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Telangana's Ramappa Temple: विश्व धरोहर में शामिल हुआ भगवान शिव का हजार खम्बों वाला मंदिर, UNESCO ने दी मान्यता

Shikha Goyal

तेलंगाना के पालमपेट में 13वीं शताब्दी के रामप्पा मंदिर को रविवार (25 जुलाई, 2021) को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई है. चीन में रविवार को आयोजित यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति के 44वें सत्र में यह फैसला लिया गया.

रामप्पा मंदिर के अलावा, विश्व धरोहर समिति ने Quanzhou: एम्पोरियम ऑफ द वर्ल्ड इन सॉन्ग-युआन चाइना (चीन), ट्रांस-ईरानी रेलवे (ईरान), और  Paseo del Prado और Buen Retiro, कला और विज्ञान का एक परिदृश्य (स्पेन), यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल किया.

रामप्पा मंदिर, एक 13वीं शताब्दी का मंदिर है जिसका नाम इसके वास्तुकार, रामप्पा के नाम पर रखा गया था, को सरकार द्वारा वर्ष 2019 के लिए यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल टैग के लिए एकमात्र नामांकन के रूप में प्रस्तावित किया गया था.  2014 से  यह मंदिर यूनेस्को की अस्थायी सूची में था. 

जैसे ही घोषणा हुई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया: “सभी को बधाई, खासकर तेलंगाना के लोगों को. प्रतिष्ठित रामप्पा मंदिर महान काकतीय वंश के उत्कृष्ट शिल्प कौशल को प्रदर्शित करता है. मैं आप सभी से इस राजसी मंदिर परिसर की यात्रा करने और इसकी भव्यता का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करने का आग्रह करता हूं."

वर्ल्ड हेरिटेज साइट टैग क्या है?

एक विश्व धरोहर स्थल "उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य" वाला स्थान है. यह "सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व को दर्शाता है.” इसमें शामिल होने के लिए, साइटों को दस चयन मानदंडों में से कम से कम एक को पूरा करना होता है.

इनमें मानव रचनात्मक प्रतिभा की उत्कृष्ट कृति का प्रतिनिधित्व करने वाली साइट शामिल है, जो समय के साथ या दुनिया के सांस्कृतिक क्षेत्र के भीतर मानवीय मूल्यों के एक महत्वपूर्ण आदान-प्रदान का प्रदर्शन करती है, जो सांस्कृतिक परंपरा के लिए एक अद्वितीय या असाधारण गवाही देती है या पारंपरिक मानव बस्ती का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. 

यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार 2004 के अंत तक, विश्व धरोहर स्थलों को छह सांस्कृतिक और चार प्राकृतिक मानदंडों के आधार पर चुना जाता था. लेकिन विश्व विरासत सम्मेलन के कार्यान्वयन के लिए संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों को अपनाने के बाद, दस मानदंडों में से केवल एक सेट मौजूद होगा.

ऐसा कहा जाता है कि 21 सदस्य देशों में से 17 ने इसका समर्थन किया था. इसके साथ, भारत में यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में 39 स्थल हैं, और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) अब 23 विश्व धरोहर स्थलों का संरक्षक है.

आइये अब रामप्पा मंदिर से जुड़े तथ्यों को अध्ययन करते हैं 

मंदिर पालमपेट गांव में स्थित है, जो तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से लगभग 200 किमी उत्तर में है.

मंदिर परिसर काकतीय शासक गणपति देव की अवधि के दौरान सेनापति रचेरला रुद्र रेड्डी (Racherla Rudra Reddy) द्वारा बनाया गया था.

यह बलुआ पत्थर का उपयोग करके बनाया गया था और इसका निर्माण, 1213 CE में शुरू हुआ था, माना जाता है कि यह चार दशकों से अधिक समय तक जारी रहा.

रामप्पा मुख्य रूप से शिव मंदिर है, जिसमें कई छोटे मंदिर और संरचनाएं शामिल हैं.

इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि इसे ईंटों से बनाया गया है जो इतनी हल्की हैं कि ये आसानी से पानी पर तैर सकती हैं.

आप एक शाही बगीचे के माध्यम से मंदिर तक पहुँच सकते हैं, जो अब पेड़ों से पक्के रास्ते के साथ एक लॉन में सिमट गया है.

मंदिर के अंदर शिवलिंगम नौ फीट का है. मंदिर में मूर्तियों को कठोर डोलराइट पत्थर से उकेरा गया है.

मंदिर की विशिष्ट विशेषताओं में से एक नंदी मंडपम में नंदी की मूर्ति है, जो भगवान शिव के मंदिर के सामने है. ऐसा कहा जाता है कि शिव मंदिरों में अन्य जगहों पर नंदी की मूर्तियों के विपरीत, यह राजसी नंदी प्रतिमा एक "सावधान" मुद्रा में है.

मंदिर के खंभों पर बनाई गई मूर्तियां सुंदर संरचना का एक और आकर्षण केंद्र है. ऐसा कहा जाता है कि स्तम्भ से टकराने पर संगीतमय ध्वनि आती है.

मंदिर के गर्भगृह में, दीवारों को रामायण और शिव पुराण, और अन्य प्राचीन ग्रंथों के महाकाव्यों के दृश्यों के साथ उकेरा गया है.

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