.

यह महत्वपूर्ण विवरण डेटा विश्लेषकों और कोचिंग स्टाफ को विभिन्न गेंदबाजों की गेंदबाजी का विश्लेषण करने में मदद करेगा. उनकी कमियों और अच्छाइयों के बारे में भी बताएगा.

अंपायर को लाभ (Benefits to Umpire)

स्मार्ट बॉल के इस्तेमाल से अंपायर को निचले स्तर के कैच, एलबीडब्ल्यू और विकेट कीपर द्वारा पीछे पकड़े जाने वाले कैच आदि से संबंधित मामलों पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी.

स्मार्ट बॉल से चुनौतियां: अब तक बॉल निर्माता बॉल का परीक्षण कर रहे हैं, और ये परीक्षण कम से कम एक साल और चलेंगे इसके बाद इसके परीक्षणों का अध्ययन किया जायेगा कि इस बॉल को इस्तेमाल करने में किस तरह की समस्याएं आ रहीं हैं और क्या इसका इस्तेमाल इंटरनेशनल क्रिकेट में किया जाये या नहीं?

हालाँकि इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बॉल कितनी देर चलेगी अगर बॉल को जल्दी-जल्दी बदला जायेगा तो खेल किस तरह से प्रभावित होगा? ऐसा हो सकता है कि बॉल को बार-बार बदलने से बल्लेबाजों के लिए रन बनाना मुश्किल हो सकता है और मैच लो स्कोरिंग हो सकते हैं.

इस साल दिसंबर में क्लब स्तर के टूर्नामेंट में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. 17 दिसंबर से ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी20 प्रतियोगिता बिग बैश लीग शुरू होनी है. ऐसा हो सकता है कि स्मार्ट बॉल का इस्तेमाल बैश लीग में किया जा सकता है.

इसलिए स्मार्ट बॉल के निर्माताओं को न केवल गेंद की लॉन्ग लाइफ सुनिश्चित करनी होगी, बल्कि खेल की गुणवत्ता भी सुनिश्चित करनी होगी.

अंत में इतना कहना ठीक होगा कि स्मार्ट बॉल के द्वारा खेल के दौरान किसी तरह की बेहद महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इससे खेल की मौलिकता ख़त्म होने का खतरा है. अतः तकनीकी का इस्तेमाल खेल के रोमांच को बढ़ाने के लिए होना चाहिए ना कि उसको एक मशीनी खेल बनाने के लिए.

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