भारत का राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन क्या है?

भारत की घनी आबादी और उच्च सौर आतपन सौर ऊर्जा को भारत के लिए एक आदर्श ऊर्जा स्रोत बनाता है। किंतु सौर ऊर्जा निरंतर खर्चीली है और इस पर भारी निवेश की जरूरत पड़ती है। सौर ऊर्जा का स्‍वरूप अस्थिर है जिससे इसे ग्रिड में समायोजित करना मुश्किल होता है। लोगों की जागरुकता का अभाव, उच्‍च उत्‍पादन लागत तथा वर्तमान ऊर्जा को छोड़ने की सीमाएं एवं पारेषण (ट्रांसमशिन) नेटवर्क को देशभर में सौर ऊर्जा क्षमता के भरपूर दोहन की दि‍शा में मुख्‍य बाधा के रूप में माना गया है।

इसलिए, भारत सरकार ने राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन शुरू किया है जिसे जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन भी कहा जाता है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा चुनौती को संबोधित करते हुए पारिस्थितिक रूप से स्थायी विकास को बढ़ावा देने के लिए यह भारत सरकार और राज्य सरकारों की एक बड़ी पहल है। यह जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने के वैश्विक प्रयास में भारत द्वारा एक प्रमुख योगदान होगा।

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन क्या है?

इस मिशन को जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन योजना भी बोला जाता है और इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी तथा यह नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज (NAPCC) के आठ मिशनों में से एक है। इस मिशन का लक्ष्य 2022 तक 20 हजार मेगावाट क्षमता वाली ग्रिड से जोड़ी जा सकने वाली सौर बिजली की स्‍थापना और 2 हजार मेगावाट के समतुल्‍य गैर-ग्रिड सौर संचालन के लिए नीतिगत कार्य योजना का विकास करना है। इसमें सौर तापीय तथा प्रकाशवोल्टीय दोनों तकनीकों के प्रयोग का अनुमोदन किया गया। इस मिशन का उद्देश्‍य सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश को वैश्विक नेता के रूप में स्‍थापित करना है। इस मिशन में काफी संभावनाएं हैं क्योंकी यह भारत को दुनिया के सबसे बड़े हरित ऊर्जा उत्पादकों में से एक बना देगा।

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का उद्देश्य

मिशन का मुख्य उद्देश्य अग्रणी धार सौर प्रौद्योगिकियों के सौर विनिर्माण (मूल्य श्रृंखला में) में वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाना है और 2020 तक स्थापित क्षमता के 4-5 गीगावॉट के लक्ष्य को शामिल करना है, जिसमें पाली के लिए समर्पित विनिर्माण क्षमताओं की स्थापना भी शामिल है।

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राष्ट्रीय सौर ऊर्जा मिशन का लक्ष्य

भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्‍थापित क्षमता का लक्ष्‍य निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से तथा पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल है। 2017-18 के लिए 14550 मेगावाट ग्रिड नवीकरणीय ऊर्जा (पवन 4000 मेगावाट, सौर 10000 मेगावाट, लघु पनबिजली ऊर्जा 200 मेगावाट, जैव ऊर्जा 340 मेगावाट एवं अवशिष्‍ट से ऊर्जा 10 मेगावाट) निर्धारित किया गया है।

1. 2022 तक 20 हजार मेगावाट क्षमता वाली-ग्रिड से जुड़ी सौर बिजली पैदा करना।

2. 2022 तक दो करोड़ सौर लाइट सहित 2 हजार मेगावाट क्षमता वाली गैर-ग्रिड सौर संचालन की स्‍थापना करना।

3. 2 करोड़ वर्गमीटर की सौर तापीय संग्राहक क्षेत्र की स्‍थापना करना।

4. देश में सौर उत्‍पादन की क्षमता बढ़ाने वाली का अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करना।

5. 2022 तक ग्रिड समानता का लक्ष्‍य हासिल करने के लिए अनुसंधान और विकास के समर्थन और क्षमता विकास क्रियाओं का बढ़ावा शामिल है।

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