New Public Sector Enterprises Policy:नॉन स्ट्रेटेजिक सरकारी कम्पनियों का निजीकरण क्यों और कैसे?

भारत की अर्थव्यवस्था को मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है. इसको मिश्रित इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ पर सरकारी और निजी दोनों कम्पनियाँ अर्थव्यवस्था में मौजूद हैं. जिन कंपनियों में सरकारी की हिस्सेदारी ज्यादा होती है उन्हें सरकारी कम्पनियाँ कहा जता है और जिन कंपनियों में निजी क्षेत्र के लोगों की हिस्सेदारी ज्यादा होती है उन्हें निजी कम्पनियाँ कहा जाता है.

भारत में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिए सबसे पहली औद्योगिक नीति 1948 में बनायी गयी थी इसके बाद 1956 और फिर 1991 में नयी आर्थिक नीति बनाई गयी थी जिसमें बहुत से क्षेत्रों को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया था लेकिन सामरिक महत्त्व के क्षेत्रों को केवल सरकार के लिए आरक्षित का दिया गया था.

लेकिन अब एक 1991 के बाद फिर से भारत सरकार एक नई सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम नीति (New Public Sector Enterprises Policy) बनाने जा रही है.

नई सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम नीति (New Public Sector Enterprises Policy) क्या है?

नई उद्यम नीति के अनुसार, सार्वजनिक उपक्रमों को रणनीतिक और गैर-रणनीतिक लोगों के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा. जिसमें रणनीतिक क्षेत्रों में कुल सार्वजनिक उपक्रमों की संख्या कम से कम एक और अधिकतम चार होगी और शेष गैर-सामरिक क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों या सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण या विलय हो जाएगा या होल्डिंग कंपनियों के रूप में लाया जायेगा. 

यदि किसी विशेष रणनीतिक क्षेत्र में 4 से अधिक सार्वजनिक उपक्रम हैं, तो उनका विलय या निजीकरण किया जाएगा, ताकि कुल संख्या चार बनी रहे और इससे अधिक न हो. इस नीति का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की प्रशासनिक लागत को कम करना है.

निजीकरण किसे कहते हैं? (What is Privatiosation)

साधारण शब्दों में कहा जाये तो निजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी कंपनी का मालिकाना हक़, संपत्ति और व्यवसाय सरकारी हाथों से निकलकर निजी हाथों में चला जाता है. ऐसे मामले में सरकार, किसी कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 51% से अधिक बेच देती है.

भारत में सामरिक क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम किन्हें कहते हैं? (What is Strategic Sector Undertaking)

इससे पहले, सामरिक क्षेत्र को औद्योगिक नीति के आधार पर परिभाषित किया जाता था. सरकार ने औद्योगिक नीति के आधार पर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (CPSE) को 'रणनीतिक' और 'गैर-रणनीतिक' के रूप में वर्गीकृत किया है जो समय-समय पर बदलते रहते हैं. जो क्षेत्र, देश के लिए विशेष महत्त्व या बहुत ही संवेदनशील प्रकार के होते हैं उन्हें सामरिक क्षेत्र (strategic sectors) के उद्योग कहा जाता है. इसके अनुसार भारत में सामरिक क्षेत्र के अंतर्गत ये सेक्टर हैं;

1. रक्षा उपकरणों के लिए गोला-बारूद और हथियार 

2. रक्षा विमान और युद्धपोत

3. परमाणु ऊर्जा

4. कृषि, चिकित्सा और गैर-रणनीतिक उद्योग में विकिरण के अनुप्रयोग

5. रेलवे

ध्यान रहे कि भारत में रणनीतिक क्षेत्रों के अलावा अन्य सभी सार्वजनिक उपक्रम गैर-सामरिक क्षेत्र में आते हैं, जिनमें विद्युत वितरण कंपनियां, बीमा औए बैंकिंग इत्यादि शामिल हैं.

अब नयी पालिसी में ऊपर दिए गए 5 सेक्टर्स में अधिकत्तम 4 ही बचेंगे. अर्थात इनमें एक और बेचा जायेगा या फिर केवल एक ही बचेगा.

भारत में सार्वजानिक क्षेत्र के उपक्रम हैं? (Public Sector Undertakings in India)

31 मार्च, 2019 तक भारत में लगभग 298 सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (PSE) थे, जिसमें कुल 16,40,628 करोड़ रुपये का निवेश, रु. 2,75,697 करोड़ का भुगतान पूँजी और 15 लाख से अधिक कर्मचारी थे.

कुछ परिभाषित क्षेत्रों में सार्वजनिक उपक्रमों की संख्या पर एक नज़र:

सेक्टर

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की संख्या

पॉवर 

9 (एनटीपीसी द्वारा अधिग्रहित 2 सहित)

पेट्रोलियम 

13 (ONGC के तहत 3 सहित)

रेलवे 

11

कोयला 

11(कोल इंडिया लिमिटेड की 8 सहायक कंपनियों सहित)

टेलिकॉम 

5

नागर विमानन

3

माइंस 

3

उम्मीद है कि नई सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम नीति जल्दी ही अमल में लायी जाएगी और लेकिन उम्मीद यह भी है कि इसमें इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि बहुत बड़ी मात्रा में सरकारी नौकरियां ख़त्म ना हों क्योंकि यदि ऐसा होता है तो देश में बड़ी मात्रा में बेकारी फैलेगी जो कि इकॉनमी के लिए शुभ नहीं होगा.

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