भारत का राष्ट्रीय सतत पर्यावरण मिशन क्या है?

सतत विकास सामाजिक-आर्थिक विकास की वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी की सहनशक्ति के अनुसार विकास की बात की जाती हैं। यह अवधारणा 1960 के दशक में तक विकसित हुई जब लोग औधौगीकरण के पर्यावरण पर हानिकारक प्रभावों से अवगत हुए थे। सतत विकास का उदभव प्राकृतिक संसाधनों की समाप्ति तथा उसके कारण आर्थिक क्रियाओं तथा उट्टपादन प्रणालियों के धीमे होने या उनके बंद होने के भय से हुआ है।

वैश्विक स्तर पर बिजली और गर्मी के उत्पादन के बाद परिवहन दूसरा सबसे बड़ा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक क्षेत्र है, जबकि निर्माण क्षेत्र 40% से अधिक ऊर्जा के उपयोग के क्षेत्र है। भारत में निर्माण और परिवहन क्षेत्र ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में प्रमुख योगदानकर्ताओं में से एक है। इसलिए भारत सरकार ने जलवायु परिवर्तन के शमन विकल्प के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) के तहत आठ मिशन शुरू किए हैं।

राष्ट्रीय सतत पर्यावरण मिशन शमन रणनीति के तहत भारत सरकार के आठ जलवायु मिशनों में से एक है। इस नीति को इसलिए सूत्रबद्ध किया गया है ताकि भवनों ऊर्जा क्षमता के सुधार, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन तथा लोग यातायात के प्रकार में परिवर्तन लाया जा सके। इसके अंतर्गत एक महत्वपूर्ण अनुसंधान व विकास कार्यक्रम का संचालन, बायोकेमिकल कन्वर्जन, वेस्ट वाटर यूज, सीवेज यूटिलाइजेशन तथा रिसाइक्लिंग विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

भारत के पर्यावरण आंदोलनों पर संक्षिप्त इतिहास

राष्ट्रीय सतत पर्यावरण मिशन की मुख्य विशेषताएं

1. ऊर्जा संरक्षण भवन कोड का विस्तार - जो अपनी ऊर्जा मांग को अनुकूलित करने के लिए नए और बड़े वाणिज्यिक भवनों के डिजाइन को संबोधित करता हो;

2. सार्वजनिक परिवहन के लिए बेहतर शहरी नियोजन और मोडल शिफ्ट - मध्यम और छोटे शहरों के विकास को सुविधाजनक बनाने के लिए दीर्घकालिक परिवहन योजना इस तरह से बनाए जायेंगे जो कुशल और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन सुनिश्चित करता हो;

3. सामग्री और शहरी अपशिष्ट प्रबंधन का पुनर्चक्रण - विशेष क्षेत्रों में कचरे से बिजली उत्पादन के लिए प्रौद्योगिकी का विकास करना।

4. जहां भी संभव हो, जैव-रासायनिक रूपांतरण, अपशिष्ट जल उपयोग, सीवेज उपयोग और रीसाइक्लिंग विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करते हुए आरएंडडी कार्यक्रम शुरू करना।

राष्ट्रीय बायोगैस और खाद प्रबंधन कार्यक्रम क्या है?

राष्ट्रीय सतत पर्यावरण मिशन के उद्देश्य

1. आवासीय और वाणिज्यिक दोनों क्षेत्रों में वैकल्पिक प्रौद्योगिकियों और ऊर्जा संरक्षण प्रथाओं को बढ़ावा देकर ऊर्जा की मांग को कम करना।

2. बेहतर आपदा प्रबंधन को सक्षम करने की दृष्टि से बेहतर शहरी योजना; शहरी नियोजन के पैटर्न को बढ़ावा देना जो निजी और सार्वजनिक परिवहन के कम उपयोग को सक्षम बनाता है। कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना और प्रोत्साहित करना।

3. विकास के अधिक स्थायी पैटर्न के लिए सामुदायिक भागीदारी और संवाद को प्रोत्साहित करना; हितधारकों की भागीदारी।

4. प्राकृतिक संसाधनों जैसे स्वच्छ हवा, पानी, वनस्पतियों और जीवों का संरक्षण जो स्थायी मानव आवासों के किस्टोन हैं।

यह मिशन भारत के विकास दर्शन का आवर्ती विषयों में से एक है जो व्यापक रूप से मानव कल्याण के लिए लाया गया है। राष्ट्रीय सतत पर्यावरण मिशन का मतलब होगा पर्यावरण के संरक्षण, रोजगार, आश्रय, बुनियादी सेवाओं, सामाजिक बुनियादी ढांचे और परिवहन में इक्विटी के साथ मानव निवास के आर्थिक और सामाजिक विकास के बीच एक संतुलन प्राप्त करना।

पर्यावरण और पारिस्थितिकीय: समग्र अध्ययन सामग्री

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