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इंटरनेट शटडाउन क्या है और यह अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?

इंटरनेट शटडाउन एक पूर्ण प्रतिबंध है जिसे सरकार द्वारा जारी किया जाता है ताकि उस जगह पर इंटरनेट सेवाओं का उपयोग ना किया जा सके. यह एक विशिष्ट स्थान और विशिष्ट अवधि, समय या दिनों की संख्या तक सीमित हो सकता है. कभी-कभी यह अनिश्चित समय तक भी बढ़ाया जा सकता है. एक इंटरनेट शटडाउन मोबाइल इंटरनेट तक सीमित हो सकता है जो आप स्मार्टफोन पर उपयोग करते हैं, या वायर्ड ब्रॉडबैंड जो आमतौर पर एक डेस्कटॉप से कनेक्ट हो या फिर दोनों एक ही समय में.

इसे ऐसे भी कहा जा सकता है कि इंटरनेट शटडाउन का मतलब एक ही जगह पर इन्टरनेट का बंद हो जाना या एक ही लोकेशन पर इंटरनेट को बंद कर देना.

इंटरनेट शटडाउन ट्रैकर वेबसाइट के अनुसार 2019 में भारत में लगभग 93 इंटरनेट शटडाउन हो चुके हैं. हाल ही के शटडाउन में अगर देखें तो असम के बहुत ज्यादा हिस्सों में इन्टरनेट बंद है, साथ ही मुर्शिदाबाद और पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों में भी इन्टरनेट बंद है.

आइये देखते हैं दुनिया में इन्टरनेट कहां-कहां बंद है और भारत के साथ इसका तुलनात्मक विवरण.

इंटरनेट शटडाउन ट्रैकर वेबसाइट ट्रैक करती है कि विश्व में इन्टरनेट शटडाउन कहां और कब हुए हैं. भारत की अगर बात करें तो 93 शटडाउन हो चुके हैं और दुनिया का कोई भी देश इन्टरनेट शटडाउन के मामले में हमारे आस पास नहीं आता है. पिछले साल भी भारत ने लगभग 134 इन्टरनेट शटडाउन देखे थे.

इस बात को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है कि इन्टरनेट शटडाउन कई जगहों पर काफी लंबे भी हुए हैं और महीनों तक भी चले हैं जैसे कि असम में, जम्मू और कश्मीर में इत्यादि. इन्टरनेट ट्रैकर वेबसाइट के अनुसार 2012 से लेकर अब तक लगभग 365 इन्टरनेट शटडाउन देखे जा चुके हैं.

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2012 – 3 इंटरनेट शटडाउन

2013 – 5 इंटरनेट शटडाउन

2014 – 6 इंटरनेट शटडाउन

2015 - 14 इंटरनेट शटडाउन

2016 - 31 इंटरनेट शटडाउन

2017 - 79 इंटरनेट शटडाउन

2018 - 134 इंटरनेट शटडाउन

2019 - 93 (15 दिसंबर 2019 तक)

2019 में भारत में सबसे ज्यादा इंटरनेट शटडाउन जम्मू और कश्मीर में देखा गया है.

किसी क्षेत्र में इंटरनेट बंद होने की संख्या की गणना किसी विशेष क्षेत्र में शटडाउन घोषणाओं के आधार पर की जाती है. उदाहरण के लिए, यदि 15 अलग-अलग अवसरों पर पुलवामा में इंटरनेट को निलंबित कर दिया गया था, तो क्षेत्र 15 बार प्रभावित हुआ था.

2019 में, भारत में 93 बार इंटरनेट शटडाउन की घोषणा की गई, जिसने कुल 167 क्षेत्रों को प्रभावित किया. इनमें से, जम्मू और कश्मीर में 53 बार सबसे अधिक शटडाउन देखा गया, जो 93 क्षेत्रों को प्रभावित करता है, जो कि कुल इंटरनेट शटडाउन घोषणाओं का 59 प्रतिशत है और इस वर्ष भारत में कुल क्षेत्र का 56 प्रतिशत प्रभावित हुआ.

5 अगस्त के बाद से, जब केंद्र ने जम्मू और कश्मीर का विभाजन किया और अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया, तब इंटरनेट सेवाओं को समाप्त कर दिया गया था. इसका मुख्य कारण मिलिटेंसी से जुड़े मुद्दें भी थे.

भारत में इंटरनेट शटडाउन होने के कारण कुल प्रभावित क्षेत्र 167 हैं.

जम्मू और कश्मीर में - 93 अगस्त 5 के बाद से

हरियाणा - 1

राजस्थान - 18

उत्तर प्रदेश - 11

बिहार - 1

मध्य प्रदेश - 4

ओडिशा - 2

मेघालय - 6

असम - 12

अरुणाचल प्रदेश - 2

मणिपुर- 1

पश्चिम बंगाल - 9

त्रिपुरा - 5

महाराष्ट्र - 2

  • गणना में अलग-अलग दिनों के लिए एक ही क्षेत्र में और एक ही दिन में अलग-अलग क्षेत्रों के लिए कई इन्टरनेट शटडाउन शामिल हैं.

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आइये अब 2018 में भारत और बाकी देशों का इन्टरनेट शटडाउन के बारे में तुलनात्मक विवरण.

पाकिस्तान – 12 इंटरनेट शटडाउन

यमन – 7 इंटरनेट शटडाउन

इराक – 7 इंटरनेट शटडाउन

बांग्लादेश – 5 इंटरनेट शटडाउन

रूस – 2 इंटरनेट शटडाउन

टर्की – 1 इंटरनेट शटडाउन

श्रीलंका – 1 इंटरनेट शटडाउन

इथियोपिया – 6 इंटरनेट शटडाउन

साउथ कोरिया – 1 इंटरनेट शटडाउन

इंडोनेशिया – 1 इंटरनेट शटडाउन

भारत – 134 इंटरनेट शटडाउन इत्यादि

इन्टरनेट शटडाउन का इकॉनमी पर और अन्य प्रभाव

आजकल अधिकतर सब डिजिटल हो गया है और अधिकतर काम इन्टरनेट की मदद से हो जाता है जैसे गूगल पर सर्च करना, ऑनलाइन खाना आर्डर करना, फॉर्म भरना, इत्यादि. इसके अलावा ऑनलाइन ट्रांसेकशन करना, ऑनलाइन बिज़नस करना, रिजल्ट भी चेक किया जा सकता है और ये सब इन्टरनेट के कारण. यदि ये सब कुछ समय के लिए बंद हो जाए तो कितनी परेशानियों का सामना करना पढ़ सकता है.

इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनॉमिक रिलेशंस के एक अध्ययन के अनुसार, 2012 से 2017 तक देश में इंटरनेट बंद होने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था को $ 3 बिलियन का नुकसान हुआ. सोचिये ये नुक्सान 2017 तक है और अगर 2018 और 19 को भी जोड़ दिया जाए तो और कितना होगा. न्यू यॉर्क टाइम्स के लेख Deloitte द्वारा एक विश्लेषण के अनुसार, जिन देशों में "मध्यम" इंटरनेट की पहुंच 49% से 79% है वहां इंटरनेट शटडाउन से दैनिक आर्थिक गतिविधि को $6.6 मिलियन प्रति 10 मिलियन लोगों को नुक्सान होता है. आर्थिक नुकसान के साथ इन्टरनेट शटडाउन के कारण सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी प्रभाव पड़ता है.

2016 में UN के resolution के अनुसार इन्टरनेट शटडाउन नहीं होना चाहिए. “The promotion, protection and enjoyment of human rights on the internet”. यहीं आपको बता दें कि ये resolution non-binding है इसलिए इसका कई बार उल्लंघन किया जा चुका है.

इन्टरनेट शटडाउन का समाधान क्या हो सकता है?

ये हम सब जानते हैं कि सरकार इन्टरनेट शटडाउन मज़बूरी में आकर करती है. इससे सबसे ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं वो भी सोशल मीडिया और विभिन्न एप्प्स के जरिये. लोगों तक गलत मेसेज न जाए इसलिए इन्टरनेट शटडाउन किया जाता है. ऐसे में कुछ एप्प्स को कुछ दिनों के लिए रोका जा सकता है जैसे फेसबुक, whatsup, इत्यादि परन्तु इन्टरनेट को ओवरआल तरीके से बंद करने से लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

पुलिस को अपग्रेड किया जा सकता है, नए तरीकों को खोजा जाए ताकि हमेशा इन्टरनेट शटडाउन करने की नौबत न आए.  

तो अब आप इंटरनेट शटडाउन और इसके प्रभावों के बारे में जान गए होंगे. ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि अधिकतर इन्टरनेट शटडाउन विकासशील देशों में देखा जा रहा है जिससे वहां कि अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है.

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