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भारत में बजट सेडान कारें छोटी क्यों होती हैं?

Arfa Javaid

जैसे फैशन इंडस्ट्री में साइज़ ज़ीरो का चलन है, ठीक वैसे ही भारतीय मोटर वाहन उद्योग में सब 4-मीटर का विनियमन है। लेकिन सब-4 मीटर सेगमेंट या कॉम्पैक्ट कार सेगमेंट क्या है और कंपनियां इसे क्यों अपना रही हैं?

सब 4-मीटर का विनियमन

भारतीय सड़कों पर बढ़ती कारों की भीड़ कम करने के प्रयास में भारत सरकार द्वारा एक विनियमन तैयार किया गया था। इस विनियमन के अनुसार, सरकार ने कम माप वाली कारों पर कम उत्पाद शुल्क की पेशकश की जो 1200 सीसी से कम इंजन विस्थापन वाले पेट्रोल इंजन या 1500 सीसी से कम इंजन विस्थापन वाले डीजल इंजन द्वारा संचालित हैं। 

ऊपर दिए गए विनिर्देशों में अगर कार फिट बैठती है तो निर्माताओं को केवल 8% उत्पाद शुल्क का भुगतान करना होगा। वहीं समान इंजन विनिर्देशों वाली कार जो 4 मीटर से अधिक लंबी हो, उस पर निर्माताओं को 20% का उत्पाद शुल्क भरना पड़ता है, जबकि बड़े इंजन और बड़े आकार की एसयूवी वाली लंबी कारों पर 24% शुल्क उत्पाद शुल्क भरना पड़ता है। 

भारत में सेडान कारों की शुरुआत

भारत में टाटा मोटर्स ने सेडान के लिए इंडिगो से कुछ इंच कम कर दिए और इस तरह इंडिगो सीएस (कॉम्पैक्ट सेडान) का जन्म हुआ, जो भारत की पहली सब-4 मीटर सेडान है। 

इसके बाद मारुति सुजुकी ने स्विफ्ट डिजायर के साथ इस सेगमेंट को लोकप्रिय बना दिया और वैश्विक कार निर्माता हुंडई (एक्सेंट, ऑरा) से होंडा (अमेज़) और फोर्ड (एस्पायर) से वोक्सवैगन (एमियो) तक इस सेगमेंट में कूद गए।

भारत की पहली 'लोकप्रिय' सब -4 मीटर एसयूवी फोर्ड इकोस्पोर्ट थी जो 2012 में लॉन्च हुई थी। इसके बाद मारुति सुजुकी विटारा ब्रेज़ा (2016), होंडा डब्ल्यूआर-वी (2017), टाटा नेक्सॉन (2017), महिंद्रा एक्सयूवी 300 (2019), हुंडई वेन्यू (2019), किआ सॉनेट (2020), टोयोटा अर्बन क्रूजर (2020) और निसान मैग्नाइट (2020) आदि को लॉन्च किया गया। 

ये भी पढ़ें: जीएसटी के दायरे में आने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

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