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सुपोषण क्या है और जलीय पारिस्थितिक तंत्र को कैसे प्रभावित करता है?

जीवों में विभिन्न प्रकार के जैविक कार्यों के संचलन एवं संपादन के लिए पोषक तत्व आवश्यक होते है और जिसे वो अपने वातावरण से ग्रहण करता है। उसी प्रकार पारिस्थितिक तंत्र को भी पोषक तत्व की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आपने ये सोचा है की यही पोषक तत्व अगर संतुलित ना हो तो क्या होगा।  

सुपोषण (Eutrophication) क्या है?

सुपोषण (Eutrophication) शब्द का उदभव ग्रीक शब्द 'यूट्रोफॉस' से हुआ है जिसका अर्थ है पोषण या समृद्ध। पर्यावरण के संदर्भ में, किसी जलाशय को पोषक तत्वों से समृद्ध करना सुपोषण (Eutrophication) कहलाता है। सुपोषण की प्रक्रिया में जलाशय में पौधों तथा शैवाल ( algae) का विकास होता है। इसके अलावा जल में बायोमास की उपस्थिति के कारण उस जल में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इसका एक उदाहरण जल में पोषक तत्वों के उच्च स्तर के कारण उसमें 'ब्लूम' पैदा होना है। सुपोषण प्रायः जलीय तन्त्र में फॉस्फेट-युक्त डिटरजेन्टों, उर्वरकों और मलजल के मिलने के कारण उत्पन्न होता है।

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सुपोषण (Eutrophication) के प्रकार

सुपोषण (Eutrophication) दो प्रकार का होता है जिसकी व्याख्या नीचे की गयी है:

1. प्राकृतिक सुपोषण (Eutrophication):  झील जैसे जल श्रोत में पोषक तत्वो का संवर्धन होना इस प्रकार की सुपोषण (Eutrophication की विशेषता है। इस प्रक्रिया के दौरान एक ओलिगोट्रोफिक झील एक यूट्रोफिक झील में परिवर्तित हो जाती है। यह पादप प्लवक (phytoplankton), शैवाल का खिलना (algal blooms) और जलीय वनस्पति (aquatic vegetation) के उत्पादन में भरपूर सहायता करता है जो बदले में वनस्पतिजीवी तथा मछली के लिए पर्याप्त भोजन प्रदान करता है।

2. सांस्कृतिक सुपोषण (Eutrophication): यह मानव गतिविधियों के कारण होता है क्योंकि वे झील और धारा में 80% नाइट्रोजन और 75% फॉस्फोरस की एकाग्रता के लिए जिम्मेदार है।

सांस्कृतिक सुपोषण (Eutrophication) के कारण

1. उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग

2. पशु खाद्य संचालन (सीएएफओ) प्रदूषण पोषक तत्वों का एक प्रमुख स्रोत हैं।

3. औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट

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सुपोषण जलीय पारिस्थितिक तंत्र को किस प्रकार से प्रभावित करता है?

1. नदी, झील, धारा या सागर जैसे जल निकायों को प्रकाश मिलता है लेकिन शैवाल (algal) के खिलने से जलीय जीव को प्रकाश संश्लेषण में रुकावट पैदा हो सकती है।

2. अगर प्रकाश संश्लेषण सही तरीके से नहीं होगा तो पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी और जलीय प्रजातियां विलुप्ती के कागर पर पहुच सकती हैं।

3. उचित प्रकाश संश्लेषण नहीं मिलने के कारण मृत क्षेत्रों का निर्माण हो सकता है जो न केवल नकारात्मक तरीके से पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर सकता है  बल्कि आर्थिक तौर पर प्रभावित कर सकता है।

4. सुपोषण के कारण पानी का स्वाद बदल सकता है और गंध रहित हो सकता है, जिससे पर्यटन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके रोक धाम के लिए सरकार को अपशिष्ट जल उपचार में अधिक निवेश करना पड़ेगा नहीं तो इसका दुष्परिणाम बहुत ही बृहद हो सकता है।

सुपोषण (Eutrophication) के निवारक उपाय

1. औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट जल उपचार जल निकायों में अपने निर्वहन से पहले किया जाना चाहिए।

2. कटाई के माध्यम से पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण

3. शैवाल (algal) रक्त को पानी से हटाना

4. अत्याधिक पोषक तत्वों को हटाने के लिए रसायन जैसे एल्यूम, चूना, लौह और सोडियम एल्यूमिनेट की मदद से भौतिक रसायन पद्धतियों में इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए- फॉस्फोरस को नाइट्रिकेशन या डेनिट्रिफिकेशन द्वारा वर्षा और नाइट्रोजन द्वारा हटाया जा सकता है।

पर्यावरण और पारिस्थितिकीय: समग्र अध्ययन सामग्री

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