क्रिकेट में खिलाड़ी कैसे-कैसे अन्धविश्वास रखते हैं?

हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में सफल होना चाहता है इसलिए लिए वह बहुत मेहनत भी कर्ता है लेकिन कभी-कभी बहुत मेहनत के बाद भी परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं आते हैं तो वह अन्धविश्वास या जादू टोना या अन्य तरह के टोटकों में विश्वास करने लगता है. बिल्ली के रास्ता काट जाने पर थोड़ी देर के रुकना या फिर किसी को छींक आने पर रुकना इत्यादि इन्हीं टोटको या अंधविश्वासों के उदाहरण हैं.

इस लेख में हम आपको क्रिकेट की दुनिया में सफलता पाने के लिए विभिन्न देशों के खिलाडियों द्वारा किये जाने वाले रोचक टोटकों या अंधविश्वासों के बारे में जानेंगे.

आपने देखा होगा कि खेल के दौरान लगभग हर बल्लेबाज क्रीज के बीच में एक-दूसरे के बल्ले को हल्के से मिलाते हैं. इसमें उनका यह टोटका होता है कि उनकी जोड़ी टूटेगी नहीं.

एक और उदाहरण देखते हैं जब 1983 के वर्ल्ड कप मुकाबले में भारत और जिम्बाब्वे के बीच मैच में कपिल देव अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे उस वक्त टीम मैनेजमेंट ने सभी खिलाडियों को हिदायत दी गयी थी कि कोई भी खिलाड़ी कपिल के आउट होने से पहले अपनी जगह से नहीं हिलेगा.

इस टोटके के पीछे टीम प्रबंधन का अंधविश्वास था कि अगर कोई खिलाड़ी अपनी जगह से हिलेगा तो कपिल देव आउट हो जाएंगे और संयोग की बात देखिये कि कपिल ने इस मैच में नॉट आउट 175 रन बनाये थे और भारत ने यह मैच जीता था.

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आइये कुछ बड़े खिलाडियों द्वारा अपनाये जाने वाले टोटकों या अंधविश्वासों के बारे में जानते हैं;

1. सचिन तेंदुलकर: इन्हें सदी का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी माना जाता है लेकिन सचिन भी टोटकों में विश्वास करते थे. जैसे सचिन तेंडुलकर हमेशा मैदान में उतरने से पहले बाएं पैर का पैड पहले पहनते थे. इसके अलावा सचिन अपने बैग में साईं बाबा की तस्वीर भी रखते थे.

2. वीरेंद्र सहवाग: सहवाग, 2011 वर्ल्ड कप के पहले मैच में बांग्लादेश के खिलाफ बगैर नंबरवाली शर्ट पहन कर खेले थे और इस मैच में सहवाग ने 175 रन बनाये थे और भारत ने मैच जीता था. सहवाग इससे पहले 44 नम्बर और 46 नम्बर की टी शर्ट पहनते थे. लेकिन ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने बिना नम्बर वाली टी शर्ट पहननी शुरू की थी.

सहवाग अपनी बाईं जेब में लाल रूमाल रखते थे. इसके अलावा वे हमेशा विरोधी टीम का समर्थन करते नजर आते हैं. उनका अंधविश्वास था कि जब भी वे भारत का समर्थन करते हैं तो टीम हार जाती है.

3. सौरव गांगुली: गांगुली मैदान में उतरने से पहले हमेशा अपने गुरूजी की तस्वीर अपनी जेब में रखते थे. इसके अलावा वो अंगूठी और चांदी की माला भी पहनते थे. गांगुली का मानना था कि ये उनके लक को बढ़ाते हैं.

4. राहुल द्रविड़: द्रविड़ बल्लेबाजी के लिए उतरते समय हमेशा पहले दांया पैर मैदान में रखते थे और तैयार होते समय अपना दायां थाई पैड पहले पहनते थे. इसके अलावा द्रविड़ किसी भी सीरीज के बीच में कोई नया बल्ला नहीं आजमाते थे.

5. श्रीशांत: सट्टेबाजी में फसे श्रीशांत अपने खिलाडियों के साथ बस में सफर के दौरान उतरते वक्त सबसे अंत में उतरते थे. उनका मानना था कि, बस से सबसे आखिर में उतरने पर उनकी गेंदबाजी अच्छी होती है.

इसके अलावा श्रीसंत अपने पास हमेशा पसंदीदा क्रिकेट के मैदानों की (जहां उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है) और अपने दोस्तों की एक छोटी एल्बम रखते थे.

6. मोहम्मद अजहरूद्दीन: अपनी कलाई की मदद से शॉट खेलने में मशहूर अजहर अपने अच्छे लक के लिए हमेशा अपने गले में एक काली ताबीज पहनते थे. खास बात ये थी कि जब भी वो बल्लेबाजी के लिए मैदान में उतरते थे इस ताबीज को शर्ट के बाहर निकाल लेते थे. ये मामला फिल्म “कुली” और “दीवार” में अमिताभ के बिल्ला नंबर 786 जैसा ही है. इसके अलावा बल्लेबाजी के दौरान अजहर अपनी शर्ट की कॉलर को हमेशा खड़ा रखते थे.

7. सुनील गावस्कर: भारत के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में से एक लिटिल गावस्कर मैदान में बायां पैर रखकर बल्लेबाजी करने उतरते थे. गावस्कर और उनके सलामी जोड़ीदार रहे के. श्रीकांत हमेशा मैदान में रन दौड़ते समय अपने जोड़ीदार को दाएं साइड से क्रॉस करते थे.

8. गौतम गंभीर: हाल ही में क्रिकेट से सन्यास लेने वाले गौतम गंभीर एक अलग तरीके का टोटका अजमाते थे. आईपीएल के दौरान देखा गया कि जब वे आउट होकर लौटते थे तो अपने पैड नहीं उतारते थे. क्योंकि उनका विश्वास था कि ऐसा करने से उनकी टीम जल्दी आउट नहीं होती थी.

9. डेल स्टेन और ब्रेट ली: डेल स्टेन और ब्रेट ली मैदान में घुसते समय अपना बायां पैर पहले रखते थे. स्टेन का मानना है कि ऐसा करने से उनका लक मैदान में साथ देता है.

10. स्टीव वॉ: स्टीव वॉ बल्लेबाजी के दौरान हमेशा अपनी जेब में लाल रूमाल रखते थे. ये रूमाल उनकी दादी ने उनको गिफ्ट में दिया दिया था और स्टीव वॉ इसे खुद के लिए लकी मानते थे.

11. लसिथ मालिंगा: श्रीलंका टीम के मशहूर तेज गेंदबाज़ लेसिथ मालिंगा अच्छी गेंदबाजी के लिए एक टोटका आजमाते है वह हर गेंद को डालने से पहले उसे चूमते हैं.

ऐसा नहीं हैं कि सिर्फ खिलाड़ी ही टोटका अजमाते हैं बल्कि क्रिकेट के अच्छे अंपायर रहे डेविड शेफर्ड, नेलशन के स्कोर (जैसे 111, 222 या 333 इत्यादि) होता था तो वे एक पैर पर खड़े हो जाते थे. उनका मानना था कि ये नंबर बहुत से लोगों के लिए दुर्भाग्यशाली है इसलिए वे उस दुर्भाग्य को टालने के लिए एक पैर पर खड़े हो जाते थे.

सारांश में यही कहना ठीक होगा कि टोटके सिर्फ विश्वास पर आधारित होते हैं. जिसके साथ एक दो बार यह काम कर जाता है तो व्यक्ति इसको बंद करने का रिस्क नहीं लेना चाहता है. ऐसे टोटके हम दर्शकों में से भी कई लोग करते हैं जिसे कुछ लोग भारत को जिताने के लिए पैरों की चप्पल को उल्टा पहनते हैं.

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