T-20 मैचों के लिए 13 नियम जो आपको पता नहीं होंगे

T-20 क्रिकेट समय की कमी को ध्यान में रखते हुए बहुत ही सटीक खेल है. इसमें टेस्ट मैच और एक दिवसीय मैचों की तरह 5 दिन या पूरे दिन मैच को नहीं देखना पड़ता है. T-20 में पूरा मैच लगभग 6 घन्टों में ख़त्म हो जाता है. विश्व में क्रिकेट के खेल की सबसे बड़ी संचालक संस्था अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् (ICC) द्वारा समय-समय पर क्रिकेट को और भी रोचक बनाने हेतु नये नये नियमों को लागू किया जाता रहा है. आइये इस लेख में जानते हैं कि T-20 खेलों के लिए ICC ने क्या नियम बनाये हैं.

1. यदि किसी मैच में दूसरी पारी खेल रही टीम 5 ओवर भी बैटिंग नहीं कर पाती है और बारिश के कारण मैच रुक जाता है तो ऐसी स्थिति में डकवर्थ / लुईस के माध्यम से फैसला नहीं किया जा सकता है. अर्थात T-20 मैच में डकवर्थ / लुईस के माध्यम से मैच का परिणाम जानने के लिए कम से कम 5 ओवर का मैच होना जरूरी होता है.

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2. मैच के शुरू होने से पहले कम से कम 2 स्कोरर्स की नियुक्ति की जाती है. इनका काम सभी रनों की गिनती, बनाए गए रिकॉर्ड, विकेट और ओवर की गणना करना इत्यादि होता है. अंपायर अपने सभी निर्णयों के द्वारा स्कोरर्स को इशारा करता है.

3. अंपायर द्वारा शोर्ट रन का इशारा उसके कंधे पर हाथों से उँगलियों को छुआकर किया जाता है. शोर्ट रन तब माना जाता है जब कोई बल्लेबाज रन लेते समय अपना बल्ला क्रीज केर अंदर नही रखता हैं.

4. होम क्रिकेट बोर्ड द्वारा T-20 क्रिकेट के लिए अनुमोदित मानक की सफेद क्रिकेट गेंद और एक मैच के दौरान बदलने के लिए अतिरिक्त गेंदों को उपलब्ध कराता है.

नोट: होम बोर्ड का यह दायित्व होता है कि वह मेहमान टीम के बोर्ड को खेल में प्रयुक्त होने वाली गेंद के ब्रांड के बारे में 30 दिन पहले जानकारी दे.

5. मैच शुरू होने से पहले चौथा अंपायर ड्रेसिंग रूम में कम से कम 6 नई गेंदों वाला एक बॉक्स लेकर जाता है जिसकी निगरानी में बॉल का चयन किया जाता है. फील्डिंग कप्तान या उसके द्वारा कोई नामित खिलाड़ी ही होम बोर्ड द्वारा उपलब्ध करायी गयी गेंद का चयन कर सकता है.

6. बल्ले का हैंडल मुख्य रूप से केन या लकड़ी का बना होना चाहिए जबकि बल्ले का ब्लेड पूरी तरह से केवल लकड़ी का बना ही होना चाहिए. अर्थात इंटरनेशनल क्रिकेट में प्लास्टिक से बने बैट इस्तेमाल नहीं किये जा सकते हैं.

7. बल्ले की मरम्मत कैसे कर सकते हैं: बल्ले के ब्लेड की मरम्मत के लिए केवल लकड़ी के बने मटेरियल का ही इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें किसी प्रकार के प्लाटिक के मटेरियल का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

8. बल्ले की कुल लंबाई 38 इंच या 96.52 सेमी. से अधिक नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा यह भी नियम है कि बल्ले के हैंडल की कुल लंबाई बल्ले की कुल लम्बाई के 52% से अधिक नहीं होनी चाहिए.

9. पिच का आकार आयताकार होगा जो कि 22 गज या 20.12 मीटर लम्बा होगा और 10 फीट / 3.05 मीटर चौंडा होगा.

10. चौथा अंपायर यह सुनिश्चित करेगा कि, खेल की शुरुआत से पहले और किसी भी अंतराल के दौरान, केवल अधिकृत कर्मचारी, आईसीसी मैच के अधिकारी, खिलाडी, टीम कोच और अधिकृत टेलीविजन कर्मियों को ही पिच का निरिक्षण करने की अनुमति होगी.

किसी को भी मैच से पहले पिच पर गेंद को उछालने की अनुमति नहीं दी जाएगी, या बल्ले से शॉट को खेलने की अनुमति नहीं होगी.

11. पॉपिंग क्रीज़, बोलिंग क्रीज के ठीक सामने होती है और इन दोनों के बीच की दूरी 4 फीट होती है. पॉपिंग क्रीज़ को पिच पर कम से कम 15 गज की दूरी पर बनाया जाता है.

12. T-20 मैच में हर घंटे में कम से कम 14.11 ओवर फेंके ही जाने चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है तो बोलिंग साइड के कप्तान पर मैच रेफरी द्वारा स्लो रेट के कारण पेनल्टी लगायी जाती है.

13. यदि किसी मैच में दोनों टीमों का स्कोर बराबर हो जाता है तो फिर मैच का फैसला सुपर ओवर के माध्यम से होता है. सुपर ओवर में जो टीम ज्यादा रन बनाती है उसे जीता घोषित कर दिया जाता है. एक दिवसीय और टेस्ट मैचों में सुपर ओवर नहीं होता है.

सारांश के तौर पर यह कहा जा सकता है कि वैसे तो क्रिकेट के सामान्य नियमों को लगभग हर क्रिकेट प्रेमी जानता है लेकिन ऊपर लिखे गए नियम बहुत कम ही लोगों को पता होते हैं जिसके कारण उनको खेल में उतना आनंद नहीं मिलता है जितना मिलना चाहिए होता है. इसके अलावा ऊपर लिखे गए नियम बहुत से इंटरव्यू में भी अक्सर पूछे जाते हैं इसलिए इन नियमों पर विशेष ध्यान दें.

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