OPEC क्यों छोड़ रहे हैं सदस्य देश?

OPEC; विश्व के सबसे बड़े तेल निर्यातक देशों का संघ है. इसे इकोनॉमिक्स की भाषा में 'कार्टेल' कहा जाता है. सितम्बर 2019 तक OPEC देश पूरे विश्व में लगभग 29.3% कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए जिम्मेदार हैं. 

OPEC के मुख्य उद्येश्य (OPEC Purposes)
OPEC का मुख्य उद्येश्य कच्चे तेल की कीमतों में कमी ना होने देना है. OPEC के सदस्य देश हर साल मीटिंग करके यह तय कर लेते हैं कि कौन देश प्रतिदिन कितने बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करेगा ताकि इंटरनेशनल मार्किट में कच्चे तेल की आपूर्ति बहुत ज्यादा ना हो और कच्चे तेल की कीमतें नीचे ना गिरें. 


ओपेक के सदस्य (OPEC Members)
जनवरी 2019 में कतर के ओपेक को छोड़ने के बाद इसके सदस्यों की संख्या 14 रह गयी है. इनके नाम इस प्रकार हैं;
1.सऊदी अरब 

2. वेनेजुएला

3. इराक

4. ईरान

5. कुवैत

6. नाइजीरिया

7. संयुक्त अरब अमीरात

8. अंगोला

9. अल्जीरिया

10. कांगो

11. इक्वाडोर

12. गिनी

13. गैबन

14. लीबिया

अब ऐसी ख़बरें हैं कि इक्वाडोर, OPEC के बाहर जाने वाला है. आइये अब जानते हैं कि इक्वाडोर OPEC क्यों छोड़ रहा है और अन्य देश भी भविष्य में ओपेक को क्यों छोड़ सकते हैं?

दरअसल, इक्वाडोर भी पाकिस्तान जैसी आर्थिक बदहाली से गुजर रहा है. इसने भी पाकिस्तान की तरह ही IMF से लोन लिया है, यहाँ पर महंगाई बढ़ रही है, बेरोजगारी बढ़ने से देश में कुल मांग घट गयी है, सरकार के पास राजकोषीय व्यय करने के लिए पर्याप्त धन नहीं हैं और OPEC का सदस्य होने के कारण यह अपनी जरूरत के हिसाब से ज्यादा तेल का उत्पादन नही कर सकता है क्योंकि उसका प्रतिदिन का कच्चे तेल का उत्पादन कोटा OPEC ने केवल 5.45 लाख बैरल फिक्स कर रखा है.

इक्वाडोर की सरकार कह रही है कि इस कोटे के हिसाब से तेल का उत्पादन करने पर उसके देश की अर्थव्यवस्था को डूबने से नहीं बचाया जा सकता है. अतः OPEC छोड़ना हमारी मजबूरी भी हो सकती है.
ऐसा नहीं है कि इक्वाडोर OPEC को पहली बार छोड़ रहा है. इक्वाडोर ने 1973 में OPEC ज्वाइन किया था 1992 में छोड़ और फिर 2007 में ज्वाइन कर लिया था.

इंडोनेशिया ने अपने तेल का उत्पादन बढ़ाने के लिए 2016 में OPEC को छोड़ दिया था.
ऐसे समय में जब पूरे विश्व में अमेरिका ने बता रखा है कि कोई देश ईरान और वेनेजुएला  से तेल नहीं खरीदेगा और चीन और भारत ने ईरान से तेल आयत करना कम भी कर दिया है. अन्य देश भी ऐसा ही निर्णय ले चुके हैं ऐसे समय में अब ईरान को तेल बेचने के अन्य  विकल्प खोजने होंगे अर्थात उसे अपनी जरूरत के हिसाब से तेल का उत्पादन कम या ज्यादा करना होगा. 

लेकिन OPEC का सदस्य होने के कारण ईरान; तेल का उत्पादन अपनी मर्जी से कम नहीं कर सकता है अर्थात उसे अपना तेल सस्ते दामों पर बेचने के लिए भी मजबूर होना पड़ सकता है. लेकिन यदि वह OPEC की सदयता छोड़ देता है तो प्रतिदिन तेल उत्पादन की मजबूरी से बचा जा सकता है.

अगर भविष्य में इसी तरह की अनिश्चितता का दौर चलता रहा और OPEC के सदस्य देश अपने देश की समस्याओं को ख़त्म करने के लिए ओपेक से बाहर आते रहे तो ऐसा हो सकता है कि निकट भविष्य में ओपेक टूट जाए. हालाँकि कुछ भी कहने से पहले भविष्य का इंतजार करना होगा. उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे कि OPEC के सदस्य देश इसे क्यों छोड़ रहे हैं.  

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