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महासागर अम्लीकरण क्या है और यह समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को कैसे प्रभावित करता है?

पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है, उसमें से 97 प्रतिशत सागरों और महासागरों में है और केवल तीन प्रतिशत पानी पीने योग्य है जिसमें से 2.4 प्रतिशत उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के ग्लेशियरों में जमा हुआ है और केवल 0.6 प्रतिशत पानी नदियों, झीलों और तालाबों में है। हमारा महासागर कार्बन सिंक की तरह कार्य करता है जो मनुष्य द्वारा उत्पन्न किया गया कार्बन डाइऑक्साइड का एक चौथाई अवशोषित करता है जो महासागर के मूल रसायन में परिवर्तन का कारण बनता है।

महासागर अम्लीकरण (Ocean Acidification) क्या है?

Source: coastadapt.com.au

जब कार्बन डाइऑक्साइड सागरीय जल में घुल जाता है तब रासायनिक प्रतिक्रिया के कारण कार्बनिक अम्ल (H2CO3) का निर्माण होता है जिसके वजह से जल में हाइड्रोजन आयन की मात्रा में वृद्धि हो जाती है, जिससे महासागर की अम्लता बढ़ जाती है और समुद्र के पानी की pH कम हो जाती है। इस प्रक्रिया को महासागर अम्लीकरण कहते हैं। दुसरे शब्दों में, जब सागरीय पीएच मान में निरंतर कमी होने के कारण महासागर के मूल रसायन में परिवर्तन हो तो उसे महासागर अम्लीकरण कहते हैं।

महासागर द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के जलवायु प्रभाव को कम करने में मदद करता है, लेकिन साथ ही साथ महासागर के पीएच मान पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

पीएच (pH) स्केल की संकल्पना और महत्व

महासागर के जल का पीएच मान अगर अप्राकृतिक ढंग से निरंतर कमी होने पर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखलाओं को प्रभावित करता है। प्रवाल, एचिनोदर्म, क्रुस्तासंस और मोल्लुस्क्स जैसे समुंद्री जीव गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

महासागर अम्लीकरण का क्या कारण है?

निम्नलिखित कारणों से महासागर रसायन शास्त्र में निरंतर बदलाव हो रहे हैं:

1. औद्योगिक क्रांति

2. कार्बन डाइऑक्साइड की उच्च एकाग्रता

3. जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल

4. सीमेंट विनिर्माण

5. भूमि उपयोग के परिवर्तन

6. महासागर में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर बढ़ना

7. वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना

8. रासायनिक प्रतिक्रियाएं हाइड्रोजन आयनों की उच्च एकाग्रता के कारण बनती हैं

9. कार्बोनेट आयनों में कमी

10. जैव विविधता का नुकसान

11. बायोगैस के उत्पादन के तकनीक में बदलाव

12. पर्यावरण के अनुकूल कानूनों और विनियमों की कमी

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महासागर अम्लीकरण समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को कैसे प्रभावित करता है?

1. यह कार्बोनेट की एकाग्रता को कम करता है, जो समुद्री जल में निर्माण खंड के लिए महत्वपूर्ण होता है।

2. यह समुद्री जीव के खाद्य श्रृंखला को बाधित कर देता है जिसके वजह से अम्लीकृत पानी में कैल्शियम कार्बोनेट के गोले या सीप बनाने में कठिनाई होती है।

3. इसका वाणिज्यिक मछलीपालन, शंख बनाने, जलीय कृषि, मनोरंजक मछलीपालन, स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग जैसे पर्यटन गतिविधियों पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है।

औद्योगीकरण के बाद ही महासागर अम्लीकरण में वृद्धि हुई है। महासागर के पानी का पूर्व-औद्योगीकरण पीएच मान 8.179 था जो H+ आयनों में 19% की वृद्धि के कारण 8.1074 तक पहुच गया है। वर्तमान में, महासागर के जल की पीएच मान 8.069 है और यह 18वीं शताब्दी के औद्योगिकीकरण के बाद H+ यूनियनों में 28.8% की वृद्धि के अनुरूप है।

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