भारत में “गाय कर” क्या है और किन-किन राज्यों में लगाया जाता है?

दुनिया के बहुत से देशों में अजीब-गरीब कर लगाये जाते हैं. जैसे स्विट्ज़रलैंड में पालतू कुत्ते रखने पर टैक्स लगाया है, आयरलैंड में गायों के पादने से निकनले वाली मीथेन गैस पर कर लगाया जाता है और स्वीडन में बच्चों के ‘अजीब नाम’ रखने पर टैक्स लगाया जाता है. इसी प्रकार का एक टैक्स भारत में गायों के ऊपर लगाया जाता है जिसे 'गाय कल्याण टैक्स' या काऊ सेस कहा जाता है. आइये इस लेख में जानते हैं कि भारत के किन राज्यों में काऊ सेस लगाया जाता है और इसकी दर क्या होती है?

1. पंजाब

ज्ञातव्य है कि पंजाब में हर साल लगभग 1000 हजार लोगों की मौंत इन आवारा पशुओं से जुडी घटनाओं में हो जाती है इसके अलावा ये पशु फसल का भी बड़ी मात्रा में नुकसान करते हैं. इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार इनकी देखभाल के लिए काऊ सेस का कांसेप्ट लायी है.

भारत में गाय कर या काऊ सेस की शुरुआत इसी प्रदेश से शुरू की गयी थी. पंजाब के भटिंडा में गाय उपकर पहली बार 2009 में प्रायोगिक आधार पर लगाया गया था, जबकि इसे लगभग तीन महीने बाद मोहाली में लगाया गया था. पंजाब सरकार ने इस कर को पूरे राज्य में लगाने के लिए वर्ष 2014 में आदेश जारी कर दिया था. पंजाब की 154 नगरपालिका परिषदों में से 33 ने इस सम्बन्ध में प्रस्ताव पास कर दिया है. वर्ष 2016 तक इसे पंजाब की अन्य नगरपालिका परिषदों ने लागू कर दिया था.

पंजाब के स्थानीय निकाय विभाग ने फोर व्हीलर की खरीद पर 1,000 रुपये, टू व्हीलर की खरीद पर 500 रुपये, वातानुकूलित मैरिज हॉल बुक करने पर 1000 रुपये, नॉन-एसी हॉल की बुकिंग पर 500 रुपये, तेल टैंकर पर 100 रुपये, बिजली की खपत पर 2 पैसे प्रति यूनिट, भारत के बनी शराब की हर बोतल और बीयर की बोतल पर 5 रुपये, भारत में बनी विदेशी शराब की हर बोतल पर 10 रुपये और सीमेंट की हर बोरी की खरीद पर 1 रुपये प्रति बैग के हिसाब से काऊ सेस लगाया है.

पंजाब सरकार को काऊ सेस से हर साल 90 से 100 करोड़ रुपये प्राप्त होने का अनुमान है जिसे गायों के कल्याण जैसे उनके रहने, खाने और पीने और अन्य सुविधाओं पर खर्च किया जायेगा. हालाँकि काऊ सेस से सरकार को 23 जनवरी 2018 तक केवल 15 करोड़ रुपये मिले थे. ज्ञातव्य है कि पंजाब में 512 गौशालाएं हैं.

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2. चंडीगढ़

इस केंद्र शासित प्रदेश में गाय कर लगाने की शुरुआत पंजाब की तर्ज पर शुरू की गयी थी. चंडीगढ नगर निगम ने 29 जून 2018 से काऊ सेस लगाने की अनुमति दी थी.

चंडीगढ़ निवासियों को चार-पहिया वाहनों की खरीद के लिए 500 रुपये गाय उपकर का भुगतान करना होगा, जबकि दुपहिया वाहनों की खरीद पर 200 रुपये गाय के उपकर के रूप में लिए जाते हैं. बिजली उपभोक्ताओं को गाय उपकर के रूप में प्रति यूनिट 2 पैसे का भुगतान करना होगा और ध्यान रहे कि चंडीगढ़ में लगभग 2 लाख बिजली उपभोक्ता हैं.

इसके अलावा यहाँ पर देश में बनी शराब की हर बोतल पर 5 रुपये जबकि देश में बनी विदेशी शराब की हर बोतल पर 10 रुपये और बीयर की बोतल पर 5 रूपए का काऊ सेस लगाया जाता है.

ज्ञातव्य है कि चंडीगढ नगर निगम के पास पशुओं के लिए 3 बाड़े (cattle pounds) हैं जिनमें लगभग 1000 पशुओं को रखा जा सकता है.

चंडीगढ नगर निगम; भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत काऊ कर लगाकर वसूलता है, जबकि वाहनों पर काऊ सेस, वाहन कराधान अधिनियम, 1924 के तहत और बिजली पर काऊ सेस को पंजाब इलेक्ट्रिसिटी (ड्यूटी) अधिनियम, 1958 के आधार पर वसूला जा रहा है.</