फॉर्म 26AS क्या है और इसे क्यों जारी किया गया है?

भारत में कर चोरी की संस्कृति को खत्म करने के लिए आयकर विभाग कड़ी मेहनत कर रहा है. देश में आयकर रिटर्न फाइलिंग प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न टूल्स और फॉर्म्स प्रस्तुत किए गए हैं.

हाल ही में, आयकर विभाग ने इस वित्त वर्ष 2020-21 से एक संशोधित फॉर्म 26 AS या वार्षिक सूचना विवरण लॉन्च किया है. इस फॉर्म में करदाताओं द्वारा किए गए सभी उच्च मूल्य के लेनदेन का विवरण होगा.

आइये अब इस फॉर्म 26 AS के बारे में और जानते हैं;

फॉर्म 26 AS क्या है (What is the Form 26 AS)

फॉर्म 26 AS में स्रोत पर कर कटौती (TDS) और स्रोत पर कर संग्रह (TCS) का ब्यौरा होता है. अब इस फॉर्म में संपत्ति और शेयर लेनदेन की सूचना को भी शामिल किया गया है.

फॉर्म 26 AS में आपके द्वारा सरकार को दिए गए कर के बारे में जानकारी होती है. यदि आपने अपनी आय पर कर का भुगतान किया है या किसी व्यक्ति / संस्थान ने आपकी कमाई पर कर काटा है, तो आपको फॉर्म 26 AS में भी इसका उल्लेख करना होगा. अतः आप फॉर्म 26 AS की मदद से अपनी आय और कर के बारे में विवरण जान सकते हैं.

फॉर्म 26AS आपका वार्षिक कर विवरण है. आप इसे अपने पैन नंबर की मदद से आयकर विभाग की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं. यह फ़ॉर्म करदाताओं द्वारा किए गए सभी उच्च-मूल्य के लेनदेन के विवरण को दर्शाएगा. पहले कर अधिकारियों को बैंकों जैसे वित्तीय संस्थानों से यह जानकारी मिलती थी.

फॉर्म 26 AS क्यों शुरू किया गया है (Why Form 26AS launched)?

वित्तमंत्री ने बजट 2020-21 में फॉर्म 26 AS के बारे में घोषणा की थी. इसकी शुरूआत के पीछे मूल उद्देश्य उच्च मूल्यों के लेनदेन के बारे में जानकारी प्राप्त करना है.ध्यान रहे कि यह फॉर्म पहले से ही मौजूद है लेकिन अब आयकर दाताओं की सुविधा के लिए इसमें कुछ परिवर्तन किया गया है.

इससे करदाताओं को 'इनकम टैक्स रिटर्न' फाइल करने में आसानी होगी. करदाता को फॉर्म के जरिए वित्तीय लेनदेन याद रहेगा और ITR दाखिल करते समय उसके पास एक अनुमान पहले से ही तैयार होगा.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने कहा कि आयकर विभाग; अचल संपत्ति की बिक्री / खरीद, बैंक के बचत खातों से नकद जमा / निकासी, शेयरों की खरीद, शेयरों की पुनर्खरीद, डिबेंचर, समय जमा, विदेशी मुद्रा, क्रेडिट कार्ड से भुगतान, म्यूचुअल फंड की खरीद, वस्तुओं और सेवाओं के लिए नकद भुगतान, इत्यादि के बारे में जानकारी, "विशिष्ट संस्थानों" जैसे बैंक, रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार, म्यूचुअल फंड, और बांड जारी करने वाले संस्थानों से प्राप्त करता था.

इस फॉर्म 26 AS की शुरुआत के बाद, आयकर प्राधिकरण को निम्न रिकॉर्ड का विवरण पता चलेगा;

1. एक वित्तीय वर्ष में कैश के रूप में 10 लाख रुपये या उससे ऊपर की राशि को जमा लेनदेन.

2. किसी भी व्यक्ति द्वारा एक वित्तीय वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक का नकद भुगतान.

3. एक वित्तीय वर्ष में किसी व्यक्ति द्वारा 10 लाख रुपये या उससे अधिक के एक या अधिक क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान.

4. एक वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड, डिबेंचर/बॉन्ड, शेयर्स, शेयरों की खरीद-फरोख्त 10 लाख रुपये से अधिक होना.

5. एक वित्तीय वर्ष में 30 लाख रुपये या उससे अधिक की अचल संपत्ति की बिक्री या खरीद.

अतः फॉर्म 26AS की शुरूआत देश में कर चोरी की प्रथा को समाप्त करने के लिए सरकार का एक और प्रयास है. अब यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि सरकार का यह कदम किस हद तक कर चोरी को रोकने में कामयाब होगा?

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